Anirudh Chaudhry’s letter to CoA raises questions regarding Yo-Yo test, Ambati Rayudu’s exclusion
Team India © Getty Images

हाल के दिनों में यो-यो टेस्ट क्रिकेट समीक्षकों और फैंस के बीच चर्चा का विषय बन गया है। पिछले कुछ सालों से दुनिया की कई क्रिकेट टीमों के फिटनेस रूटीन का हिस्सा बन चुका ये टेस्ट टीम इंडिया में आकर इतना विवादित कैसे हो गया। इस टेस्ट का नाम भारतीय फैंस के सामने पहली बार तब आया था जब ये टेस्ट सीनियर बल्लेबाजों युवराज सिंह और सुरेश रैना के टीम से बाहर होने के कारण बना था। और हाल में अंबाती रायुडू के यो-यो टेस्ट में फेल होकर टीम से बाहर होने के बाद ये टेस्ट बीसीसीआई और सीओए के बीच बहस का कारण बन चुका है।

बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अमिताभ चौधरी ने हाल ही में प्रशासकों की समिति को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने इस टेस्ट से जुड़े कई अहम पक्षों पर कड़े सवाल उठाए। द प्रिंट में छपे चौधरी के इस पत्र के मुताबिक चौधरी ने पिछले साल 14 नवंबर को भी एक पत्र लिखकर सीओए से कुछ सवाल पूछे थे, जिसका उन्हें कोई जवाब नहीं था। जिसके बाद उन्होंने एक बार फिर आवाज उठाई।

चौधरी की चिट्ठी के अहम सवाल:

a)टीम के फीजियो और ट्रेनर्स के नाम, उनकी योग्यता और अनुभव की जानकारी।
b)एनसीए की रिपोर्टिंग संरचना। क्या ट्रेनर्स फीजियो को रिपोर्ट करते हैं या फीजियो ट्रेनर्स को? आखिर वो काम कैसे करते हैं? आगे की क्यो योजना हैं?
c)उपचार के दौरान और खिलाड़ियों के वर्कलोड पर कौन निर्णय लेता है? अगर फीजियो और ट्रेनर की सोच अलग है तो किसे माना जाता है?
d)एनसीए के मुख्य फीजियो और टीम इंडिया के फीजियो के बीच किस तरह का संबंध है?
e)सीनियर टीम का वर्कलोड किस तरह मैनेज किया जाता है?
f)मैं पिछले एक साल में अनुबंधित खिलाड़ियों की चोटों की पूरी जानकारी चाहूंगा? किस डॉक्टर ने चोट का इलाज किया? क्या निर्धारित किया गया था? क्या रीहैब हुआ था जैसा कि पहले निर्धारित किया गया था? क्या कोई बदलाव हुआ था? क्या चोट खेल के दौरान लगी थी या फिर खेल से बाहर अभ्यास करते समय लगी थी?
g)क्या e और f में मांगे गए रिकॉर्ड स्मार्टबेस सॉफ्टवेयर में दर्ज किए गए थे?
f)पिछले 6 महीनों के लिए स्मार्टबेस सॉफ्टवेयर की एक उपयोग रिपोर्ट।

आखिर अंबाती रायुडू कैसे हुए यो-यो टेस्ट में फेल

चौधरी की चिट्ठी में सबसे बड़ा सवाल रायुडू के यो-यो टेस्ट में फेल होने और इंग्लैंड दौरे से बाहर होने को लेकर किया गया है। चौधरी ने लिखा कि रायुडू का नाम पहले ही इंग्लैंड दौरे पर जाने वाली टीम में शामिल कर लिया गया था, इसका मतलब बोर्ड को जानकारी थी कि वो फिट हैं। उसके बाद उनका फिटनेस टेस्ट में फेल होना अजीब है। इससे चयन प्रक्रिया पर कई सवाल उठते हैं।

फीजियो और ट्रेनर्स का काम होता है कि वो राष्ट्रीय चयनसमिति को फिट और चयन के लिए उपलब्ध खिलाड़ियों की सूची दें। जाहिर है रायुडू का नाम इस सूची में शामिल था, तभी उन्हें इंग्लैंड दौरे के लिए चुना गया था। लेकिन फिर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे एक खिलाड़ी का फिटनेस टेस्ट में फेल होना स्वाभाविक नहीं लगता।

चौधरी ने यो-यो टेस्ट की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब बीसीसीआई ने टीम इंडिया में चयन के लिए यो-यो टेस्ट पास करना अनिवार्य कर दिया गया तो क्या ये जानकारी अंडर-19, लिस्ट ए और प्रथम श्रेणी टीमों को दी गई है। क्या जूनियर खिलाड़ियों को पता है कि सीनियर टीम में चयन के लिए उन्हें इस टेस्ट में पास होना बेहद जरूरी है। चौधरी ने लिखा कि उन्हें पता चला है कि रायुडू ने पहली बार यो-यो टेस्ट दिया था और ऐसे में ये उनके साथ बेहद गलत हुआ।