Arjun is not only Sachin Tendulkar’s son he has his own identity
Arjun Tendulkar © IANS

अर्जुन के साथ तेंदुलकर उपनाम जुड़ा है, ऐसा नाम जिसे विश्व क्रिकेट में बड़े सम्मान से लिया जाता है। सचिन तेंदुलकर ने दो दशक से ज्यादा 22 गज की पट्टी पर जी तोड़ मेहनत कर यह रुतबा हासिल किया है। अर्जुन तेंदुलकर ने इंटरनेशनल क्रिकेट की तरफ अपना पहला कदम बढ़ाया है उनको श्रीलंका दौरे पर जाने वाली अंडर 19 टीम में जगह मिली है।

अर्जुन के सलेक्शन पर पापा 'तेंदुलकर' ने कहा, उसके लिए दुआ करुंगा
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सचिन तेंदुलकर का बेटा होने की वजह से अर्जुन को बचपन से ही बहुत सारी चीजें आसानी से मिली, जिसके लिए कोई आम बच्चा सिर्फ सोच भर सकता है। अर्जुन के साथ तेंदुलकर का नाम जुड़े होने से जितना फायदा मिलता है, उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदारी आती है।

कैसे अलग रही अर्जुन की शुरुआत

अर्जुन को छोटी उम्र से ही इंटरनेशनल क्रिकेटर्स के साथ वक्त बिताने और उनको गेंदबाजी करने का मौका मिला, जिसे लोग उनके लिए बड़ा मौका मानते हैं। यह मौका बड़ा है लेकिन जरा सोच कर देखिए, किसी चौथी क्लास के बच्चे को दसवीं की कोचिंग में भेजा जाए और वह इसका पूरा फायदा उठाते हुए सारी चीजें सीख ले। इसमें क्या सिर्फ वह मौका ही देखा जाएगा या उस बच्चे की काबिलियत को भी सराहा जाएगा, जिसने अपने आप से उपर उठकर चीजों को सीखा। मुंबई इंडियन का प्रैक्टिस सेशन हो टीम इंडिया की नेट प्रैक्टिस या फिर लॉड्स में अंग्रेज बल्लेबाजों को गेंद डालना। अर्जुन को पिता की वजह से यह सब हासिल हुआ है।

Arjun Tendulkar  © IANS
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तेज यॉर्कर से किया था जॉनी बेयरस्टो को घायल

पिछले साल दक्षिण अफ्रीका सीरीज से पहले इंग्लैंड टीम को अर्जुन तेंदुलकर ने नेट्स पर गेंदबाजी की थी। 17 साल के अर्जुन की सटीक यॉर्कर से इंग्लैंड बल्लेबाज जॉनी बेयरस्टो चोटिल हो गए थे और प्रैक्टिस छोड़नी पड़ी थी।

अर्जुन ने प्रदर्शन से छोड़ी छाप

जनवरी 2010 में अर्जुन ने पुणे में खेले गए अंडर-13 क्रिकेट टूर्नामेंट से घरेलू क्रिकेट में कदम रखा। नवंबर 2011 में धीरूभाई इंटरनेशनल स्कूल की तरफ से खेलते हुए जमनाबाई नर्सरी स्कूल के खिलाफ उन्होंने 22 रन देकर 8 विकेट चटकाए। खार जिमखाना की तरफ से खेलते हुए जून 2012 में अर्जुन ने अंडर-14 क्रिकेट में शानदार शतक जमाया था।

Arjun Tendulkar © Getty Images
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अर्जुन को अगर तेंदुलकर होने का फायदा मिला है तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं। वह चाहे कल को क्रिकेट के बड़े सितारे भी बन जाएं पर शायद उनको पुकारा तेंदुलकर के नाम से ही जाएगा। जो नाम सचिन ने बरसों की मेहनत से कमाया उसका फायदा तो बेटे को मिलना ही है। इससे ज्यादा कुछ और नहीं क्योंकि टीम में बने रहने का पैमाना सिर्फ और सिर्फ प्रदर्शन ही होता है।