सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ © Getty Images
सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ © Getty Images

मौजूदा भारतीय टीम की सफलता का श्रेय पिछले कुछ समय तक कप्तान रहे महेन्द्र सिंह धोनी को दिया जाता है, निश्चित रूप से धोनी इस श्रेय के हकदार हैं, लेकिन उनकी इस सफलता में उपकप्तान रहे विराट कोहली के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता है। इसी तरह क्रिकेट में ऐसे बहुत से ऐसे कप्तान रहे हैं जिनकी सफलता में उनके डेप्यूटी (उपकप्तान) के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। तो आइए जानते हैं ऐसे कुछ कप्तान और उपकप्तान जोड़ियों के बारे में जिन्होने सफलता के नए मुकाम को छुआ।

1. सौरव गांगुली- राहुल द्रविड़:

जब सौरव गांगुली ने भारतीय टीम की कप्तानी संभाली थी तो उस समय भारतीय क्रिकेट फिक्सिंग के आरोपों से जूझ रहा था। गांगुली ने एक नई टीम बनाई और एक बार फिर से दर्शकों का भरोसा जीता। गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम ने विदेशों में जाकर टेस्ट मैच जीतना शुरू किया, लेकिन गांगुली की इस सफलता में द्रविड़ का भी मुख्य योगदान रहा। द्रविड़ ने टेस्ट मैचों में रनों का अंबार लगाते हुए टेस्ट में जीत दिलाई तो वनडे में उन्होने गांगुली के कहने पर विकेटकीपिंग की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभाई।

2. रिकी पोंटिंग- एडम गिलक्रिस्ट:

रिकी पोंटिंग के सबसे सफल कप्तान होने के पीछे सबसे बड़ा कारण था कि उनके पास एक शानदार टीम थी और साथ ही एक ऐसा उपकप्तान था जो टीम को तूफानी शुरूआत देते थे। पोंटिंग और गिलक्रिस्ट ने कप्तान और उपकप्तान के रूप में ऑस्ट्रेलियाई टीम को अजेय बना दिया था। इन दोनों ने मिलकर ऑस्ट्रेलिया को दो बार विश्व विजेता बनाया।

3. महेला जयवर्धने- कुमार संगाकारा:

श्रीलंका के लिए कप्तान और उपकप्तान की इस जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन किया। बल्ले के अलावा संगाकारा और जयवर्धने कप्तान और उपकप्तान के रूप में अक्सर विकेट पर विचार विमर्श करते दिख जाते थे। 2007 और 2011 में विश्व कप में नाकामी हाथ लगने के बाद भी दोनों ने हार नहीं माना और 2014 टी20 विश्व कप में टीम को जीत दिला कर ही दम लिया।

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4. मार्क टेलर- स्टीव वॉ:

रिकी पोंटिंग ने जिस टीम को अजेय बना दिया उसकी इमारत खड़ी करने वाले दो कप्तान मार्क टेलर और स्टीव वॉ ही थे। टेलर की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने एक मजबूत टीम की नींव रखी थी तो स्टीव ने उपकप्तान के तौर पर टेलर का साथ दिया। टेलर के संन्यास लेने के बाद स्टीव वॉ ने इसी टीम के साथ 1999 में ऑस्ट्रेलिया को दूसरी बार विश्व विजेता बनाया। [इसे भी पढ़ें- ]

5. ग्रीम स्मिथ- जॉक कालिस:

साउथ अफ्रीका के सबसे सफल कप्तान बनाने में उपकप्तान जॉक कालिस का योगदान को कम नहीं किया जा सकता। स्मिथ ने 108 टेस्ट मैचों में साउथ अफ्रीका की कप्तानी की तो कालिस टीम के सबसे मुख्य बल्लेबाज की भूमिका निभाते हुए हजारों रन बनाए। इसके अलावा जब भी स्मिथ को विकेटों की जरूरत पड़ी कालिस ने गेंद से भी उनको विकेट झटककर दिये।

6. एंड्रयू स्ट्रास- एलिस्टर कुक:

एंड्रयू स्ट्रास की कप्तानी का जिक्र होते ही एशेज में इंग्लैंड की जीत की बात की जाती है लेकिन ये जीत उपकप्तान एलिस्टर कुक के बिना नामुमकिन था। 2009 में एशेज जीताने वाले स्ट्रास ने 2011 में भी इंग्लैंड को एशेज सीरीज में जीत दिलाई। इस सीरीज में कुक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 127 से ज्यादा की औसत से 750 से ज्यादा रन बनाए। इन दोनों ने इंग्लैंड के लिए सलामी बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड के लिए 5 हजार से ज्यादा रन बनाए।

7. अर्जुन रणतुंगा- अरविंद डीसिल्वा:

क्रिकेट इतिहास के सबसे चतुर कप्तानों में एक गिने जाने वाले श्रीलंकाई कप्तान अर्जुन रणतुंगा को भी उपकप्तान के रूप में भरोसेमंद अरविंद डीसिल्वा का साथ मिला। रणतुंगा ने टीम के हित के लिए रणनीतियां बनाने का काम किया तो डीसिल्वा ने उसको पूरा करने का काम किया। विश्व कप 1996 में डीसिल्वा ही थे जिन्होने फाइनल में शतक बनाकर श्रीलंका को जीत दिलाई।