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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अक्सर मुकाबले खासे दिलचस्प होते रहे हैं। एक दौर था जब ऑस्ट्रेलिया अजेय टीम थी तब भारत ने ही उसे हराते हुए उसकी लगातार 11 जीत का सिलसिला हैदराबाद में खेले गए वनडे मैच के साथ तोड़ा था। ऑस्ट्रेलिया ने 1999, 2003 और 2007 के वर्ल्ड कप जीते और इस दौरान दो टूर्नामेंटों में टीम इंडिया का ऑस्ट्रेलिया से सामना हुआ और टीम इंडिया को मुंह की खानी पड़ी।

साल 2011 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने आखिरकार बदला ले लिया और ऑस्ट्रेलिया को हराने में सफलता अर्जित की। जैसा कि 17 सितंबर से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांच वनडे मैचों की सीरीज शुरू होने जा रही है। ऐसे में हम इन दोनों टीमों के बीच खेले गए कुछ दिलचस्प मैचों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। तो आइए नजर डालते हैं।

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, हैदराबाद 2009 (ऑस्ट्रेलिया 3 रन से जीता):

सीरीज में दोनों टीमें 2-2 मैच जीत चुकी थी। ऐसे में पांचवां मैच जीतते हुए दोनों टीमें बढ़त लेना चाहती थीं। शॉन मार्श और शेन वॉटसन ने ऑस्ट्रेलिया को अच्छी शुरुआत दी। मार्श जहां धीरे-धीरे अपने पैर क्रीज में जमा रहे थे वहीं शेन वॉटसन फ्री होकर बल्लेबाजी कर रहे थे। वॉटसन ने भारतीय गेंदबाजों की हर गलती का फायदा उठाया और जहां चाहा वहां चौका जमा दिया। उन्होंने पहले विकेट के लिए मार्श के साथ शतकीय साझेदारी निभाई। अब वह शतक के करीब नजर आ रहे थे।

जब वह 90 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे तभी उन्होंने हरभजन सिंह की गेंद को स्लॉग स्वीप करने की कोशिश की लेकिन उनके बल्ले के ऊपरी किनारे में लगकर गेंद हवा में उठ गई और वह डीप में पकड़े गए। हालांकि, शॉन मार्श ने जरूर अपना शतक पूरा कर लिया। मिडिल ऑर्डर ने अच्छा योगदान दिया और ऑस्ट्रेलिया ने तगड़ा स्कोर खड़ा किया। अब टीम इंडिया को मैच जीतने के लिए 350 रन बनाने थे।

अबतक इस सीरीज में सचिन तेंदुलकर कुछ खास नहीं कर पाए थे। वह जानते थे कि अगर इंडिया को ये स्कोर चेज करना है तो उन्हें अंत तक टिकना होगा। भारत को शुरुआत ठीक-ठाक मिली। लेकिन सहवाग शुरुआत को भुना नहीं पाए और बेन हिल्फेनहास की गेंद को पुल करने के प्रयास में आउट हो गए। इसके बाद एक के बाद एक 4 विकेट 100 रनों के अंदर गिर गए। सचिन को इसके बाद रैना से अच्छा साथ मिला और वह टीम इंडिया की पारी को पटरी में लाने में लग गए। थोड़ी देर बाद दोनों ही बल्लेबाजों ने आंखे जमाई और करारे प्रहार करने शुरू कर दिए।  [ये भी पढ़ें: विराट कोहली और रवि शास्त्री ने दिया वीरेंद्र सहवाग को 'धोखा'!]

100 से 150 और 150 से 200 पार करने के बाद टीम इंडिया को विश्वास होने लगा कि वे स्कोर को चेज कर सकते हैं। यह साझेदारी तब टूट गई जब सुरेश रैना ने शॉर्ट गेंद का सामना किया और उसे पुल करने के प्रयास में कैच दे बैठे। अब यहां से सचिन की जिम्मेदारी बढ़ गई थी। जल्दी ही हरभजन सिंह भी आउट हो गए और सचिन टीम इंडिया को जीत की ओर ले जाने की पुरजोर कोशिश करने लगे और अच्छे स्ट्रोक लगाते हुए टीम इंडिया को जीत के काफी करीब पहुंचा दिया। अब 18 गेंदों में 19 रनों की दरकार थी। इसी बीच क्लिंट मैके गेंदबाजी करने को आए।

सचिन जो 175 रनों पर खेल रहे थे उन्होंने गेंद को पैडल स्वीप करने की कोशिश की लेकिन गेंद हवा में उठ गई और नाथन हॉरिट्ज ने कैच पकड़ लिया। इसके बाद टीम इंडिया का काम तमाम हो गया। रविंद्र जडेजा ने खुद को रन आउट करा दिया, आशीष नेहरा लॉन्ग ऑन पर कैच आउट हो गए और प्रवीण कुमार अंतिम ओवर में रन आउट हो गए। भारत मैच 3 रन से हार गया।

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, वानखेड़े (भारत दो विकेट से जीता):

साल 2007 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सात मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी मैच मुंबई में खेला गया। इस सीरीज को पहले से ही ऑस्ट्रेलिया अपने नाम कर चुकी थी। मैच में ऑस्ट्रेलिया पहले बल्लेबाजी करने को उतरी। मुरली कार्तिक की घूमती हुई गेंदों के सामने पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम डांस करते हुए नजर आई और पूरी पारी 41.3 ओवरों में 193 रनों पर सिमट गई। सिर्फ रिकी पोंटिंग ही थे जिन्होंने 78 गेंदों में 57 रन बनाए। उनके अलावा अन्य कोई बल्लेबाज कुछ खास नहीं कर सका। भारत की ओर से मुरली कार्तिक ने 27 रन देकर 6 विकेट झटके वहीं आरपी सिंह ने 2, जहीर खान ने 1 और इरफान पठान ने 1 विकेट झटका।

जवाब में 194 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही। गांगुली (0), सचिन (21), दिनेश कार्तिक (0), युवराज सिंह (15), और एमएस धोनी (5) जल्दी-जल्दी आउट हो गए। इस तरह से 63 रनों पर 5 विकेट गिर गए। ऐसी विपरीत परिस्थिति में उथप्पा ने पारी संभाली और पारी को आगे बढ़ाने लगे। एक समय स्कोर 129/6 हो चला था। लग रहा था कि उथप्पा मैच जिता देंगे। तभी उथप्पा 47 रन बनाकर आउट हो गए। इसके थोड़ी देर बाद एक और विकेट गिरा और स्कोर 143 पर 8 हो गया। अब लगा कि टीम इंडिया जरूर हार जाएगी। लेकिन तभी जहीर खान और मुरली कार्तिक ने पारी को संभाला। दोनों ने नौवें विकेट के लिए 52 रनों की नाबाद साझेदारी निभाई और टीम को 46 ओवरों में 195 रन बनाते हुए 2 विकेट से करीबी जीत दिलवा दी। यह एक बेहतरीन जीत थी।

सीबी सीरीज, दूसरा फाइनल, ब्रिस्बेन (भारत 9 रन से जीता):

टीम इंडिया पहला फाइनल जीत चुकी थी और उसे सीरीज अपने नाम करने के लिए दूसरा फाइनल जीतना जरूरी था। टॉस भारत ने जीता और उसने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। रॉबिन उथप्पा और सचिन तेंदुलकर ने पहले विकेट के लिए 20.5 ओवरों में 94 रन जोड़े। उथप्पा इसी बीच 30 रन बनाकर आउट हुए। लेकिन उथप्पा के आउट होने के बाद गौतम गंभीर भी जल्दी आउट हो गए।

मिडिल ऑर्डर ने ठीक-ठाक योगदान दिया और टीम इंडिया अच्छे स्कोर की ओर अग्रसर हो गई। नाथन ब्रैकन भारतीय बल्लेबाजों के लिए काल बनते नजर आ रहे थे और लगातार परेशान कर रहे थे। जब सचिन 91 पर आउट हो गए तो टीम इंडिया ने अपनी लय खो दी। आखिरी ओवरों में माइकल क्लार्क ने लगातार झटके दिए और टीम इंडिया ने 50 ओवरों में 9 विकेट पर 258 का स्कोर बनाया।

ऐसे में जब ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाजी करने को उतरी तो टीम इंडिया को शुरुआती विकेट हासिल करने की जरूरत थी और प्रवीण कुमार ने शुरुआती सफलता दिलवाई। एडम गिलक्रिस्ट, रिकी पोंटिंग, और माइकल क्लार्क पहले पावरप्ले में आउट हो गए। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया को अच्छी पार्टनरशिप की दरकार थी। मैथ्यू हेडन खासे बढ़िया दिखाई दे रहे थे लेकिन वह अर्धशतक लगाने के बाद आउट हो गए।

बाद में एंड्रयू सायमंड्स और माइकल हसी ने रन जोड़ने शुरू किए। लेकिन भारतीय टीम ने कसी हुई गेंदबाजी की और चीजें ऑस्ट्रेलिया के लिए कठिन बना दीं। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया ने लगातार विकेट खोए और इसलिए ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदें जेम्स होप्स पर टिक गई। लेकिन होप्स सर्वोच्च स्कोर 63 बनाने के बावजूद अपनी टीम को जीत नहीं दिलवा सके। पूरी टीम 49.4 ओवरों में 249 रनों पर ऑलआउट हो गई और ऑस्ट्रेलिया 9 रनों से मैच हार गई। प्रवीण कुमार ने सर्वाधिक 4, श्रीसंत और इरफान पठान ने 2-2 और हरभजन सिंह ने एक विकेट झटका।