आउट होकर पैवेलियन लौटते विराट कोहली © Getty Images
आउट होकर पैवेलियन लौटते विराट कोहली © Getty Images

विराट कोहली…वो बल्लेबाज जिसने पिछले एक साल में अपने बल्ले से रनों की जमकर बारिश की। वो बल्लेबाज जिसने पिछली 4 सीरीज में लगातार 4 दोहरे शतक लगा दिए थे। लेकिन अब वही विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में रनों के लिए जूझ रहे हैं। 5 पारियों में विराट के बल्ले से सिर्फ 46 रन निकले हैं और उनका औसत है 9.20। सवाल ये है कि आखिर अचानक क्या हो गया कि विराट कोहली का बल्ला खामोश हो गया? आखिर क्यों विराट कंगारू गेंदबाजों के खिलाफ रन बनाने में नाकाम रहे हैं। इन सवालों का जवाब विराट के आउट होने का तरीका ही खुद बयां करता है। आइए एक नजर डालते हैं पिछली पांच पारियों में विराट ने कैसे गंवाया विकेट।  [भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, तीसरा क्रिकेट टेस्ट मैच, लाइव स्कोरकार्ड जानने के लिए क्लिक करें...]

पुणे टेस्ट: पहली पारी में विराट कोहली सिर्फ 2 गेंदों तक क्रीज पर टिके। कंगारू तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क की बाहर जाती गेंद पर विराट ने बल्ला लगाया और स्लिप में खड़े पीटर हैंड्सकॉम्ब ने कोई गलती नहीं की और विराट शून्य पर पैवेलियन लौट गए। दूसरी पारी में विराट कोहली का विकेट बाएं हाथ के स्पिनर स्टीव ओकीफ ने लिया। ओकीफ की सीधी गेंद को विराट समझ नहीं सके और सिर्फ 13 रन पर विकेट गंवा दिया।

बेंगलुरू -रांची टेस्ट: यहां भी एक बार फिर विराट दोनों पारियों में नाकाम रहे। पहली पारी में विराट ने लायन को विकेट दिया और दूसरी पारी में उन्हें हेजलवुड ने LBW आउट किया।रांची टेस्ट की पहली पारी में एक बार फिर विराट का बल्ला नहीं चला। पैट कमिंस की गेंद पर विराट एक बार फिर स्लिप में आउट हुए। पांचों पारियों में विराट को भले ही अलग अलग गेंदबाजों ने आउट किया लेकिन गौर किया जाए तो विराट ने हर बाल एक ही गलती की। विराट पांचों पारियों में गेंद की लाइन पढ़ने में नाकाम रहे। विराट 2 बार स्लिप पर आउट हुए, दो बार LBW और एक बार उन्होंने अपना विकेट बोल्ड होकर गंवाया।

विराट के खिलाफ गेंदबाजों की रणनीति कंगारू गेंदबाजों ने विराट के खिलाफ लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद रखी, उन्होंने विराट को एक भी कमजोर गेंद नहीं दी । स्मिथ के गेंदबाजों ने वैसी ही रणनीति अपनाई जैसी साल 2014 में जेम्स एंडरसन ने विराट के खिलाफ अपनाई थी। नतीजा ये हुआ कि विराट ने दबाव में आकर तेज ड्राइव खेलने की कोशिश की और अपना विकेट गंवाया । विराट सिर्फ गेंदबाजों की लाइन ही नहीं बल्कि पिच को पढ़ने में भी नाकाम रहे। विराट ने सीरीज में दो बार सीधी गेंदों पर LBW होकर अपना विकेट दिया। बेंगलुरू टेस्ट में नाथन लायन की सीधी गेंद को उन्होंने छोड़ दिया और दूसरी पारी में हेजलवुड की सीधी फुल लेंग्थ गेंद पर भी वो चकमा खा गए। पुणे टेस्ट की दूसरी पारी में भी विराट ओकीफ की जिस गेंद पर बोल्ड हुए वो एकदम सीधी गेंद थी। विराट ने पिच से गेंद के टर्न होने का अंदाजा लगाया था लेकिन वो बिलकुल गलत साबित हुए ।साफ है विराट कोहली को जल्द से जल्द इन गलतियों को सुधारना होगा क्योंकि लगातार खराब प्रदर्शन विराट की सकारात्मक मानसिकता पर असर डाल सकता है जो कि उनकी ताकत है। पूरी टीम इंडिया विराट कोहली के इर्द-गिर्द खेलती है। विराट इस टीम के कप्तान नहीं बल्कि लीडर हैं और टीम को अगर जीत हासिल करनी है तो लीडर को आगे आकर अच्छा प्रदर्शन करना ही होगा।