सनराइजर्स हैदराबाद © AFP
सनराइजर्स हैदराबाद © AFP

आईपीएल-10 में सनराइजर्स हैदराबाद का सफर खत्म हो गया है। एलिमिनेटर मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स के हाथों 7 विकेट से हार झेलने के बाद पिछली बार की चैंपियन को आईपीएल से बाहर होना पड़ा। इस सीजन में हैदराबाद ने कुल 15 मैच खेले हैं, इस दौरान टीम को 8 में जीत और 6 में हार का सामना करना पड़ा और 1 मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था। खास बात ये है कि टीम के कप्तान डेविड वॉर्नर ऑरेंज कैप की रेस में सबसे आगे हैं और गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार पर्पल कैप की रेस में सबसे आगे हैं। इसके बावजूद हैदराबाद का सफर इस आईपीएल में खत्म हो गया। क्या रही वजह टीम के आईपीएल-10 से बाहर होने की, आइए जानते हैं।

4 खिलाड़ियों के इर्द-गिर्द नजर आई पूरी टीम: इस सीजन पर हैदराबाद के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो टीम कुछ खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रही है। ये खिलाड़ी रहे कप्तान डेविड वॉर्नर, शिखर धवन, भुवनेश्वर कुमार और राशिद खान। इन चार खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ही टीम की हार-जीत निर्भर रही। जब इन खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन किया तो टीम ने आसानी से मुकाबले को जीत लिया। लेकिन जिन मैचों में इनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, तो टीम को उसका खामियाजा हार के रूप में भुगतना पड़ा। अकेले धवन और वॉर्नर के स्कोर को अगर मिला दिया जाए उनका कुल योग पूरी टीम के खिलाड़ियों से कुछ ही कम नजर आता है। वॉर्नर ने इस सीजन में 14 मैचों में 641 रन बनाए, तो वहीं धवन ने इतने ही मैचों में 479 रन बनाए। दोनों के स्कोर को अगर जोड़ दें (641+479=1,120) रन होते हैं। इस दौरान अगर पूरी टीम के खिलाड़ियों के स्कोर को जोड़ दें तो वो (1,142) है। साफ है धवन और वॉर्नर ने मिलकर अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन जोड़े हैं।

गेंदबाजी में भी लगभग ऐसा ही हाल नजर आया। टीम भुवनेश्वर कुमार और राशिद खान पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नजर आई। भुवनेश्वर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 14 मैचों में कुल 26 विकेट झटके तो वहीं राशिद ने इतने ही मुकाबलों में 17 विकेट अपने नाम किए। इन दोनों के विकेटों की संख्या को जोड़ा जाए (26+17=43) होती है। वहीं पूरी टीम के गेंदबाजों के विकेटों की कुल संख्या (45) ही पहुंचती है। साफ है बल्लेबाजी में जैसे टीम वॉर्नर-धवन पर निर्भर रही, तो वहीं गेंदबाजी में भुवनेश्वर-राशिद पर ही पूरी टीम टिकी थी।

बड़े नामों का फीका रहना: किसी भी टीम के लिए उनके बड़े खिलाड़ियों का चलना बेहद जरूरी होता है, लेकिन हैदराबाद के लिए उनके बड़े खिलाड़ी अपनी जिम्मेदारी बखूबी नहीं निभा सके जिसका खामियाजा टीम को आईपीएल से बाहर होकर उठाना पड़ा। बड़े खिलाड़ियों में युवराज सिंह, आशीष नेहरा, दीपक हुड्डा और नमन ओझा का प्रदर्शन खराब रहा। पहले मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करने वाले युवराज ने पूरे टूर्नामेंट में 12 मैचों में 28 के औसत के साथ 252 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से सिर्फ 2 अर्धशतक ही निकले। जरूरत के समय युवराज ने अपने विकेट की कीमत नहीं पहचानी और आउट होकर चले गए। इसके अलावा टीम के दूसरे बड़े खिलाड़ी आशीष नेहरा ने भी टीम को काफी निराश किया। नेहरा पूरे सीजन संघर्ष करते नजर आए और उन्होंने जमकर रन लुटाए। नेहरा ने इस सीजन में 6 मैचों में सिर्फ 8 विकेट ही झटके और उनका इकॉनमी 9.30 का रहा। टीम को नमन ओझा से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन ओझा ने 14 मैचों में सिर्फ 79 रन ही बनाए। ओझा के अलावा दीपक हुड्डा ने भी अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया और उन्होंने 10 मैचों में सिर्फ 78 रन ही बनाए और इस दौरान उन्होंने 2 विकेट लिए।

आईपीएल के पिछले सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद के चैंपियन बनने की सबसे बड़ी वजह पूरी टीम का एकजुट होकर खेलना था लेकिन इस बार इक्का-दुक्का खिलाड़ियों ने ही पूरे सीजन में अच्छा प्रदर्शन किया। यही वजह है कि सनराइजर्स हैदराबाद का सफल एलिमिनेटर मुकाबले में खत्म हो गया।