IPL: Top 6 Thrilling matches in 10 years history
मुंबई और पुणे के बीच खेला गया 2017 का फाइनल बेहद रोमांचक रहा था © AFP

जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां बढ़ती जा रहीं हैं, वैसे-वैसे दर्शकों की दिलों की धड़कनें भी बढ़ती जा रहीं हैं। क्योंकि 7 अप्रैल से दुनिया की सबसे लोकप्रिय टी20 लीग का आगाज होने जा रहा है। इस बार आईपीएल का ये 11वां सीजन होगा। दस साल पूरे कर चुकी इस लीग ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया है। इस बार भी दर्शकों को सांस रोक देने वाले कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। आज हम आपको बताएंगे आईपीएल इतिहास में खेले गए ऐसे मुकाबलों के बारे में जिनके नतीजे आखिरी ओवर में जाकर निकले और जिन मैचों ने दर्शकों की सांसें रोक दी थीं। तो आइए जानते वो कौन से मुकाबले थे जिन्होंने दर्शकों की सांसें रोक दी थीं।

साल 2016, राइजिंग पुणे सुपरजाइंट बनाम किंग्स इलेवन पंजाब: साल 2016 में किंग्स इलेवन पंजाब और राइजिंग सुपरजाइंट के बीच सबसे रोमांचक मुकाबला खेला गया। इस मुकाबले ने रोमांच की सारी हदें पार कर दीं थीं। राइजिंग सुपरजाइंट को पंजाब के खिलाफ आखिरी ओवर में जीत के लिए 23 रनों की दरकार थी। क्रीज में मौजूद थे महेंद्र सिंह धोनी और गेंदबाज थे अक्षर पटेल। पटेल की पहली गेंद पर धोनी एक भी रन नहीं ले सके और अब मामला 5 गेंदों में 23 रन का हो गया था। 

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इसके बाद पटेल ने अगली गेंद वाइड फेंकी। दूसरी गेंद पर धोनी ने दमदार शॉट लगाया और गेंद को छह रनों के लिए भेज दिया। वहीं तीसरी गेंद पर फिर से कोई रन नहीं बना। अगली 3 गेंदों में अब जीत के लिए 16 रनों की जरूरत थी। धोनी ने चौथी गेंद पर चौका मारकर अपनी टीम की जीत की उम्मीदों को जिंदा रखा। पांचवीं गेंद पर धोनी ने फिर से करारा प्रहार किया और गेंद को छह रनों के लिए भेज दिया। आखिरी गेंद पर अब धोनी को जीत दिलाने के लिए 6 रन चाहिए थे। हर क्रिकेट प्रेमी की सांसें रुकी हुईं थीं। धोनी ने अंतिम गेंद पर शानदार शॉट खेला और अपनी टीम को अप्रत्याशित जीत दिला दी।

साल 2015, चेन्नई सुपरकिंग्स बनाम दिल्ली डेयरडेविल्स: साल 2015 में खेले गए चेन्नई सुपरकिंग्स और दिल्ली डेयरडेविल्स के मुकाबले को कौन भूल सकता है। इस मुकाबले ने हर शख्स की धड़कनें थाम दीं थीं। दरअसल, आखिरी ओवर में दिल्ली को जीत के लिए 19 रन चाहिए थे। गेंदबाज थे डैरेन ब्रावो और स्ट्राइक पर थे एलबी मॉर्केल। ब्रावो की पहली गेंद पर मॉर्कल ने चौका जड़कर जीत के फासले को 15 रन पर ला दिया। दूसरी गेंद पर मॉर्कल ने एक रन ले लिया और अब स्ट्राइक पर आ गए इमरान ताहिर।

तीसरी गेंद पर ब्रावो ने ताहिर को आउट कर दिया। लेकिन इस विकेट के चक्कर में मॉर्केल एक बार फिर से स्ट्राइक में आ गए थे। चौथी गेंद पर मॉर्केल ने जबरदस्त शॉट खेला और गेंद छह रनों के लिए चली गई। अब दिल्ली को जीत के लिए 2 गेंदों पर सात रनों की जरूरत थी। पांचवीं गेंद पर मॉर्कल ने बेहतरीन शॉट खेला, लेकिन रैना ने डाइव लगाकर गेंद को रोक लिया। इस बीच मॉर्केल ने 2 और रन चुरा लिए। अब मैच की आखिरी गेंद पर दिल्ली को 5 रन मतलब छक्के की जरूरत थी आखिरी गेंद से पहले धोनी और नेहरा के बीच लंबी बातचीत चली। अंतिम गेंद पर मॉर्केल ने फिर से शानदार शॉट खेला लेकिन मॉर्केल को सिर्फ चौका ही मिल सका। और इस तरह सांस रोक देने वाले इस मैच को चेन्नई ने सिर्फ 1 रन से अपने नाम कर लिया था।

साल 2012, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर बनाम पुणे वॉरियर्स: साल 2012 में खेले गए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और पुणे वॉरियर्स के मुकाबले ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया था। मुकाबला अंतिम ओवर की अंतिम गेंद तक गया, जिसे बैंगलोर ने अपने नाम कर लिया था। बैंगलोर को आखिरी ओवर में 21 रनों की जरूरत थी। मैच पुणे के पक्ष में दिख रहा था। आखिरी ओवर फेंकने आए थे आशीष नेहरा, जबकि बल्लेबाज थे सौरभ तिवारी। तिवारी ने पहली गेंद पर एक रन लिया और स्ट्राइक सबसे खतरनाक बल्लेबाज एबी डिविलियर्स को दी। डिविलियर्स ने दूसरी ही गेंद पर चौका जड़ दिया।

नेहरा ने तीसरी गेंद यॉर्कर फेंकने की कोशिश की, लेकिन डिविलियर्स ने इस गेंद पर और जोरदार शॉट खेला और गेंद 6 रनों के लिए बाउंड्री के बाहर चली गई। अब बैंगलोर की जीत की उम्मीदें बढ़ गईं थीं। लेकिन मंजिल अभी भी दूर थी। चौथी गेंद पर फिर से डिविलियर्स ने नेहरा को सबक सिखाया और फिर से झन्नाटेदार शॉट खेलकर ओवर में दूसरा छक्का जड़ दिया। अगली दो गेंदों में अब सिर्फ चार रन चाहिए थे। लेकिन पांचवीं गेंद पर बैंगलोर को सिर्फ एक रन ही मिल सका। इस तरह आखिरी गेंद पर 3 रनों की जरूरत थी और स्ट्राइक पर थे सौरभ तिवारी। डिविलियर्स के स्ट्राइक पर ना होने से नेहरा को थोड़ी राहत जरूर मिली थी।

अब नेहरा अपनी आखिरी गेंद फेंकने के लिए तैयार थे। नेहरा ने जैसे ही आखिरी गेंद फेंकी वैसे ही तिवारी ने गेंद पर आक्रामक शॉट खेल दिया जो की सीधा बाउंड्री के बाहर जाकर ही गिरा। ये ओवर का तीसरी छक्का था। और तिवारी ने धोनी स्टाइल में मुकाबले को जीतकर अपनी टीम को जश्न मनाने का मौका दे दिया था।

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साल 2011, मुंबई इंडियंस बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स: साल 2011 में कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेले गए मुकाबले में आखिरी ओवर तक किसी भी टीम की जीत की भविष्यवाणी करना काफी मुश्किल था। हालांकि ओवर की शुरुआत से पहले कोलकाता जीत की मजबूत दावेदार दिख रही थी। लेकिन अंत में मुंबई चैंपियन बनकर उभरी थी। आखिरी ओवर में जीत के लिए मुंबई को 21 रन बनाने थे। स्ट्राइक पर थे जेम्स फ्रैंकलिन। बालाजी की पहली गेंद पर फ्रैंकलिन ने चार रन ठोक दिए। दूसरी गेंद पर फिर से फ्रैंकलिन ने बेहतरीन शॉट खेला और गेंद फिर से चार रनों के लिए चली गई। 

इसके बाद अगली दो गेंदों पर फिर से फ्रैंकलिन ने दो चौके जड़ दिए। मतलब पहली चार गेंदों पर फ्रैंकलिन ने लगातार चार चौके ठोक दिए थे। अब मुंबई को आखिरी दो गेंदों में 5 रनों की जरूरत थी। पांचवीं गेंद पर फ्रैंकलिन को सिर्फ एक रन ही मिल सका। इस तरह मैच अब आखिरी गेंद पर पहुंच गया था। आखिरी गेंद में मुंबई को 3 रन चाहिए थे और क्रीज पर थे रायडू। बालाजी की आखिरी गेंद पर रायडू ने झन्नाटेदार शॉट खेला और गेंद छह रनों के लिए चली गई। इस छक्के के साथ ही मुंबई ने कोलकाता को रोमांचक मुकाबले में हरा दिया था।

साल 2012, दिल्ली डेयरडेविल्स बनाम राजस्थान रॉयल्स: साल 2012 में दिल्ली और राजस्थान के बीच खेले गए मुकाबले ने सभी की धड़कनें रोक दीं थीं। राजस्थान को अंतिम ओवर में जीत के लिए 12 रनों की जरूरत थी। गेंदबाजी का दारोमादार था उमेश यादव पर और बल्लेबाजी कर रहे थे अजिंक्य रहाणे। उमेश की पहली गेंद पर रहाणे कोई रन नहीं बना सके और पहली गेंद डॉट चली गई। दूसरी गेंद पर फिर से उमेश ने बल्लेबाज को गच्चा दे दिया और इस गेंद पर सिर्फ 1 रन ही बन सका।

अब स्ट्राइक पर थे साहा। तीसरी गेंद पर फिर से उमेश ने सिर्फ एक रन ही दिया। अब अंतिम 3 गेंदों पर राजस्थान को जीतने के लिए 10 रन चाहिए थे। चौथी गेंद पर रहाणे ने जोरदार शॉट खेला और गेंद छह रनों के लिए चली गई। ये ओवर का पहला छक्का था। पांचवीं गेंद पर फिर से रहाणे ने अच्छा शॉट खेला और दौड़कर 2 रन चुरा लिए। अब आखिरी गेंद पर राजस्थान को जीत के लिए 2 रन चाहिए थे। मैच राजस्थान के पक्ष में दिख रहा था। उमेश यादव ने आखिरी गेंद फेंकी लेकिन गेंद रहाणे के बल्ले पर छुई भी नहीं, लेकिन दोनों बल्लेबाज रन लेने के लिए दौड़ निकले। लेकिन इसी दौरान फील्डर ने फुर्ती दिखाते हुए साहा को रन आउट कर दिया और दिल्ली ने मुकाबले को 1 रन से अपने नाम कर लिया।

साल 2017, मुंबई इंडियंस बनाम राइजिंग पुणे सुपरजायंट, फाइनल: पिछले आईपीएल सीजन में राइजिंग पुणे सुपरजायंट ही एक ऐसी टीम थी जो पूरे टूर्नामेंट में मुंबई को हराती आई थी और जब ये दो टीमें फाइनल में पहुंची तो रोमांच कई गुना बढ़ गया, वहीं मुकाबला उतना ही कड़ा हो गया। हैदराबाज के राजीव गांधी स्टेडियम में खेले गए इस मैच में टॉस जीतकर मुंबई के कप्तान रोहित शर्मा ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। पारी की शुरुआत करने उतरे पार्थिव पटेल और लैंडल सिमंस दोनो ही सस्ते में लौट गए। पुणे के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट ने शुरुआती स्पेल में दोनों खतरनाक बल्लेबाजों को आउट कर अपनी टीम को बड़ी सफलताएं दिलाई। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए अंबाती रायडू भी दबाव में आकर गलती कर बैठे और कप्तान स्टीवन स्मिथ ने उन्हें रन आउट कर पवेलियन वापस भेजा। वहीं कप्तान रोहित शर्मा भी 24 रन बनाकर एडम जम्पा की गेंद पर कैच आउट हो गए। यहां के ऑलराउंडर क्रुनाल पांड्या ने पारी को संभाला। क्रुनाल ने पहले भाई हार्दिक और फिर मिचेल जॉनसन के साथ छोटी छोटी साझेदारियां बनाई और मुंबई इंडियंस को 129 के स्कोर तक पहुंचाया। फाइनल मैच के लिए ये एक अच्छा स्कोर नहीं था लेकिन मुंबई टीम के सामने इसे बचाने की चुनौती थी, वो भी अजिंक्य रहाणे, स्टीवन स्मिथ और महेंद्र सिंह धोनी जैसे बल्लेबाजों के खिलाफ।

पुणे की पारी की शुरुआत राहुल त्रिपाठी और रहाणे ने की। त्रिपाठी अब तक टूर्नामेंट में अच्छी बल्लेबाजी करते आए थे लेकिन आज उनका दिन नहीं था। यॉर्कर स्पेशलिस्ट जसप्रीत बुमराह ने तीसरे ओवर में एलबीडबल्यू आउट किया। हालांकि रहाणे और स्मिथ ने मिलकर पारी को संभाला। दोनों के बीच 54 रनों की साझेदारी बनी, इस बीच स्मिथ ने अपना अर्धशतक पूरा किया। हालांकि इस दौरान टीम का रन रेट काफी नीचे चला गया। रहाणे 12वें ओवर में मिचेल जॉनसन की गेंद पर आउट होकर अर्धशतक से चूक गए। रहाणे के आउट होने के बाद से ही टीम की परेशानियां शुरू हुई। महेंद्र सिंह धोनी (10) भी सस्ते में आउट हो गए।

आखिरी ओवर में पुणे को जीत के लिए 11 रनों की जरूरत थी, यहां से पुणे की जीत आसान लग रही थी। रोहित ने अनुभवी जॉनसन को गेंद थमाई। ओवर की पहली गेंद पर चौका लगाने के बाद मनोज तिवारी अगली ही गेंद पर आउट हो गए। एक बार फिर मैच 50-50 का हो गया लेकिन स्मिथ अब भी क्रीज पर थे। तीसरी गेंद पर स्मिथ ने कवर की तरफ शानदार शॉट लगाया लेकिन गैप नहीं ढूंढ पाए और रायडु ने आसान सा कैच पकड़ा। अब पुणे टीम मुश्किल में आ गई थी। जीत के लिए अब दो गेंदो में 6 रनों की जरूरत थी, काम मुश्किल जरूर था लेकिन नामुमकिन नहीं। मुंबई के फैंस ने प्रार्थना करना शुरू कर दिया था।

चौथी गेंद के लिए स्ट्राइक पर युवा वाशिंगटन सुंदर थे, उनका काम केवल सिंगल लेकर डैन क्रिस्चियन को स्ट्राइक पर लगाना था। सुंदर ने ऐसा ही किया। पांचवीं गेंद पर क्रिस्चियन ने बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की लेकिन दो ही रन मिले। अब आखिरी गेंद पर चार रनों की जरूरत थी। इस बार भी डैन की कोशिश बड़ा शॉट लगाने की थी लेकिन जॉनसन ने बिल्कुल गति नहीं दी। क्रिस्चियन रन लेने के लिए दौड़ पड़े, बल्लेबाजों ने दो रन पूरे कर लिए थे, अगर तीसरा रन ले लिया जाता तो मैच सुपर ओवर की तरफ चला जाता लेकिन फील्डिर सुचित में गेंद झट से विकेटकीपर पार्थिव की तरफ फेंकी और पार्थिव ने क्रिस्चियन को रन आउट कर फाइनल मैच खत्म किया। इस जीत के साथ मुंबई इंडियंस तीन बार आईपीएल खिताब जीतने वाले अकेली टीम बन गई।