महेंद्र सिंह धोनी वनडे और टी20 में भारत की कप्तानी करते हैं। © Getty Images
महेंद्र सिंह धोनी वनडे और टी20 में भारत की कप्तानी करते हैं। © Getty Images

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में आज का दिन काफी खास है। आज के दिन साल 2014 में भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अचानक टेस्ट से संन्यास ले लिया था। धोनी का यह फैसला इतना आश्चर्यजनक था कि किसी को भी इस पर विश्वास नहीं हुआ जब तक लोगों ने धोनी को मेलबर्न के मैदान पर आखिरी बार भारत की सफेद जर्सी में खेलते नहीं देखा।  धोनी का ये फैसला सही था या गलत इस पर चर्चा की जा सकती है लेकिन फैंस के लिए यह दुखद पल था जब धोनी ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा। धोनी ने अपना पहला टेस्ट भी दिसंबर में ही खेला था और आखिरी भी। धोनी पहली बार 2 दिसंबर 2005 में विशाखापत्तनम में मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ खेला था। ये भी पढ़ें: साल 2016 में भारतीय गेंदबाजी के पांच सबसे यादगार पल

धोनी ने अपने पहले टेस्ट की पहली पारी में 30 रन बनाए थे। हालांकि यह मैच गीली पिच के कारण ड्रॉ रहा था लेकिन इसके बाद धोनी ने कई टेस्ट खेले और कई बार अच्छी बल्लेबाजी भी की। धोनी के नाम टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक भी है जो कि अब तक भारतीय कप्तान द्वारा टेस्ट में बनाया अधिकतम स्कोर था। धोनी का यह रिकॉर्ड टेस्ट में उनके उत्तराधिकारी विराट कोहली ने हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई टेस्ट में तोड़ दिया। 90 टेस्ट मैच में 4876 रन बनाने के बाद भी कई दिग्गजों का यह मानना था कि धोनी टेस्ट खिलाड़ी नहीं है। हो सकता है कि ये सच हैं लेकिन जिस तरह उन्होंने ये समझते हुए कि अब टेस्ट में उनकी जगह नहीं है अपने संन्यास की घोषणा कर दी शायद ही किसी और खिलाड़ी के लिए ऐसा करना आसान होता। ये भी पढ़ें: आज के दिन महेंद्र सिंह धोनी ने खेला था अपना पहला टेस्ट मैच

धोनी ने अपना आखिरी टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर खेला। भारत चार मैचों की इस सीरीज में 2-0 से पिछड़ चुका था। भारत के पास मैच जीतने का मौका तो नहीं था लेकिन आखिरी दो टेस्ट जीतकर टीम इंडिया सीरीज ड्रॉ करा सकती थी। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर इस सीरीज का तीसरा मैच खेला जाना था और इसी बीच धोनी ने सबको चौंकाते हुए टेस्ट से संन्यास की घोषणा कर दी। इस ऐलान के बाद टीम के खिलाड़ियों के साथ धोनी के फैंस को भी काफी धक्का लगा। कोहली ने भी इस बारें में बात करते हुए कहा था कि उनके इस फैसले को सुनकर सभी आश्चर्यचकित रह गए थे लेकिन ये उनका फैसला था और हमने इसका सम्मान किया।

30 दिसंबर 2014 को जब धोनी आखिरी बार टेस्ट की जर्सी में में मैदान पर उतरे तो उन्हें सचिन के संन्यास जैसा भावनात्मक माहौल नहीं मिला और ना ही मैदान में धोनी-धोनी की आवाज सुनाई दी, आप ये कह सकते है कि वह सचिन जैसे महान खिलाड़ी नहीं लेकिन महानता का पैमाना तय कौन करेगा। धोनी मैदान पर आए तब भारत के पांच विकेट गिर चुके थे और भारत के सामने 384 रनों का लक्ष्य था। अजिंक्य रहाणे के 48 रन पर आउट होने के बाद धोनी ने रविचंद्रन अश्विन के साथ मिलकर दिन का खेल खत्म होने तक बल्लेबाजी की। धोनी ने अपनी आखिरी पारी में 24 रन बनाए और भारत के लिए मैच ड्रॉ कराया। इसके साथ ही भारत बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी हार गया लेकिन इससे भी बड़ी बात ये थी कि धोनी ने हमेशा कि लिए टेस्ट क्रिकेट से खुद को अलग कर लिया था। ये भी पढ़ें:साल 2016 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने हासिल की बड़ी उपलब्धियां

धोनी के संन्यास लेने का फैसला भी भारतीय टीम के हक में ही था। धोनी ने अपनी कप्तानी में भारत को टेस्ट में नंबर वन बनाया था और कई मुश्किल मैच भी जिताए थे। धोनी ने कई ऐसे फैसले लिए थे जिनके कारण आज भारतीय टेस्ट टीम को कई फायदे हुए। इनमे से एक है केएल राहुल को टीम में जगह देना। केएल राहुल ने धोनी के आखिरी टेस्ट मैच से अपना डेब्यू किया था। मैच से पहले राहुल को टीम में जगह देने के लिए धोनी पर कई सवाल उठाए गए थे लेकिन आज राहुल टेस्ट टीम का एक अहम हिस्सा हैं। ये भी पढ़ें:क्यों जयंत यादव बन सकते हैं भारत के अगले मैचविनर ऑलराउंडर

मैच के बाद मीडिया के बात करते समय भी धोनी ने एक बात कही थी कि ये नई पीढ़ी की टीम है जो आगे चलकर बढ़िया नतीजे देगी। धोनी की ये भविष्यवाणी वाकई में सच साबित हुई है क्योंकि इस समय भारतीय टीम विश्व की सर्वश्रेष्ठ टेस्ट टीम है। धोनी के टेस्ट से संन्यास लेने के बाद से ही उनके वनडे से संन्यास की भी चर्चा होने लगी है। लोगों का मानना है कि धोनी को अब छोटे फॉर्मेट से भी संन्यास लेना चाहिए पर इस बात का फैसला लेने का हक केवल धोनी को है और वह जानते हैं कि सही समय कब आएगा। अगर हम इस सवाल का जवाब धोनी स्टाइल में दें तो आप बताइए क्या धोनी फिट नहीं हैं? या वह वनडे और टी20 के अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं? इस बारें में सोचेंगे तो आपको आपका जवाब खुद ही मिल जाएगा।