Sourav Ganguly: Controversies involving one of India’s greatest captains
Sourav Ganguly, Greg Chappell © AFP

भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में एक सौरव गांगुली आज अपना 46वां जन्मदिन बना रहे हैं। गांगुली को भारतीय क्रिकेट में ऐसे कप्तान के रूप में जाना जाता है, जिसने टीम इंडिया को एक नई दिशा दी। गांगुली के कप्तान बनने के बाद टीम इंडिया के खेल में ज्यादा आक्रामकता आई थी। गांगुली की शख्सियत एक आक्रामक और प्रभावी कप्तान की थी लेकिन इस वजह से उनके पूरे करियर के दौरान विवाद उनसे हमेशा जुड़े रहे।

ड्रिंक्स ले जाने से मना किया?

साल 1991-92 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गांगुली ने टीम इंडिया के लिए अपना वनडे डेब्यू किया था। इस दौरान खबरें आई थी कि गांगुली ने 12वें खिलाड़ी के तौर पर ड्रिंक्स लेकर आने से मना कर दिया था। हालांकि गांगुली ने इस अफवाह को खारिज किया था। रेडिफ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि, “मुझे नहीं पता कि ये कहानी कैसे बनी। 1992 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हमारे साथ एक मैनेजर थे, रनबीर सिंह। वो शायद सबसे बुरा शख्स है जिसे मैंने कभी अपनी पूरी जिंदगी में देखा है। ये शर्म की बात है कि लंबे दौरे पर भारत हमारे पास उनके जैसे प्रबंधक थे। वो शर्म की बात थी, भारतीय क्रिकेट के लिए शर्म की बात थी।”

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लंकाशायर के साथ विवाद

कई भारतीय क्रिकेटरों की तरह गांगुली ने काउंटी क्रिकेट में कुछ समय बिताया था। साल 2000 में गांगुली ने लंकाशायर के लिए क्रिकेट खेला था। इस दौरान उनके कुछ साथी खिलाड़ियों ने उन पर राजकुमारों जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया था। गांगुली के काउंटी करियर से जुड़ी एक कहानी एक ये भी है कि उन्होंने अपने साथी खिलाड़ी माइकल एथरटन को अपना स्वेटर बाउंड्री से बाहर ले जाने के लिए कहा था। साथ ही जब एक मैच में गांगुली ने अर्धशतक लगाया था तो उनके साथी खिलाड़ियों ने उनका अभिवादन नहीं किया था। एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने अपनी किताब में भी इसका जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था कि, “वो दूसरे खिलाड़ियों से बातचीत में दिलचस्प ही नहीं था। हालात ऐसे हो गए थे कि टीम में 10 खिलाड़ी थे और गांगुली था। वो ऐसे टीम में आया जैसे वो कहीं का राजा हो, ये प्रिंस चार्ल्स के टीम में होने जैसा था।”

स्टीव वॉ को टॉस के लिए इंतजार करवाया

साल 2001 की भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज काफी रोमांचक रही थी। कप्तान गांगुली ने मैदान बाहर भी विपक्षी टीम पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की थी। सीरीज के दौरान वो हर मैच के टॉस के लिए देर से आते थे, जिससे विपक्षी कप्तान स्टीव वॉ काफी नाराज होते थे। वॉ ने 2013 को पीटीआई को दिए एक बयान में इसका जिक्र किया था। उन्होंने कहा, “अगर वो हर मैच में टॉस के लिए देर से आ रहा था तो ये उनकी मर्जी थी। मैच रेफरी ने मुझसे कहा था कि उनसे समय से आना चाहिए। हालांकि गांगुली ने कहा कि वो केवल एक मैच के दौरान देरी से आए थे, जब उन्हें अपना ब्लेजर नहीं मिल रहा था। अब किसका पक्ष सच है ये तो हमे नहीं पता लेकिन ये किस्सा क्रिकेट इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।

माइक डेनिस विवाद

साल 2001 में भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर पोर्ट एलिजाबेथ में खेले गए दूसरे टेस्ट के दौरान मैच रेफरी माइक डेनिस भारतीय खिलाड़ियों के साथ काफी सख्ती से पेश आए। सचिन तेंदुलकर पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगा था और कप्तान गांगुली पर अपने खिलाड़ियों को ना संभालने के लिए सस्पेंड किया गया था। वीरेंदर सहवाग, दीप दासगुप्ता, हरभजन सिंह और शिब सुंदर दास को भी बार बार अपील करने के लिए सस्पेंड किया गया था। हालांकि केवल सहवाग पर बैन लगाया गया था।

अंपायर के फैसले का विरोध

गांगुली के आक्रामक रवैये के चलते वो कई बार मैदान पर अंपायर से भिड़े हैं और इसके चलते उन्हें सस्पेंशन भी झेलना पड़ा है। साल 1998 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बैंगलोर टेस्ट के दौरान आउट दिए जाने के बाद गांगुली ने अंपायर का फैसला मानने से इंकार कर दिया था। इसके बाद 2000 में जिम्बाब्वे के भारत दौरे पर गांगुली को अंपायर से भिड़ने की कोशिश करने की वजह से बैन लगा था। ठीक एक साल बाद श्रीलंका दौरे पर गांगुली एक बार फिर आउट दिए जाने के बाद अंपायर से भिड़ गए। उन पर एक वनडे मैच का बैन लगाया गया था। 2005 में धीमी ओवर रेट के चलते उन पर 6 मैचों का बैन लगा था।

लॉर्ड्स की बॉलकनी पर टी-शर्ट घुमाना

गांगुली के करियर का सबसे मशहूर विवाद यही होगा, हालांकि इसे विवाद कहना सही नहीं होगा, लेकिन गांगुली से पहले शायद ही किसी क्रिकटेर ने लॉर्ड्स की बॉलकनी पर खड़े होकर अपनी टी-शर्ट निकालकर हवा में घुमाई होगी। टीम इंडिया ने युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ की शानदार साझेदारी की मदद से नेटवेस्ट फाइनल जीता था और गांगुली ने अपने अंदाज में जीत का जश्न मनाया। अगर राहुल द्रविड़ हरभजन सिंह को नहीं रोकते तो शायद उस दिन पूरी भारतीय टीम गांगुली की तरह नजर आती। टीम इंडिया के पूर्व कोच ने इंडियन समर्स में लिखा था कि हरभजन ने पूरी टीम के साथ में टी-शर्ट उतारने का प्लान बनाया था लेकिन द्रविड़ ने उन्हें रोक दिया।

नागपुर टेस्ट

साल 2004 का नागपुर टेस्ट गांगुली के करियर के करियर का ऐसा सबसे विवादित मैच था, जिसमें उन्होंने हिस्सा भी नहीं लिया था। टेस्ट मैच के दिन सुबह अचानक ये ऐलान किया गया कि गांगुली चोट की वजह से ये मैच नहीं खेलेंगे। वहीं हरभजन सिंह ने भी बीमारी की वजह से मैच में हिस्सा नहीं लिया था। गांगुली के मैच से बाहर होने के बाद अफवाह फैलने लगी थी कि नागपुर की घास वाली पिच की वजह से उन्होंने मैच ना खेलने का फैसला किया था। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर एडम गिलक्रिस्ट ने ट्रू कलर्स किताब में लिखा था कि, “जब मैं मैदान पर आया तो गांगुली वहां नहीं था और राहुल ब्लेजर में टॉस के लिए खड़ा था। मैने कहा ‘सौरव कहां है’ राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया। मैने अंदाजा लगाया कि घरेलू सीरीज हारने के डर से गांगुली ने अपने आप को बाहर कर लिया था।”

ग्रैग चैपल

सौरव गांगुली-ग्रैग चैपल भारतीय टीम के सबसे बड़े विवाद के अहम कारण हैं। साल 2005 में जॉन राइट की जगह टीम इंडिया के कोच बने चैपल ने उस समय खराब फॉर्म से गुजर रहे गांगुली से साफ कहा था कि कप्तानी का दबाव उनकी बल्लेबाजी को प्रभावित कर रहा है। गांगुली ने मीडिया के सामने कहा था कि उन्हें कप्तान पद से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था। विवाद तब और बढ़ गया जब चैपल ने बोर्ड को अपने और गांगुली के बीच के मतभेद को लेकर चिट्ठी लिखी। जिम्बाब्वे दौरे के बाद गांगुली को वनडे टीम में बाहर कर दिया गया। गांगुली के टीम से बाहर होने से कोलकाता में फैंस इतने ज्यादा गुस्सा हुए कि उन्होंने वनडे मैच के दौरान दक्षिण अफ्रीका टीम का समर्थन किया।

शेन वार्न के साथ विवाद

अंतर्राष्ट्रीय करियर खत्म होने के बाद भी गांगुली की जिंदगी से विवाद खत्म नहीं हुए। साल 2008 में पहले इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान राजस्थान रॉयल्स के कप्तान शेन वार्न ने मीडिया के सामने ये कहा था कि उनकी टीम को मैदान पर काफी देर इंतजार करना पड़ा था क्योंकि गांगुली ने सलामी बल्लेबाजी करने के लिए क्रीज पर आने में काफी वक्त लिया। उन्होंने ये भी कहा कि उनके बल्लेबाजों को भी दूसरी टीम के लिए इंतजार करना पड़ा था।

राहुल द्रविड़ पर बयान

साल 2011 में भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज से ठीक पहले गांगुली ने हेडलाइनंस टुडे को बयान दिया था कि द्रविड़ के पास तत्कालीन कोच चैपल से बात करने की हिम्मत नहीं थी। साल 2014 में गांगुली ने इसे दोहराते हुए कहा था कि, “जब मैं टीम में वापस आया, तो मैंने द्रविड़ से बहुत बाद में बात की थी और उसे बताया कि ये चीजें चल रही हैं। उन्होंने कहा कि वो ये सब जानते थे लेकिन ग्रेग को नियंत्रित नहीं कर सके।”

रवि शास्त्री

बीसीसीआई ने तीन सदस्यीय क्रिकेट एडवाइडरी समिति को नए कोच की नियुक्ति का जिम्मा सौंपा गया था। गांगुली इस समिति का हिस्सा थे। मामले में विवाद तब शुरू हुआ जब शास्त्री कोच पद के इंटरव्यू में खुद ना आकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। समिति ने अनिल कुंबले को टीम का नया कोच बना दिया, जिसके बाद शास्त्री गांगुली पर भड़क उठे। जवाब में गांगुली ने उनके इंटरव्यू में ना मौजूद होने का मुद्दा उठाया और कहा कि उन्हें भारत में होना चाहिए था। हालांकि कप्तान विराट कोहली के साथ मतभेद के चलते कुबंले ने कोच पद से इस्तीफा दे दिया था और शास्त्री टीम के नए कोच बने।