युसुफ पठान और सुरेश रैना © Getty Images
युसुफ पठान और सुरेश रैना © Getty Images

साल 2011 में एमएस धोनी की अगुआई में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया। इस दौरे में टीम इंडिया को पांच वनडे मैचों की सीरीज खेलनी थी। पहला मैच डरबन में खेला गया जहां टीम इंडिया को 135 रनों से करारी हार का सामना करना पड़ा। दूसरा मैच जोहान्सबर्ग में खेला गया जहां टीम इंडिया ने महज एक रन के अंतर से दक्षिण अफ्रीका को हराने में सफलता अर्जित की। इस तरह अगर टीम इंडिया को अपने जीत के सिलसिले को बढ़ाना था तो केपटाउन में खेले जाने वाले तीसरे वनडे में जीत दर्ज करनी जरूरी थी। तीसरे वनडे में साउथ अफ्रीका ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए दक्षिण अफ्रीका की टीम ने ग्रीम स्मिथ के 43, जेपी डुमिनी के 52 और फाफ डू प्लेसी के 60 रनों की बदौलत 45वें ओवर तक साउथ अफ्रीका को 200 के पार पहुंचा दिया। लेकिन इसी बीच विकटों का पतझड़ लग गया और साउथ अफ्रीका की पूरी टीम 49.2 ओवरों में 220 रनों पर ऑलआउट हो गई। भारत की ओर से जहीर खान ने सर्वाधिक 4, मुनाफ पटेल ने 3 और नेहरा ने 2 व युसुफ पठान ने 1 विकेट लिया।

जवाब में जब टीम इंडिया बल्लेबाजी के लिए उतरी तो उसका पहला विकेट मुरली विजय(1) के रूप में 4 रनों के कुल योग पर गिर गया। इसके बाद विराट कोहली(28) ने दूसरे विकेट के लिए रोहित शर्मा(23) के साथ पारी संभालने की कोशिश की। इन दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 50 रन भी जोड़े। लेकिन कोहली के आउट होने के थोड़ी देर बाद ही शर्मा भी चलते बने। शर्मा के आउट होने के बाद कप्तान धोनी बल्लेबाजी के लिए आए लेकिन कुछ गेंदें खेलने के बाद वह भी 5 रन बनाकर आउट हो गए और टीम इंडिया के 69 रनों पर चार विकेट गिर गए। इसके बाद सुरेश रैना ने युवी के साथ पारी को संभालने की कोशिश की। लेकिन डुमिनी ने आते ही युवी को 16 रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट कर दिया और टीम इंडिया के 93 रनों पर 5 विकेट गिरा दिए। ऐसे में लग रहा था कि टीम इंडिया अब पक्का मैच हारेगी। ऐसी परिस्थिति में सुरेश रैना(37) ने युसुफ पठान(59) के साथ छठवें विकेट के लिए 75 रन जोड़े। [ये भी पढ़ें: भारत 'ए' बनाम इंग्लैंड, दूसरा वॉर्म अप मैच: जीत की राह में लौटना चाहेगी इंडिया 'ए']

इस दौरान दोनों ने मैदान की चारों तरफ करारे स्ट्रोक खेले। पठान ने तेजतर्रार अंदाज में अपना अर्धशतक भी पूरा किया। लेकिन जीत के करीब पहुंचने के बाद ये दोनों भी आउट हो गए और अब टीम इंडिया के 182 रनों पर सात विकेट गिर गए थे। जबकि दक्षिण अफ्रीका के खतरनाक गेंदबाज डेल स्टेन और टी सोत्सोबे और मोर्ने मोर्केल के ओवर अभी बाकी थे। लेकिन हरभजन सिंह ने बड़ी हिम्मत दिखाई और जहीर खान(14) के साथ आठवें विकेट के लिए 26 रन जोड़े। लेकिन इसी बीच जहीर खान एक बड़ा स्ट्रोक जड़ने के प्रयास में आउट हो गए और भारत ने 208 रनों पर आठवां विकेट गंवा दिया और मैच में फिर से रोमांच वापस आ गया।

स्मिथ ने मोर्ने मोर्केल को गेंदबाजी आक्रमण पर लगा दिया। लेकिन हरभजन सिंह ने बल्लेबाजी पर आते ही एक लंबा छक्का जड़ते हुए टीम इंडिया को जीत के मुहाने पर ला खड़ा कर दिया। अब साउथ अफ्रीकी गेंदबाजी की कोशिश थी कि हरभजन को स्ट्राइक न दी जाए। इस तरह मैच पारी के 49वें ओवर तक पहुंच गया और अब हरभजन को स्ट्राइक मिल चुकी थी। पहली गेंद पर भज्जी ने सिंगल लिया। दूसरी गेंद पर नेहरा ने चौका जड़कर भारत को 2 विकेट से जीत दिला दी। ये मैच वनडे क्रिकेट हिस्ट्री के रोमांचक मैचों में से एक है।