सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर ©  Getty Images
सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर © Getty Images

साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत का दौरा किया और इस दौरान ऑस्ट्रेलिया को टीम इंडिया के साथ सात वनडे मैचों की सीरीज खेलनी थी। सीरीज का पहला मैच जो बैंगलोर में खेला जाना था वह बारिश के कारण अनिर्णित रहा। वहीं अगले चार वनडे मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने तीन और भारतीय टीम ने एक में जीत हासिल की। इस तरह ऑस्ट्रेलिया सीरीज में 3-1 से बढ़त बनाए हुई थी। जाहिर है कि अगर टीम इंडिया को सीरीज में अपनी उम्मीदें बरकरार रखनी थीं तो छठवें मैच को हर हाल में जीतना जरूरी था। नागपुर में खेले गए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने अपना पहला विकेट पहले ओवर में ही गंवा दिया जब जहीर खान की एक लेग स्टंप के बाहर जाती गेंद को माइकल क्लार्क ने खेलने का प्रयास किया और गेंद ने बल्ले का बाहरी किनारा लिया और विकेटकीपर एमएस धोनी के हाथों में समा गई और इस तरह ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट दो रनों पर ही गिर गया।

इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग बीच मैदान में एडम गिलक्रिस्ट का साथ निभाने पहुंच गए। पोंटिंग ने आते ही फाइन लेग बाउंड्री का चौका जहीर खान की गेंद पर जड़ा। अगले ओवर में गिली ने श्रीसंथ के खिलाफ अपना मोर्चा खोल दिया और चौकों की बरसात कर दी। इसी दौरान द्रविड़ ने श्रीसंथ की गेंद पर गली क्षेत्र में गिली का कैच छोड़ दिया। इस वक्त गिली 8 रन बनाकर खेल रहे थे। इस कैच के छूटने के बाद गिली श्रीसंथ पर कहर बनकर बरसे और उनके अगले ओवर में तीन चौके जड़ दिए। देखते- देखते ऑस्ट्रेलिया ने अपने 50 रन सातवें ओवर में पूरे कर लिए। दूसरे छोर से रिकी पोंटिंग लगातार स्ट्रोक लगा रहे थे इस तरह भारतीय गेंदबाजों के माथे पर बल पड़ने लगे। ये भी पढ़ें: महेंद्र सिंह धोनी ने आज के दिन लिया था टेस्ट क्रिकेट से संन्यास

इस खतरे को भांपते हुए भारतीय कप्तान एमएस धोनी हरभजन सिंह को आक्रमण पर ले आए। हरभजन सिंह ने अपने दूसरे ओवर में ही पोंटिंग 49(44) को पहली स्लिप पर राहुल द्रविड़ के हाथों झिलवा दिया। इस तरह 98 रनों के योग पर टीम इंडिया को दूसरी सफलता मिल गई। इसके अगले ओवर में ही पठान की ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंद पर गिली 51(47) बड़ा स्ट्रोक खेलना चाहते थे लेकिन गेंद और बल्ले के बीच अच्छा संपर्क नहीं हुआ और गेंद अंततः रॉबिन उथप्पा के हाथों में समा गई और टीम इंडिया ने 102 रनों के योग पर तीसरा विकेट झटक दिया।

इस विकेट के गिरने के बाद बल्लेबाजी के लिए आए एंड्रयु सायमंड्स ने ब्रेड हॉज के साथ ऑस्ट्रेलिया की पारी संभालनी शुरू की। लेकिन 19वें ओवर में ही जब सायमंड्स 1 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे तभी श्रीसंथ ने उनका लॉन्ग लेग पर कैच छोड़ दिया। हालांकि, अगले कुछ ओवरों बाद मुरली कार्तिक ने ब्रेड हॉज 20(28) को द्रविड़ के हाथों झिलवाकर भारत को चौथी सफलता दिलवा दी। इस तरह भारत ने 129 रनों पर ऑस्ट्रेलिया के चार विकेट निकाल दिए। लेकिन एंड्रयु सायमंड्स का कैच टीम इंडिया को खूब अखरा और अंततः सायमंड्स ने छोटी- छोटी साझेदारियां निभाते हुए ऑस्ट्रेलिया को 300 के पार पहुंचा दिया और खुद 107 रनों पर नाबाद रहे। ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवरों में आठ विकेट पर 317 रन बनाए और टीम इंडिया को 308 रनों की चुनौती दी जो कतई आसान नहीं थी।

जवाब में टीम इंडिया की ओर से ओपनिंग के लिए सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली आए। सौरव गांगुली ने दूसरे ओवर से आक्रमण शुरू कर दिया और मिचेल जॉनसन के ओवर में दो चौके जड़ दिए। अगले ओवर में ब्रेट ली की गेंद पर भी गांगुली ने कवर और मिड ऑफ के बीच से तेज चौका जड़ दिया। अभी तक सचिन तेंदुलकर शांत थे। लेकिन पारी के पांचवें ओवर में उन्होंने चुप्पी तोड़ी और ली पर बरस पड़े। चौथी गेंद पर उन्होंने हुक किया और गेंद टॉप एज लेती हुई फाइन लेग बाउंड्री लाइन पर एक टप्पा खाने के बाग चार रनों के चली गई। अगली गेंद जो ऑफ स्टंप के थोड़ा सा बाहर थी उस पर सचिन ने करारा प्रहार किया और गेंद प्वाइंट के पीछे से होती हुई चार रनों के लिए चली गई। सचिन यही नहीं रुकी और ओवर की अंतिम गेंद पर स्लिप क्षेत्र की ओर बल्ले का मुंह खोल दिया और गेंद थर्डमेन बाउंड्री की ओर चार रनों के लिए चली गई। इस तरह भारत ने पहले पांच ओवरों में 28/0 का स्कोर बना लिया था। लेकिन 318 रनों के स्कोर का पीछा करने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी था।

अगले कुछ ओवरों में सचिन या गांगुली में से कोई एक चौका जरूर जड़ देता था और सिंगल्स का सिलसिला चलाए रखा। अंततः भारत ने अपने 50 रन नौंवे ओवर में पूरे कर दिए। सचिन ने 11वें ओवर में जेम्स होप्स की गेंदों पर दो चौके जड़ दिए। वहीं सौरव गांगुली ने 14वें ओवर में नाथन ब्रेकन की गेंद पर मिड विकेट का छक्का जड़ दिया और 35 पर पहुंच गए। वहीं दूसरे छोर पर सचिन अपने अर्धशतक के करीब पहुंचने लगे। भारत ने 19 ओवरों में 95/0 का स्कोर बना लिया था और सचिन 46 व सौरव गांगुली 43 पर खेल रहे थे। पारी का 20वां ओवर ब्रेड हॉग लेकर आए। हॉग की दूसरी ही गेंद पर सचिन क्रीज के बाहर निकले और एक्स्ट्रा कवर की बजाय उन्होंने मिडविकेट के ऊपर से हॉग की गेंद पर छक्का जड़ दिया। इस तरह उन्होंने अपना अर्धशतक पूरा कर दिया। वहीं अगले ओवर में जब गांगुली 46 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे तो वह हॉग की ही गेंद पर क्रीज के बाहर निकले और लॉन्ग ऑन का छक्का जड़ दिया और इस छक्के के साथ अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। इन दोनों ने पहले विकेट के लिए 25 ओवरों में 140 रन जोड़े।

लेकिन इसी बीच हॉग की गेंद पर सचिन बाहर निकलकर खेलने को गए और गिली ने उन्हें स्टंप्ड आउट कर दिया। सचिन 72 रन बनाकर आउट हुए। सचिन के आउट होने के बाद वन डाऊन पर पठान बल्लेबाजी के लिए आए। पठान ने गांगुली के साथ 49 रनों की साझेदारी निभाई और वह 29 रन बनाकर आउट हुए। लेकिन अगले कुछ ओवर में गांगुली(86), द्रविड़(7) और युवराज सिंह(6) जल्दी- जल्दी आउट हो गए और टीम इंडिया ने 218 रनों पर अपने पांच विकेट गंवा दिए। इसके बाद धोनी और उथप्पा ने जरूर पारी संभालने की कोशिश की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और टीम 50 ओवरों में सात विकेट के नुकसा पर 299 रन ही बना सकी और 18 रनों से मैच हार गई। भले ही टीम इंडिया ये मैच हार गई लेकिन इस मैच को सचिन- गांगुली की धुआंधार बल्लेबाजी के लिए हमेशा याद किया जाएगा।