अरविंदा डी सिल्वा  © AFP
अरविंदा डी सिल्वा © AFP

भारत के खिलाफ सीरीज में श्रीलंका टीम की शर्मनाक हार के बाद एसएलसी ने पूर्व कप्तान अरविंदा डी सिल्वा को बतौर सलाहकार बौर्ड से जुड़ने का प्रस्ताव दिया था। बाद में बोर्ड के अध्यक्ष थिलंगा सुमथिपला ने डी सिल्वा को वाइस प्रेसीडेंट के पद पर काम करने के लिए कहा। हालांकि पूर्व श्रीलंकाई कप्तान का कहना है कि वह इस पर विचार कर रहे हैं लेकिन उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया है। डी सिल्वा ने ये भी कहा है कि अगर उन्हें काम करने के लिए अच्छे लोगों की टीम मिलेगी तो ही वो बोर्ड के साथ जुड़ेंगे।

क्रिकबज ने डी सिल्वा के हवाले से लिखा, “मैने अब तक उन्हें कोई आखिरी फैसला नहीं बताया है। मैं अब भी इस पर विचार कर रहा हूं। मेरा मानना है कि वहां साथ काम करने वाले लोग सही होने चाहिए और सभी एक टीम की तरह एक लक्ष्य की ओर काम करें। हमें कोच, कप्तान और खिलाड़ियों पर करीब से काम करना होगा। साथ ही चयनकर्ताओं के साथ साथ हमारी सोच भी टीम को बेहतर बनाने की दिशा में होना चाहिए। अगर लोग दूसरी दिशा में सोचेंगे तो सब खराब हो जाएगा।” डी सिल्वा पहले भी श्रीलंकाई क्रिकेट समिति के साथ जुड़े थे लेकिन विचारों के मतभेद की वजह से उन्होंने अपना पद छोड़ दिया था। डी सिल्वा इस बार ऐसा कुछ नहीं चाहते इसलिए उन्होंने पहले से ही कह दिया है कि वह सही लोगों के साथ ही काम करेंगे। [ये भी पढ़ें: भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया सीरीज के सारे मैच खेलेंगे पैट कमिंस: कोच]

डी सिल्वा का मानना है कि लगातार हार के बाद खिलाड़ियों का हौसला कम हो गया है, ऐसे में सबसे पहले खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाना होगा। डी सिल्वा ने कहा, “मुझे लगता है कि हमे खिलाड़ियों को विश्वास दिलाना होगा। स्थिरता और निरंतरता काफी अहम हैं। बतौर खिलाड़ी मैं भी इस तरह की परिस्थिति से गुजरा हूं और मैं अंदाजा लगा सकता हूं कि वह सब किस हालात से गुजर रहे होंगे। हमें उन्हें भरोसा दिलाना होगा और उनका समर्थन करना होगा। मुझे लगता कि अभी हम सही काम नहीं कर रहे हैं।” [ये भी पढ़ें: पाकिस्तान ने जीता इंडपेंडेंस कप, फाइनल में वर्ल्ड इलेवन को 33 रनों से हराया]

डी सिल्वा ने कहा कि श्रीलंका टीम में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। इसी टीम ने पिछले साल वनडे में टॉप की ऑस्ट्रेलिया को 3-0 से हराया था। हालांकि उन्होंने माना कि टीम उस जीत का फायदा नहीं उठा सकी। डी सिल्वा ने आगे कहा कि चीजें एक रात में नहीं बदली जा सकती। बोर्ड को खिलाड़ियों को आजादी देनी होगी और उन्हें खेल का आनंद लेने के लिए कहना होगा।