Ashish Nehra: Don’t want to change anybody’s game; Just want to change their frame of mind
आशीष नेहरा © Getty Images

भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद हाल ही में आईपीएल फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के मेंटोर बने हैं। इस नई जिम्मेदारी को लेकर नेहरा का कहना है कि वो किसी भी खिलाड़ी का खेल नहीं बल्कि उसकी मानसिकता बदलने की कोशिश करेंगे। नेहरा ने कहा, “मैं दो-तीन महीने में किसी का खेल नहीं बदल सकता और ना ही बदलना चाहता हूं। जरूरत पड़ने पर मैं केवल उनकी मानसिकता बदलूंगा। मेरे सभी गेंदबाजों को पता है कि उन्हें कैसी गेंदबाजी करनी है लेकिन मेरा काम होगा कि मैं उन्हें बताऊं कि कब क्या गेंद करनी है।”

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में नेहरा ने कहा, “ये मेरे लिए नई शुरुआत है। सभी जानते हैं कि आरसीबी कितनी बड़ी टीम है। वो तीन बार फाइनल में पहुंचे है लेकिन आखिरी पड़ाव नहीं पार कर पाए हैं इसलिए एक सफल सीजन की उम्मीद कर रहे हैं।” नेहरा ने 30 साल की उम्र में टी20 डेब्यू कर सभी को चौंका दिया था। बल्लेबाजों का फॉर्मेट माने जाने वाले टी20 को नेहरा ने पूरी तरह गेंदबाजों का खेल साबित कर दिया। नेहरा का मानना है कि इस फॉर्मेट में बल्लेबाजों को हमेशा ही गेंदबाजों से ज्यादा क्रेडिट मिलता है।

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उन्होंने कहा, “बतौर बल्लेबाज अगर आप 5-6 पारियों तक रन नहीं बनाते हैं और फिर आप 120 गेंदो पर 40 या 130 गेंदो पर 50 बनाते हो तो वो भी चर्चा में आता है। लेकिन गेंदबाजों के लिए स्थिति बिल्कुल उल्टी है। आप किसी मैच में 4 ओवर में 25 रन देकर 3 विकेट निकाल लो, फिर भी शायद किसी का ध्यान इसपर ना जाय। लेकिन अगर आप 4 ओवर में 60 रन देते हो तो उसे बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाएगा। लेकिन खेल में योगदान की बात करें तो, मुझे लगता है कि गेंदबाजों की भूमिका बराबर की होती है, खासकर बैंगलोर और मुंबई जैसे वेन्यू में, जहां सबको पता होता है कि विकेट बल्लेबाजों की मदद करता है।”

नेहरा ने आगे कहा, “टेस्ट हो, वनडे या फिर टी20 मैच जीतने के लिए गेंदबाजों का अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी होता है। आप 1,000 रन बनाकर टेस्ट मैच नहीं जीत सकते हो। आपको 20 विकेट लेने ही होंगे।”