‘Batman’ Aslam Chaudhry to the rescue for cricket stars like Virat Kohli, Sachin Tendulkar
वर्कशॉप में काम करते असलम चौधरी © AFP

इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत एक ऐसे टूर्नामेंट की तरह हुई थी जहां दर्शकों को लंबे चौके-छक्के देखने को मिले। फैंस को भी ये फॉर्मेट बहुत पसंद आया। क्रिस गेल, एबी डी विलियर्स, आंद्रे रसेल जैसे बल्लेबाजों ने तो इसका रोमांच कई गुना बढ़ा दिया लेकिन इन बल्लेबाजों को जब लंबे-लंबे छक्के लगाने के लिए अपने बल्ले को ठीक करवाना होता है तो वो ‘बैटमैन’ के पास जाते हैं। जी नहीं हम कॉमिक बुक वाले बैटमैन की बात नहीं कर सके हैं, हम बात कर रहे हैं मुंबई के रहने वाले असलम चौधरी की। 65 साल के असलम साउथ मुंबई में एक बैट रिपेरिंग वर्कशॉप चलाते हैं। इस वर्कशॉप की शुरुआत साल 1920 में उनके पिता ने की थी।

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असलम बताते हैं कि उन्होंने सचिन तेंदुलकर, फॉफ ड्यु प्लेसी, स्टीवन स्मिथ और क्रिस गेल का बल्ला रिपेयर किया है। गौरतलब है कि तकनीकि के इस जमाने में असलम चौधरी आज भी हाथ से बल्ले बनाते हैं। उनके बिजनेस कार्ड पर बैट के पंखो की तरह दो बल्ले बने हुए हैं, इस वजह से वो मुंबई में बैटमैन नाम से मशहूर हैं। एएफपी से बातचीत करते हुए चौधरी ने कहा, “आईपीएल काफी बिजी रहता है क्योंकि बल्ले जल्दी टूटते हैं।” असलम का कहना है कि आज के क्रिकेट बैट ज्यादा कमजोर हैं क्योंकि वो पहले के जितने मशीन के दबाव से नहीं गुजरते।

कोहली-धोनी के लिए कर चुके हैं काम

अपने काम करने के तरीके के बारे में बात करते हुए चौधरी ने कहा, “वो मुझे कॉल करते हैं, मैं उन्हें देखने जाता हूं और फिर बैट को अपने साथ यहां ले आता हूं। काम करने का समय कम होता है क्योंकि खिलाड़यों को अगले ही दिन निकलना होता है। इसलिए मैं जल्द से जल्द बल्ले को ठीक करके वापस देता हूं।” असलम ने बताया कि भारतीय कप्तान विराट कोहली ने एक बार खुद उन्हें फोन किया था। असलम को लगा कि ये किसी तरह का मजाक है क्योंकि कोई भी खिलाड़ी उन्हें सीधे फोन नहीं करता था। कोहली ही नहीं असलम ने पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का बल्ला भी रिपेयर किया है।

मलिंगा के लिए बुलानी पड़ी पुलिस

एक पुराने किस्से को याद करते हुए चौधरी ने कहा, “बड़े खिलाड़ी खुद वर्कशॉप में नहीं आते हैं क्योंकि उन्हें देखने के लिए इतनी भीड़ आ जाएगी कि फिर वो यहां से जा ही नहीं पाएंगे। लसिथ मलिंगा ने एक बार ये गलती की थी। इतनी ज्यादा भीड़ हो गई थी, कि हमें पुलिस बुलानी पड़ी। वर्कशॉप का शटर बंद कर दिया गया और पुलिस के आने तक दो घंटे मलिंगा अंदर ही बंद रहे।”

असलम के लिए बैट बनाना एक कला है लेकिन बढ़ती उम्र के साथ उनका काम और मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं बूढ़ा हो रहा हूं और लकड़ी के बड़े टुकड़ों को आकार देना ताकत का काम है। इसमें काफी मेहनत लगती है और शाम को जब मेरा काम खत्म होता है, मैं इतना थक जाता हूं कि मैं टूटे बल्लों के बारे में बात भी नहीं करना चाहता। मुझे फर्क ही नहीं पड़ता लेकिन अगली सुबह होते ही सब पहले जैसा हो जाता है।”