BCCI state units grant voting rights to former India cricketers, instruct Vinod Rai
Sachin Tendulkar (File Photo) © PTI

बीसीसीआई की प्रशासकों की समिति (सीओए) के नए निर्देश से मान्यता प्राप्त इकायां हैरान हैं क्योंकि सभी राज्यों को मतदाता सूची में पूर्व भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को जगह देने को कहा गया है। सीओए ने आज राज्य इकायों को ईमेल भेजा जिसमें सभी राज्य संघों ( वे भी शामिल जिनकी आम सभा में मतदाताओं के रूप में सिर्फ जिला संघों या क्लबों के प्रतिनिधि शामिल हैं) के लिए अनिवार्य किया गया है कि वे राज्य के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों (पुरुष और महिला) को मतदान अधिकार के साथ सदस्यता दें।

इस नए ईमेल से कुछ राज्य इकाइयां नाराज हैं जहां मतदाताओं के रूप में केवल क्लब या जिला इकाइयां शामिल हैं। एक राज्य इकाई के पदाधिकारी ने ने कहा , ‘‘ यह संविधान के तहत संघ के गठन के हमारे मूलभूत संवैधानिक अधिकार पर प्रत्यक्ष हमला है। साथ ही यह तथ्य है कि पहले उन राज्य इकाइयों जिनमें कोई व्यक्तिगत मतदाता नहीं है , उन्हें कहा गया था कि पूर्व क्रिकेटरों को सिर्फ सदस्य बनाया जाएगा।’’

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उन्होंने कहा , ‘‘अब हमें उन्हें मतदाता सूची में जगह देनी होगी। तो फिर हमारे सामान्य सदस्य क्यों नहीं हो सकते। हम संघ का गठन कैसे करते हैं , यह इससे जुड़े हमारे अधिकार का उल्लंघन है। ’’ जब जिन दो संघों को अपनी मतदाता सूची में आमूलचूल बदलाव करना होगा उनमें बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) और मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) शामिल हैं जहां कोई व्यक्तिगत मतदाता नहीं है।

कैब में क्लब और जिलों को मतदान का अधिकार है जबकि एमसीए में सिर्फ क्लबों को। सीओए ने साथ ही इकाइयों को पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की पूर्व सूची सौंपने को कहा है जो पात्र मतदाता हैं। एक अन्य निर्देश में सीओए ने सभी राज्य संघों के प्रशासकों (उदारण के लिए डीडीसीए के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) विक्रमजीत सेन) को नए संविधान अपनाए नहीं जाने तक प्रभार संभाले रखने को कहा है।

इसका मतलब हुआ कि 30 जून को डीडीसीए के चुनाव के बाद भी न्यायमूर्ति सेन तब तक प्रभारी रहेंगे जब तक कि नए संविधान को अपनाया नहीं जाता। सीओए ने साथ ही कहा है कि अगर मौजूदा अधिकारियों ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है तो राज्य इकाई का सदस्य प्रशासक की नियुक्ति के लिए संबंधित उच्च न्यायालय की शरण में जा सकता है।