Brad Hodge doesn’t feel Australian IPL coaches are biased towards countrymen
Brod Hodge, Aaron Finch © Getty Images

पूर्व दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर ग्रीम स्मिथ ने इंडियन प्रीमियर लीग के 11वें सीजन के दौरान फ्रेंचाइजी के ऑस्ट्रेलियाई कोचों के उनके देश के खिलाड़ियों को अतिरिक्त मौके देने की बात सामने रखी है। स्मिथ ने आईपीएल मैच के दौरान आने वाले कार्यक्रम सेलेक्ट डगआउट के दौरान इस बात पर रोशनी डाली, जिसके बाद वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान डैरन सैमी ने भी इससे इत्तेफाक जताया। हालांकि किंग्स इलेवन पंजाब के कोच ब्रैड हॉज ने इस बात से इंकार किया है। क्रिकबज को दिए बयान में पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने कहा, “देखिए, मैं जहां से देख रहा हूं मुझे किसी तरह का पक्षपात नजर नहीं आता है।”

किंग्स इलेवन पंजाब टीम में एरन फिंच, मार्कस स्टोइनिस और एंड्रयू टाई ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर हैं। हॉज ने आगे कहा, “हमारी टीम में कुछ ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैं। मुझे लगता है कि स्मिथ का इशारा इसी तरफ है लेकिन वो कहना चाहता है कि उन कोचों पर बिग बैश लीग का प्रभाव है, हम में से कई दूसरी टी20 लीगों में भी खेलते और कोचिंग करते हैं। इसलिए ग्रीम शायद ये अंदाजा लगा रहे हैं कि अगर दक्षिण अफ्रीकी लीग शुरू होने के बाद वो भी ऐसा करते हैं तो उनके खिलाड़ियों को ज्यादा मौके मिलेंगे।”

बॉल टेंपरिंग की वजह से मैदान पर बीमार हो गए थे पैट कमिंस
बॉल टेंपरिंग की वजह से मैदान पर बीमार हो गए थे पैट कमिंस

हॉज ने ये भी कहा कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के ज्यादा चयन का एक कारण ये भी है कि आईपीएल में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ज्यादा हैं। उन्होंने कहा, “इंग्लैंड ने अभी हाल ही में अपने खिलाड़ियों को इस टूर्नामेंट में खेलने की इजाजत दी है। इसलिए इसमें कई सारी मुश्किले हैं, जिसका प्रभाव पड़ता है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ भी है जैसा वो बता रहा है। नीलामी में हर कोई पूरा होमवर्क करके आया था। इसलिए इसमें कोई पक्षपात नहीं है। पिछले 20 साल में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट काफी अच्छा रहा है। हम ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को लेकर किसी तरह का पक्षपात नहीं कर रहे हैं।”

बता दें कि 11वें सीजन में हिस्सा ले रही आठ टीमों में से चार टीमों (सनराइजर्स हैदराबाद, दिल्ली डेयरेडविल्स, राजस्थान रॉयल्स, किंग्स इलेवन पंजाब) में ऑस्ट्रेलियाई कोच हैं। दिल्ली डेयरडेविल्स के कोच रिकी पोंटिंग के गौतम गंभीर, जेसन रॉय और कॉलिन मुनरो के मुकाबले ग्लेन मैक्सवेल को ज्यादा मौके देने के बाद ये मुद्दा चर्चा का विषय बना था।