David Richardson: T20 cricket is crucial for any future Olympic bid but it also risks getting out of control
Dave Richardson © AFP

दुनिया भर में अलग अलग टी20 लीगों के शुरु होने के बाद से आईसीसी के लिए इन्हें नियमों के दायरे के अंदर लाना मुश्किल हो रहा है। खिलाड़ी इंडियन प्रीमियर लीग, बिग बैश लीग जैसी बड़ी लीगों में खेलकर पैसे कमा रहे हैं, ऐसे में खिलाड़ियों को टी20 लीगों में हिस्सा लेने के रोकने के लिए नियम बनाना और भी मुश्किल है। पिछले दिनों पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों को साल में केवल दो ही टी20 लीगों में हिस्सा लेने का आदेश दिया है, जिसमें से एक पाकिस्तान सुपर लीग होगी। कुछ इसी तरह बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी अपने खिलाड़ियों को केवल दो विदेशी लीगों में खेलने की इजाजत दी है, वहीं उनके लिए घरेलू प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में खेलना अनिवार्य है।

IPL 2018 फाइनल में पहुंचने के लिए कोलकाता-हैदराबाद के बीच होगी आखिरी जंग
IPL 2018 फाइनल में पहुंचने के लिए कोलकाता-हैदराबाद के बीच होगी आखिरी जंग

आईसीसी प्रमुथ डेविड रिचर्डसन भी विश्वभर की इन टी20 लीगों को रेगुलेट करने के लिए नियम बनाने के पक्ष में हैं। रिचर्डसन का मानना है कि टी20 लीग भविष्य में क्रिकेट के ओलंपिक का हिस्सा बनने के लिए अहम है लेकिन उन्हें नियंत्रण में लाना जरूरी है। रिचर्डसन ने कोलकाता में आईसीसी बैठक के दौरान कहा, “खेल का सामना करने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है घरेलू टी 20 लीगों का तैजी से बढ़ना। नई लीगों का शेड्यूल अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को प्रभावित कर रहा है। आईसीसी की नई समिति ये सुनिश्चित करेगी कि टी20 लीग इस तरह से आयोजित की जाए कि वो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को प्रभावित ना करें और हमारे पास अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हों।”

रिचर्डसन ने आगे कहा, “समिति टी20 लीगों को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में फिट करेगी, साथ ही ये भी देखेगी कि एक से ज्यादा लीग खेलने वाले खिलाड़ियों पर रोक लगाई जानी चाहिए या नहीं। हम ना केवल खिलाड़ियों पर रोक लगाने की बारे में बात कर रहे हैं बल्कि ये भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी नई लीग में खिलाड़ियों को सही तरीके से संरक्षित किया जाय, कम से कम भ्रष्टाचार विरोधी मानदंड हों, एंटी-डोपिंग, खिलाड़ी अनुबंधों का भुगतान और सभी प्रकार की चीजें हों।” रिचर्डसन इन लीगों में निवेश करने वाले प्राइवेट स्टेकहोल्डर्स को भी दायरे के अंदर लाकर ये निश्चित करना चाहते हैं कि वो केवल पैसा कमाकर भागें ना।