Dinesh Karthik: Abhishek Nayar has been my guru over the last few years
दिनेश कार्तिक © AFP

बांग्लादेश के खिलाफ निदाहास ट्रॉफी फाइनल में भारत को रोमांचक जीत दिलाकर दिनेश कार्तिक ने फैंस का दिल जीत लिया है। कार्तिक कई सालों से भारतीय टीम में अंदर बाहर होते रहे हैं लेकिन इस मैच के बाद टीम में उनकी जगह एक फिनिशर के तौर पर पक्की हो चुकी है। ट्रॉफी जीतने के बाद इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक बयान में कार्तिक ने मुंबई अभिषेक नायर को अपनी बेहतर हुए बल्लेबाजी का श्रेय दिया। कार्तिक ने कहा, “हां, वो ही था जिसने मुझे क्रीज का बेहतर इस्तेमाल करना सिखाया। जब हम साथ में अभ्यास करते थे, तो वो मुझे समझाता था कि क्रीज में कितना डीप जाकर खेलना चाहिए क्योंकि वो खुद से बहुत अच्छे से करता था। उसने मुझे क्रीज में पीछे रहकर गेंद की गति का इस्तेमाल करना सिखाया। पहले मैं यहीं पर गलतियां करता था। मैं बिना देखे स्टेप आउट कर जाता था।”

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कार्तिक ने अपनी इस सफलता का श्रेय अभिषेक को दिया और उन्हें अपना गुरू बताया। कार्तिक ने आगे कहा, “मुझे लगता है कि अभी मुझे जितनी भी सफलता मिली है वो उसकी वजह से है। मैं नायर का शुक्रगुजार हूं। उसने मेरे लिए जो किया वो करना उसकी जिम्मेदारी नहीं थी। उसके लिए मेरा साथ समय बिताना, उसे मेरे साथ समय बिताने की जरूरत क्यों थी? मैं उसे एक रुपया भी नहीं दिया। मैने उसके लिए क्या किया? कुछ भी नहीं। उसने मेरे मदद की, उसने मुझे ज्ञान, समय और ट्रेनिंग टिप्स दी और मेरे लिए और भी बहुत कुछ किया। आज में जहां भी हूं उसमें मेरे परिवार और दोस्तों की बड़ी भूमिका है लेकिन जैसा कि कहा जाता है माता, पिता गुरू देवम। पिछले कुछ सालों में वो मेरा गुरू रहा है और उसने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। मैं उसका कर्जदार हूं। मैं खुशकिस्मत हूं जो मुझे उसके जैसा मदद करने वाला शख्स मिला। वो इस खेल में खुशी के अलावा, बहुत दर्द से गुजर चुका है और वो मुझे समय दे सका ये बहुत अहम था। मैने उससे जो भी पूछा उसने कभी किसी चीज के लिए ना नहीं कहा।। वो हमेशा मेरी मदद के लिए मौजूद रहा। उसका दिल बहुत बड़ा है, वो गरीब बच्चों के लिए जितना करता है, मुझे नहीं पता कि कितने और क्रिकेटर ऐसा करते होंगे।”

टी20 अंतर्राष्ट्रीय में आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर टीम को जिताने वाले पहले भारतीय बने कार्तिक फाइनल मैच के दौरान ऊपरी क्रम में ना भेजे जाने को लेकर थोड़ा नाराज थे। कप्तान रोहित शर्मा ने मैच के बाद अपने बयान में भी इस बात का जिक्र किया था। इस बारे में बात करते हुए कार्तिक ने कहा, “मैं थोड़ा चौंक गया था, मैं गुस्सा था ये कहना थोड़ा ज्यादा होगा। पूरे टूर्नामेंट मैने 6 नंबर पर बल्लेबाजी की थी और उस मैच में शंकर को अपने से आगे जाते देख मैं थोड़ा चौंक गया था। रोहित के साथ मेरी अच्छे रिश्ते हैं। उसकी कप्तानी में हमने आईपीएल जीता है। मैं उस पर काफी भरोसा करता हूं। मुझे पता है कि बतौर क्रिकेटर वो मेरा सम्मान करता है। मैं गुस्सा होने से ज्यादा आश्चर्य में था, थोड़ा निराश भी हुआ था। मुझे ऐसा लगा ‘तुम्हें पूरा यकीन है कि ये दांव काम करेगा क्योंकि विजय ने पूरे टूर्नामेंट में बल्लेबाजी नहीं की है?’ मुझे पता था कि इसके पीछे कोई वजह जरूर होगी।”

हालांकि कार्तिक ने कहा कि विजय शंकर के लिए ये सीखने का अच्छा मौका था। उन्होंने कहा, “देखिए, हर क्रिकेटर को इस फेस से गुजरना पड़ता है, जहां वो शॉट लगाने कोशिश करता है लेकिन गेंद को कनेक्ट नहीं कर पाता है। वो गेंद को कनेक्ट करने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसकी टाइमिंग सही नहीं थी। इस खेल में हर खिलाड़ी को इससे गुजरना पड़ता है। इसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए होती है, ये उसके लिए बदकिस्मती की बात थी क्योंकि ये टीम के लिए बल्लेबाजी करने का उसका पहला मौका था। फाइनल मैच के दबाव में चीजें उसके हक में नहीं गई लेकिन उसके लिए सीखने का अच्छा मौका था।”