EAS Prasanna believes mandatory yo-yo test criteria is unjust to players
Mohammed Shami, Ambati Rayudu © Designed Photo

यो यो टेस्‍ट में कई बड़े खिलाड़ियों के फेल होने के बाद से इस दिनों टेस्‍ट की प्रासंगिकता को लेकर विवाद गहराया हुआ है। अफगानिस्‍तान टेस्‍ट से पहले खबर आई कि मोहम्‍मद शमी यो-यो टेस्‍ट में फेल हो गए हैं, जिसके कारण उन्‍हें मैच से बाहर कर दिया गया। इसके बाद इसका शिकार अंबाती रायडू बने। आईपीएल 2018 में शानदार प्रदर्शन करने के कारण ही रायडू को इंग्‍लैंड दौरे पर भारतीय टीम मं जगह दी गई थी, लेकिन टेस्‍ट में फैल होने के कारण उनका नाम भी वापस ले लिया गया।

भारतीय खिलाड़ियों को अब तक नहीं मिली सैलरी
भारतीय खिलाड़ियों को अब तक नहीं मिली सैलरी

राजस्‍थान रॉयल्‍स की तरफ से खेल चुके विकेटकीपर बल्‍लेबाज संजू सैमसन भी टेस्‍ट में फैल होने के कारण इंग्‍लैंड में इंडिया ए की तरफ से खेलने के लिए नहीं जा सके। पूर्व में सुरेश रैना, वाशिंगटन सुंदर और युवराज सिंह भी यो-यो टेस्‍ट की अनिवार्यता के कारण भारतीय टीम में जगह बनाने से वंचित रह चुके हैं।

ये टेस्‍ट खिलाड़ियों के साथ नाइंसाफी

भारतीय टीम के पूर्व स्पिन गेंदबाज ईरापल्ली प्रसन्‍ना का मानना है कि क्रिकेट में यो-यो टेस्‍ट के लिए कोई जगह ही नहीं है। क्रिकेट से इसे खत्‍म कर दिया जाना चाहिए। इस तरह के टेस्‍ट फुटबॉल, टेनिस जैसे खेलों के लिए तो सही हैं, लेकिन क्रिकेट जैसे लंबे खेल में इसकी जगह नहीं बनती। इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्‍स से बातचीत के दौरान प्रसन्‍ना ने कहा, ” टेस्‍ट क्रिकेट में खिलाड़ी को पांच दिनों तक खेलना होता है। ये टैनिस, फुटबॉल जैसा छोटा गेम नहीं है। मुझे नहीं लगता इसकी जगह क्रिकेट में बनती है। क्रिकेट में यो यो टेस्‍ट को अनिवार्य करना खिलाड़ियों के साथ नाइंसाफी करने जैसा है। ”

यो यो टेस्‍ट पास करने का पैमाना

भारत में यो-यो टेस्‍ट पास करने का पैमाना सबसे कम 16.1 रखा गया है, जबकि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्‍तान और श्रीलंका में ये टेस्‍ट पास करने का पैमान 17.1 है। ऑस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड और इंग्‍लैंड जैसे देशों में यो-यो टेस्‍ट को और भी कड़ा कर दिया गया है। वहां 19 अंक काे पासिंग मार्कस में रखा गया है।