Glenn McGrath: Ishant Sharma is adapting to english conditions very well
Ishant Sharma (File Photo) © Getty Images

ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा को लगाता है कि इशांत शर्मा को भारतीय टीम में अपनी भूमिका को पहचानने की जरूरत है और उनका मानना है कि मुख्य गेंदबाज के बजाय वह कामगार की भूमिका अधिक निभाते हैं।

मोहम्‍मद सिराज ने की शानदार गेंदबाजी, बैकफुट पर दक्षिण अफ्रीका ए
मोहम्‍मद सिराज ने की शानदार गेंदबाजी, बैकफुट पर दक्षिण अफ्रीका ए

परिस्थितियों में खुद को ढाल रहे हैं इशांत

इशांत ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने इस मैच में सात विकेट लिए जिसमें दूसरी पारी में लिए पांच विकेट भी शामिल हैं। मैकग्रा को खुशी है कि इस तेज गेंदबाज ने धीरे धीरे परिस्थितियों से तालमेल बिठा दिया है।

मैकग्रा ने कहा, ‘‘जब इशांत ने शुरुआत की थी तो अपनी तेजी से क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। वह अब शायद उसी तेजी से गेंदबाजी नहीं कर रहा है लेकिन अब वह अधिक अनुभवी गेंदबाज है जिसका अपनी गेंदों पर अच्छा नियंत्रण है। एजबेस्टन टेस्ट में दिखा कि इशांत ने परिस्थितियों से बेहतर तालमेल बिठाना शुरू कर दिया है।’’

लंबा समय से खेलने के बावजूद इंशात का करियर नहीं है प्रभावशाली

मैकग्रा का हालांकि मानना है कि उप महाद्वीप के विकेटों पर खेलने के कारण संभवत: इशांत का रिकार्ड प्रभावशाली नहीं है। उन्होंने 83 टेस्ट मैचों में केवल 244 विकेट लिए हैं। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से 124 टेस्ट मैचों में 563 विकेट लेने वाले मैकग्रा ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि भारत में अधिकतर पिचों पर खेलना आसान नहीं है। संभवत: उन्हें अधिक स्पेल करने का मौका नहीं मिला। उन्हें एक अग्रणी गेंदबाज के बजाय कामगार की तरह अधिक उपयोग किया गया। मुझे लगता है कि उन्हें यह समझने की जरूरत है कि वह किस भूमिका में फिट बैठते हैं।’’

गिलेस्‍पी की कोचिंग का इशांत को मिला फायदा

मैकग्रा ने कहा, ‘‘मुझे लंबे स्पैल करना पसंद था और इससे मदद मिलती थी। अगर आप हमेशा शार्ट आफ लेंथ गेंदबाजी करते हो तो आप रनों पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहे हों जबकि आपको विकेट लेने की जरूरत होती है।’’ उनका मानना है कि ससेक्स की तरफ से ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज जैसन गिलेस्पी की देखरेख में डेढ़ महीने खेलने का इशांत को फायदा मिला।

सेसेक्‍स के लिए खेलने से फायदा मिला

मैकग्रा ने कहा, ‘‘अगर आप भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में एक ही लेंथ से गेंदबाजी करते हो तो आप सफल नहीं हो सकते। इंग्लैंड में गेंद स्विंग लेती है और आपको उसे थोड़ा आगे पिच कराना होगा। ऐसे में ससेक्स के लिए खेलने से उसे फायदा मिला।’’