Mahendra Singh Dhoni practicing at Bengaluru’s National Cricket Academy
MS Dhoni (File Photo) © IANS

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एकांत में अभ्यास करना पसंद करते है और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी भी कोई अलग नहीं है जो लोगों की नजरों से दूर इंग्लैंड दौरे से पहले राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में नेट पर पसीना बहाते हुए देखे गए। सचिन तेंदुलकर भी अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के आखिरी के कुछ सालों में मुंबई के ब्रांद्रा कुर्ला परिसर में खुद ही अभ्यास करते थे और एनसीए में धोनी का अभ्यास सत्र भी कुछ ऐसा ही है। उन्होंने सैकड़ों गेंदों का सामना किया जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत थ्रो – डाउन से की गयी थी।

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सेशन खत्‍म होने के बाद ड्रेसिंग रूम की तरफ जाते समय धोनी की नजर जब यहां मौजूद दो पत्रकारों पर पड़ी तो उन्होंने कहा , ‘‘भनक लग गई (धोनी की मौजूदगी का पता चल गया)।’’ बीते दिनों खबर आई थी कि महेंद्र सिंह धोनी आयरलैंड में दो मैचों की टी-20 सीरीज के लिए सबसे पहले देश छोड़ चुके हैं। धोनी ने 15 जून को एकदिवसीय टीम के खिलाड़ियों के साथ यो यो टेस्ट दिया था और दूसरे खिलाड़ियों के जाने के बाद भी वह यहां रूके रहे। धोनी आज राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में थ्रो डाउन विशेषज्ञ रघु और तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर के साथ यहां पहुंचे और लगभग ढाई घंटे तक उन्होंने 18 गज की दूरी से थ्रो – डाउन पर अभ्यास किया। ठाकुर भी बीच-बीच में गेंदबाजी करते रहे। लगातार दो घंटे अभ्यास करने के बाद धोनी ने छोटा ब्रेक लिया और फिर से अभ्यास में जुट गए। इस दौरान सिद्धार्थ कौल यहां आ गए और उन्होंने भी पूर्व भारतीय कप्तान को गेंदबाजी की।

थ्रो – डाउन में धीरे-धीरे गेंद की गति बढायी गयी और इस दिग्गज ने शॉर्ट गेंद तथा बैक लेंथ गेंदों का समाना किया। उन्होंने कुछ गेंदों को रक्षात्मक तरीके से खेला तो कुछ का सामना उन्होंने आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़कर किया। जब भी उन्हें थोड़ी जगह मिलती वह अपने अंदाज में गेंद पर तेजी से प्रहार करते देखे गए।
धोनी शार्दुल को काल्पनिक फील्डिंग लगाने के लिए कहा जिसके बाद शार्दुल ने उन्हे मिड -विकेट , एक्स्ट्रा कवर और डीप फाइन लेग में काल्पनिक फील्डिंग रखने का इशारा किया और फिर धोनी ने फील्डिंग को ध्यान में रखते हुए शार्ट खेले।

उनका रिफ्लैक्स पहले की तरह नहीं दिखा और वह कई गेंद खेलने में नाकाम रहे लेकिन जो गेंद उनके बल्ले पर आती उससे शानदार आवाज निकलती थी।