Sandeep Patil: Cricketers should be given two chances to clear Yo-Yo tests
Team India training © Getty Images

बीसीसीआई का नया फिटनेस पैमाना यो-यो टेस्ट कई खिलाड़ियों के लिए परेशानी की वजह बन गया है। अच्छे फॉर्म और लगातार रन बनाने के बाद भी इस टेस्ट में फेल होने पर खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया जा रहा है। सुरेश रैना, युवराज सिंह के बाद अंबाती रायुडू और संजू सैमसन यो-यो टेस्ट के नए शिकार बने हैं। बोर्ड इस टेस्ट को लेकर जिस तरह की गंभीरता दिखा रहा है उससे एक सवाल जरूर उठता है कि आखिर एक टेस्ट किसी खिलाड़ी के टीम में रहने या ना रहने का फैसला कैसे कर सकता है। टीम इंडिया के पूर्व चयनकर्ता ने बोर्ड से खिलाड़ियों को यो-यो टेस्ट पास करने के लिए एक से ज्यादा मौके देने की मांग की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए बयान में पाटिल ने कहा, “जैसे टेस्ट क्रिकेट में एक खिलाड़ी को अपने आप को साबित करने के लिए दो पारियां मिलती हैं, वैसे ही यो-यो टेस्ट पास करने के लिए खिलाड़ी को दो मौके मिलने चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी एक बारे में टेस्ट पास नहीं कर पाता है तो दो-तीन घंटे बाद या फिर दूसरे दिन उसे एक और मौका दिया जाना चाहिए।”

'हर कीमत पर जीतने की चाहत 'बॉल टैंपरिंग' की ओर ले जाती है'
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पाटिल ने कहा कि आधे घंटे में आप किसी खिलाड़ी के करियर से जुड़ा इतना बड़ा फैसला नहीं ले सकते हैं। उन्होंने कहा, “रायुडू के यो-यो टेस्ट में फेल होने के कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है कि वो मानसिक तौर पर वहां ना हो। आप एक खिलाड़ी के करियर की बात कर रहे हैं। उसने पूरे साल अच्छा प्रदर्शन किया है, और आप आधे घंटे में ये फैसला नहीं ले सकते कि वो दौरे पर जाएगा या नहीं। आप उस जैसे खिलाड़ियों को टीम से बाहर नहीं कर सकते हैं।”

यो-यो टेस्ट पास करना बेहतर क्रिकेटर होने का पैमाना नहीं है

यो-यो टेस्ट किसी शख्स की छोटे-छोटे ब्रेक के अंदर लगातार मुश्किल एक्टिविटी कर पाने की क्षमता को मापता है। केवल इस एक टेस्ट की आधार पर किसी क्रिकेटर की फिटनेस को नहीं मापा जा सकता है। एमसीए के स्ट्रेंथ और कंडीशन कोच अमोघ पंडित का भी यही कहना है।

उन्होंने कहा कि, “यो-यो टेस्ट कार्डियो-वैस्कुलर सहनशक्ति को नापता है। इसकी वजह से किसी तेज गेंदबाज को टीम से निकालना बेमानी होगी। एक तेज गेंदबाज को विस्फोट, शक्ति की जरूरत होती है, जबकि एक स्पिनर को सहनशक्ति की जरूरत होती है। आप इस टेस्ट के आधार पर किसी शख्स की फिटनेस नहीं माप सकते। ये ऐसा होगा कि एक बल्लेबाज लगातार कवर ड्राइव का अभ्यास करता रहे लेकिन उसे स्वीप शॉट लगाना नहीं आता हो।”