शिखर धवन © Getty Images
शिखर धवन © Getty Images

भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन आजकल धमाकेदार फॉर्म में हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में 78 रनों की पारी खेलने के बाद धवन चैंपियंस ट्रॉफी में लगातार तीन अर्धशतक लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। धवन अक्सर ही शतक बनाने के बाद अपने दोनों हाथ फैला कर बड़े ही अनोखे अंदाज में जश्न मनाते हैं, आखिकार उन्होंने इसका राज खोल दिया। धवन ने विक्रम साथये के शो ‘वॉट द डक 2′ पर इस बारे में बात करते हुए कहा, “मेरी सेलिब्रेशन स्टाइल स्वाभाविक है। जब मैने अपना पहला शतक जड़ा था, तब अपने आप मेरे हाथ ऊपर उठ गए थे, मैं बहुत खुश था, मैं ऊपर भगवान की तरफ देख रहा था। तब से यही मेरा स्टाइल बन गया। ये स्वाभाविक ही है, मैं इसका कोई अभ्यास नहीं करता हूं।”

धवन ने इस शो पर अपनी निजी जिंदगी के बारे में भी खुलकर बातें की। धवन ने ये भी बताया कि किस तरह सूफी संगीत और आध्यात्मिकता ने असफलताओं से निपटने में उनकी मदद की। उन्होंने कहा, “मैंने 21 वर्ष की उम्र से सूफी संगीत सुनना शुरू कर दिया था। मुझे अच्छे बोल वाले गाने पसंद आते हैं। मुझे गज़ल सुनने का काफी शौक है। मुझे जगजीत सिंह और गुलाम अली की गज़ले पसंद हैं। ऐसे कई गाने हैं जिनके बोल मुझे प्रेरणा देते हैं और मुझे आध्यात्म की ओर ले जाते हैं।” धवन ने आगे कहा, “गुरदास मान जी का ‘मावा ठंडिया चावा चावा कौन करें’ गाना काफी प्रेरणादायक है। इसकी जो लाइन जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद है उसका मतलब है कि मां का प्यार ठंडी छांव की तरह होता है, आप कितनी भी कोशिश करें आप इसका भार कभी नहीं उतार सकते हैं। इस तरह के गानों से मैं खुद को जोड़ पाता हूं और इससे मुझे शांति मिलती है।” [ये भी पढ़ें: आईसीसी टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने लगाई 'रिकॉर्डों की झड़ी']

धवन आज भले ही गेंदबाजों के लिए बुरा सपना बने हुए हैं लेकिन उन्होंने बताया कि अपने टेस्ट डेब्यू के समय धवन काफी नर्वस थे। धवन ने 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में अपना टेस्ट डेब्यू किया था। धवन इस समय 15 जून को होने वाले सेमीफाइनल मैच की तैयारी कर रहे हैं।