कुलदीप यादव और विराट कोहली © AFP
कुलदीप यादव और विराट कोहली © AFP

आजकल टीम इंडिया में फिटनेस को लेकर लगातार बातें की जा रही हैं। चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट ने साफ कर दिया है कि वे बहुत फिट क्रिकेटर्स की तलाश में हैं और कुलदीप यादव को खासतौर पर उनकी फिटनेस के लिए नहीं जाना जाता है। हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार के साथ इंटरव्यू में उन्होंने बताया, “बहरहाल, विराट भाई लगातार मुझे अन्य चीजों से ज्यादा अपनी फिटनेस पर काम करने के लिए कहते रहते हैं। वह मुझे अपनी फिटनेस और बॉलिंग पर ज्यादा मेहनत करने के लिए कहते हैं।”

उन्होंने खुद इस बात को स्वीकारा कि वह अंडर-19 दिनों के दौरान मैदान पर बहुत चुस्त नहीं थे। लेकिन यादव को हाल ही में नए नवेले ट्रेनिंग ड्रिल से अच्छा खासा फिट होने में मदद मिली है। वैसे कुछ साल पहले उन्होंने फिटनेस को लेकर एक दिलचस्प ट्वीट किया था जो अब फिर से सामने आया है। उन्होंने उस ट्वीट में बताया था, “चैंपियंस जिम में नहीं बनते बल्कि चैंपियन दिलों की गहराईयों में भरी चाहतों जैसे इच्छा, एक सपना, एक लक्ष्य से बनते हैं।” वैसे इन सालों में कुलदीप ने ये दिखाया है कि उनमें इच्छा है, सपने हैं लेकिन अब आगे की चीजों को पाने के लिए उनहें जिम में वक्त गुजारना होगा। और चीजें उनके लिए बढ़िया हुई हैं।

टीम इंडिया को 2019 वर्ल्ड कप के लिए कुछ अच्छे कलाईयों (रिस्ट) स्पिनर तैयार करने हैं ताकि टीम मे विविधता लाई जा सके। यादव ने अपने वनडे करियर का आगाज शानदार अंदाज में किया है। वह वेस्टइंडीज में पांच मैचों में 8 विकेट झटक चुके हैं। वैसे उनके कप्तान उनका विश्वास बढ़ाने के लिए उनपर खूब भरोसा करते हैं। कुलदीप ने कहा, “यह अच्छा है कि कप्तान कोहली मुझपर और कलाईयों वाले स्पिनरों पर भरोसा करते हैं। यह टीम के लिए अच्छा है।”

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हाल ही के सालों में टीम इंडिया के कोच बदले हैं। इसके अलावा कोहली-कुंबले के बीच विवाद भी खासा चर्चा में रहा था। ऐसी चीजें अक्सर युवा क्रिकेटर्स पर नकारात्मक सोच पैदा करती हैं। लेकिन क्या कुलदीप यादव इससे प्रभावित हुए? कुलदीप की बात करें तो उनकी शास्त्री और कुंबले दोनों ने मदद की। कुंबले ने उनकी कोच रहते हुए मदद की वहीं शास्त्री ने भी पूर्व में उन्हें अच्छी सलाह दी। शास्त्री की कुछ तारीफें कुलदीप के रीट्वीट में देखे जा सकते हैं।

वैसे दोनों कोचों के स्टाइल में अंतर को पूछा गया तो यादव ने बताया, “मुझे नहीं लगता ज्यादा अंतर है। अनिल सर मुझे प्लान के बारे में बताया करते थे, रवि सर भी मुझे अलग-अलग गेंदबाजी योजनाओं के बारे में बताते हैं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि दोनों के प्रयासों में ज्यादा अंतर है। मुझे लगता है कि दोनों ने मेरे साथ एक जैसा व्यवहार किया। मुझे कोई अंतर दिखाई नहीं देता क्योंकि इस पहलू के बारे में मैं ज्यादा नहीं सोचता। मैं इस बात पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करता हूं कि मैं अपने आपमें कैसे टीम के लिए ज्यादा सुधार कर सकता हूं। इसके लिए मैं अनिल सर से बातचीत किया करता था और रवि सर से भी बात करता हूं। अच्छी बात यह है कि वे दोनों मेरे लिए सहयोगी रहे।”