Yo-Yo Test: Kapil Dev says cricketers should be judged only on basis of on-field performances
Kapil Dev © CricketCountry

टीम इंडिया में चयन का एकमात्र पैमाना बन चुका यो-यो टेस्ट शुरुआत से ही खेल समीक्षकों के बीच बहस का विषय रहा है। लेकिन इस टेस्ट में फेल होकर अंबाती रायुडू के इंग्लैंड जाने वाली भारतीय टीम से बाहर होने के बाद ये फिटनेस टेस्ट विवाद में आ गया है। बीसीसीआई और सीओए के बीच इस टेस्ट को लेकर सवाल-जवाब का सिलसिला जारी है। इसी बीच पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने यो-यो टेस्ट को फिटनेस का एकलौता पैमाना बनाए जाने के फैसले को गलत बताया है।

भारत को पहला विश्व कप जिताने वाले कप्तान ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए बयान में कहा, “अगर कोई खिलाड़ी फिट है तो उसे खेलना चाहिए और इसके अलावा फिटनेस का कोई पैमाना नहीं होना चाहिए।” कपिल ने माना कि हर खिलाड़ी की फिटनेस का पैमाना अलग होता है और किसी एक टेस्ट से सभी का आंकलन करना बेमानी होगी।

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उन्होंने कहा, “महान फुटबॉलर डियागो मेराडोना सबसे तेज दौड़ने वाले खिलाड़ियों में से नहीं थे लेकिन जब गेंद उनके पास होती थी तो वो सबसे तेज दौड़ते थे। सीधी सी बात है, हर क्रिकेटर फिटनेस ड्रिल में अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है। बल्लेबाज के मुकाबले एक गेंदबाज यो-यो टेस्ट आसानी से पास कर लेगा लेकिन ये किसी खिलाड़ी पर फैसला लेने का आखिरी पैमाना नहीं है। आखिर में मैदान पर आपका प्रदर्शन मायने रखता है। क्रिकेटर्स को मैदान पर उनके प्रदर्शन के आधार पर ही आंकना चाहिए।”

बीसीसीआई कोषाध्यक्ष ने सीओए को लिखे अपने खत में एक अहम सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि, “क्या सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और वीरेंदर सहवाग जैसे पूर्व खिलाड़ियों के यो-यो टेस्ट स्कोर रिकॉर्ड किए गए थे और मौजूदा खिलाड़ियों के स्कोर और उनके प्रदर्शन के बीच के संबंध को रिकॉर्ड किया गया है?” चौधरी के सवाल का मतलब ये था कि टीम इंडिया के लिए पूर्व में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के स्कोर रिकॉर्ड कर मौजूदा खिलाड़ियों के स्कोर और प्रदर्शन से उनकी तुलना कर ये पता लगाया जाय कि यो-यो टेस्ट किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन को कितना प्रभावित करता है।

कपिल देव से जब पूछा गया कि क्या पूर्व खिलाड़ी इस टेस्ट में पास होते तो उन्होंने कहा, “सुनील गावस्कर को फिटनेस ड्रिल में 15 मिनट से ज्यादा से दौड़ लगाने में कोई मजा नहीं आता लेकिन वो लगातार तीन दिन तक बल्लेबाजी कर सकते हैं। अनिल कुंबले, लक्ष्मण और सौरव गांगुली जैसे खिलाड़ी भी शायद ही यो-यो टेस्ट के नए वर्जन में पास हो पाते लेकिन वो भारत में पैदा हुए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं।” कपिल देव के इस बयान में यो-यो टेस्ट को क्रिकेटर के टीम में चयन का एकमात्र पैमाना बनाए जाने के बोर्ड के फैसले पर प्रश्नचिंह लगा दिया है। अब देखना होगा बोर्ड अपना फैसला बदलता है या नहीं