Yuzvendra Chahal explains why he raised bat after career’s first boundary
Yuzvendra Chahal (File Photo) © Instagram

भारतीय टीम ने इंग्‍लैंड की धरती पर मेजबान टीम को टी-20 में 1-2 से हराकर सीरीज जीत के साथ आगाज किया। लगा कि भारतीय टीम की जीत की ये लय वनडे और टेस्‍ट सीरीज में भी बरकरार रहेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पहले वनडे में मेजबान टीम को हराने के बाद अगले दो मैचाें में भारत को इंग्‍लैंड के सामने शिकस्‍त का सामना करना पड़ा। जो रूट ने आखिरी दो वनडे में शतक लगाकर भारत को जीत से दूर रखा। अब भारत की चुनौती एक अगस्‍त से इंग्‍लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्‍ट सीरीज के दौरान होगी।

अपने खिलाड़ियों को मां-बहन की गाली देने की इजाजत नहीं देते कैप्‍टन कूल
अपने खिलाड़ियों को मां-बहन की गाली देने की इजाजत नहीं देते कैप्‍टन कूल

चौका लगाकर लहराया बल्‍ला

दूसरे वनडे के दौरान स्पिन गेंदबाज युजवेंद्र चहल 11वें नंबर पर बल्‍लेबाजी के लिए आए। भारत ही हार लगभग तय थी। चहल ने शानदार 12 रन की पारी खेली। चहल ने इस दौरान स्‍ट्रेट ड्राइव लगाकर अपने वनडे करियर का पहला चौका लगाया। चौका लगाने के बाद उन्‍होंने पवेलियन की तरफ बल्‍ला दिखाया। शतक लगाने के बाद जिस अंदाज में एक बल्‍लेबाज हवा में बल्‍ला लहराता है, ठीक उसी अंदाज में चहल ने भी बल्‍ला लहराया।

ड्रेसिंग रूम में मौजूद साथी खिलाड़ियों को दिया करारा जवाब

चहल टेस्‍ट टीम में नहीं हैं और वो भारत लौट चुके हैं। द क्विंट से बातचीत के दौरान चहल ने बल्‍ला लहराने के प्रकरण के बारे में खुलकर बातचीत की। चहल ने कहा, “बल्‍लेबाजी के लिए जाने से पहले हर कोई ड्रेसिंग रूम में मुझे छेड़ रहा था। एक साथी ने मुझे चेस्‍ट गार्ड पहनकर बल्‍लेबाजी के लिए जाने की सलाह भी दी। करियर में इससे पहले मैने चौका नहीं लगाया था। लॉर्ड्स के मैदान में मैने जैसे ही चौका लगाया तो ड्रेसिंग रूम में सभी हंसने लगे। मैं भी काफी खुश था। इसलिए मैने भी साथी खिलाड़ियों के सामने बल्‍ला लहराने में देर नहीं की।”

इंग्‍लैंड दौरे पर चहल ने टी-20 और वनडे में मिलाकर तीन विकेट लिए। उन्‍होंने कहा, मेरा इंग्‍लैंड दौरान कुल मिलाकर अच्‍छा था, लेकिन मैं इससे काफी बेहतर कर सकता था।

धोनी की रिटायरमेंट

चहल ने धोनी की रिटायरमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “माही भाई का अभी कोई ऐसा इरादा नहीं है। उन्‍होंने लॉर्ड्स में 45 रन बनाए। अगर वो नहीं टिकते तो इससे भी पहले टीम ऑलआउट हो जाती। माही भाई अकेले ज्‍यादा नहीं कर सकते थे क्‍योंकि उनके पास कोई दूसरा साथी बल्‍लेबाज नहीं था। तीसरे मैच के बाद उन्‍होंने गेंद अपने पास इसलिए रखी ताकी वो उसे कोच को दिखा सके।”