2019 World Cup will be played in Round Robin format, every team have fair chance
India vs england

30 मई से शुरू होने जा रहा क्रिकेट का महाकुंभ आईसीसी विश्व कप का यह 12वां एडिशन होगा। दावेदार के तौर पर भले ही मेजबान इंग्लैंड, भारत और न्यूजीलैंड का नाम लिया जा रहा हो लेकिन सच तो यह है कि यहां कोई भी टीम कमजोर नहीं होगी। इस बार का टूर्नामेंट राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेला जाएगा, जहां हर टीम के पास बराबर मौके होंगे।

क्या है यह राउंड रॉबिन फॉर्मेट

चलिए, पहले यह जान लेते हैं कि राउंड रॉबिन फॉर्मेट क्या होता है और इससे पहले कब किया गया था, इसका इस्तेमाल। यह फॉर्मेट ऐसा है जहां टूर्नामेंट में भाग लेने वाली सभी टीमों को आपस में मुकाबले खेलने होते हैं। मतलब 10 टीमों के इस विश्व कप में एक टीम को बाकी सभी 9 टीमों के खिलाफ खेलने का मौका मिलेगा। जो टीम टॉप चार में रहेगी वो सेमीफाइनल में पहुंच जाएंगी।

दूसरी बार होगा इस फॉर्मेट का प्रयोग

साल 1992 में खेले गए विश्व कप को राउंड रॉबिन फॉर्मेट में ही खेला गया था। इस खिताब को पाकिस्तान की टीम ने अपने नाम किया था। साल 1975 में खेले गए पहले विश्व कप से लेकर साल 1987 तक टूर्नामेंट को ग्रुप फॉर्मेट में खेला गया। 1992 का विश्व कप राउंड रॉबिन फॉर्मेट में कराया गया था। इसके बाद 1996 का टूर्नामेंट पुराने फॉर्मेट में खेला गया। 1999 के विश्व कप में ग्रुप-स्टेज के बाद सुपर-6 का मुकाबला हुआ था। दक्षिण अफ्रीका का विश्व कप भी ऐसा ही था।

ग्रुप फॉर्मेट में कम मौके

विश्व कप के ग्रुप फॉर्मेट में खेले जाने से टूर्नामेंट छोटा जरूर होता है लेकिन कई टीमों को एक दूसरे के खिलाफ खेलने का मौका ही नहीं मिल पाता है। राउंड रॉबिन में जहां टीम के पास ज्यादा मैच होते हैं तो उनके वापसी के भी मौके ज्यादा होते हैं। ग्रुप फॉर्मेट में कम मैच होने का वजह से कई बार ताकतवर टीमें भी उलटफेर का शिकार होने की वजह से टूर्नामेंट से जल्दी बाहर हो जाती है।

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पूर्व दक्षिण अफ्रीकी दिग्गज जॉनी रोड्स का मानना है विश्व कप में कोई प्रबल दावेदार नहीं है और फॉर्मेट में बदलाव के कारण सभी के लिए रास्ते खुले हैं। विश्व कप 2019 राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेला जायेगा, जिसमें सभी दस टीमें एक दूसरे से खेलेंगी और टॉप चार सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।