भारत के पांच सबसे तेज गेंदबाज
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हमेशा से तेज गेंदबाजी को भारतीय क्रिकेट की कमजोरी के रूप में देखा गया है। इस कमजोरी के पीछे एक सबसे बड़ी वजह मानी गई है तो वह है तेज गति वाले गेंदबाजों की कमी। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि भारतीय क्रिकेट टीम को कभी तेज रफ्तार वाले गेंदबाज नहीं मिले। बल्कि मिले और उन्होंने भारतीय क्रिकेट को आश्वस्त भी किया कि अब उनकी यह समस्या लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन दुर्भाग्य से ये तेज गेंदबाज अपनी रफ्तार को आगे के सालों में बरकरार नहीं रख पाए और एक आम मध्यम तेज गति के गेंदबाज बनकर रह गए। क्रिकेट विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय पिचों पर तेज गेंदबाजी करना मुश्किल होता है इसीलिए कुछ ही समय में भारतीय तेज गेंदबाज ठंडे पड़ जाते हैं। लेकिन इन सबके बावजूद कुछ भारतीय गेंदबाज ऐसे भी हैं जिन्होंने तेज रफ्तार गेंदबाजी करने के मामले में कुछ समय तक सफलता अर्जित की। तो आइए नजर डालते हैं भारत के स्पीडस्टर गेंदबाजों पर।

जवागल श्रीनाथ:

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श्रीनाथ ने सन् 1995 से सन् 2000 के बीच बेहद तेज रफ्तार में गेंदबाजी की थी। उन्होंने इन सालों में खेली गई सीरीजों के दौरान कई दफे 150 कि.मी./घंटे की रफ्तार को पार किया। इसी बीच एक भारतीय न्यूज सर्विस के मुताबिक श्रीनाथ ने सबसे तेज 156 कि.मी./घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी।

इन्हीं सालों में श्रीनाथ भी उभरे और उन्हें क्लूजनर और डोनाल्ड के समकक्ष गिना जाने लगा।  श्रीनाथ का जादू विश्व कप 1999 में खूब चला और वे टूर्नामेंट में शोएब अख्तर के बाद दूसरे सबसे तेज गेंद फेंकने वाले गेंदबाज रहे। 1999 के विश्व कप के बाद श्रीनाथ एकदम से ढीले पड़ गए और 140 किमी. प्रति घंटा की स्पीड के ऊपर जाना ही उनके लिए भारी पड़ने लगा। श्रीनाथ ने 2003 के विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

ईशांत शर्मा:

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साल 2008 ईशांत के लिए सौगात लेकर आया जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई। ईशांत की कोण बनाती हुई गेंदों ने रिकी पोंटिंग समेत कई ऑस्ट्रेलियाई बल्लबाजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया। ऑस्ट्रेलिया के इस दौरे में ईशांत ने कई दफे 150 किमी./घंटे के आसपास रफ्तार की गेंदें फेंकी।

लेकिन एडीलेड टेस्ट में वे और भी घातक हो गए और अपने टेस्ट करियर की अबतक की सबसे तेज गेंद 152.6 किमी./घंटे फेंककर विपक्षी टीम के हौंसले पस्त कर दिए। उसके बाद के कई सालों तक ईशांत ने तेज रफ्तार से गेंदबाजी करना जारी रखा। लेकिन आगे के कुछ सालों में उनकी लाइन लेंथ पर सवाल उठना शुरू हो गए। जिसके बाद से ईशांत ने अपनी गति को संभाला और लाइन-लेंथ पर ध्यान देने लगे। फलस्वरूप ईशांत एक मीडियम पेसर बन कर रह गए।

वरुण अरोन:

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अरोन ने अपने करियर की सबसे तेज गेंद सन् 2014 में श्रीलंका के खिलाफ डाली थी। श्रीलंका के खिलाफ इस मैच में अरोन ने 152.5 किमी./घंटे के रफ्तार की सबसे तेज गेंद फेंकी थी। अरोन के नाम रणजी में सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। अरोन ने 2010-11 रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्ड 153.4 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी।

उमेश यादव:

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महाराष्ट्र के उमेश यादव ने 2010 में भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण किया। उमेश लगातार 140 किमी./घंटे से ऊपर की रफ्तार में गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते हैं। उमेश यादव ने श्रीलंका के खिलाफ एक बार 152.2 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद डाली थी।

वैसे वे पारी में की दफे 150 के आसपास के रफ्कार की गेंदें फेंकते नजर आते हैं। ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रेथ उमेश यादव के प्रशंसक हैं। उमेश अभी तक 49 मैचों में 69 विकेट ले चुके हैं। उमेश ने आईसीसी विश्व कप 2015 में भारती टीम की ओर से सर्वाधिक विकेट लिए थे।

आशीष नेहरा:

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आशीष नेहराके लिए साल 2003 सबसे बेहतरीन साल रहा। 2003 के विश्व कप में उन्होंने बेहद घातक गेंदबाजी की और उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन पर छह विकेट लिए। इसी विश्व कप में नेहरा ने लगातार 150 किमी./घंटा के आसपास के रफ्तार की गेंदें फेंकी। इस दौरान उनकी सबसे तेज गेंद 149.7 किमी./घंटा मापी गई।