5 Instances when captain had altercation with field umpire on wrong decision
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क्रिकेट के खेल में मैदान में हो रही गतिविधियों पर सभी प्रकार के निर्णय लेने का अधिकार अंपायर के पास होता है। क्रिकेट के नियमों के मुताबिक अंपायर पूरी स्वतंत्रता के साथ अपना निर्णय ले सकते हैं और खिलाड़ियों को बिना सवाल किए उस निर्णय को स्वीकार करना होगा। हालांकि, अंपायर भी मनुष्य हैं और जैसा कि मनुष्य को गलतियों का पुतला कहते हैं तो वे भी कभी कभार गलतियां कर ही जाते हैं। वैसे ज्यादातर मौकों पर अंपायरों द्वारा दिए गए गलत निर्णयों को खिलाड़ी नकार देते हैं। लेकिन क्रिकेट इतिहास ऐसे भी कुछ वाकयों का गवाह बन चुका है जब अंपायरों के खराब निर्णय से कुछ टीमों के कप्तान इतने झल्ला गए कि मैदान पर ही उनकी अंपायरों के साथ गरमा- गरम बहस हो गई। आइए हम आपको ऐसे ही कुछ वाकयों से रूबरू कराते हैं।

1. एम एस धोनी: भारतीय क्रिकेट टीम के लिमिटेड ओवरों के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी मैदान में अपने शांत रवैए के लिए जाने जाते हैं। लेकिन साल 2012 में ऑस्ट्रेलिया- भारत वनडे के दौरान अंपायर के एक निर्णय पर धोनी बुरी तरह से बिफर पड़े थे। दरअसल, मैच में रैना गेंदबाजी कर रहे थे और उनकी गेंद को माइकल हसी ने बाहर निकलकर खेला इसी बीच धोनी ने स्टंपिंग कर दी।

मैदानी अंपायर ने इस मामले को झटपट टीवी अंपायर के पास भेजा। थर्ड अंपायर ने पहले तो हसी को आउट करार दे दिया। लेकिन कुछ ही देर बाद जब हसी वापस पवेलियन की ओर लौट रहे थे, मैदानी अंपायर बिली बाउडेन ने उन्हें वापस बुला लिया। दरअसल थर्ड अंपायर ने जल्दबाजी में गलत बटन दबा दिया था और फौरन मैदानी अंपायर से बातचीत करके उस निर्णय को बदला।

जब हसी वापस क्रीज पर लौट रहे थे तो उनके चेहरे पर मुस्कराहट बिखरी हुई थी। लेकिन यह बात एम एस धोनी को बड़ी नागवार गुजरी और वह अंपायर से बहस करने में उलझ गए। इस बहस के दौरान धोनी के तेवर देखने लायक थे। जाहिर है कि वह अंपायर को जताना चाहते थे कि आप इस तरह से भारतीय टीम व दर्शकों की भावनाओं के साथ खेल नहीं सकते। बहरहाल, धोनी को अंपायर का निर्णय स्वीकार करना ही पड़ा।

2. माइक गेटिंग: यह साल 1987 की बात है जब फैसलाबाद में इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच खेला जा रहा था। टेस्ट मैच के दूसरे दिन पाकिस्तान इंग्लैंड के पहली पारी में 292 रनों के जवाब में 106 रनों पर अपने 5 विकेट गंवा चुका था। अब दूसरे दिन के खेल के खत्म होने में सिर्फ 3 गेंदें ही शेष थीं। इसी बीच इंग्लैंड के कप्तान गैटिंग ने डेविड केपेल नाम के खिलाड़ी को डीप स्कवेयर लेग पर सिंगल को बचाने के लिए लगा दिया।

इसी बीच शकूर राना ने गेटिंग पर बिना बताए फील्डिंग बदलने का आरोप लगाया और इसे चीटिंग करार दिया। इस बात को लेकर गैटिंग और शकूर राना के बीच ठन गई। गैटिंग के मुताबिक उन्होंने राना को फील्डिंग चेंज के बारे में बताया था, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने ये बचकाना आरोप उनके सिर मढ़ दिया। दोनों ने मैदान पर एक दूसरे के साथ गाली- गलौच भी की। उनके बीच की कई गालियां तो स्टंप्स के पास लगे माइक में भी कैद हुईं जिसे बाद में पूरी दुनिया में लोगों ने सुना।

यह अंपायर और कप्तान के बीच मैदान पर हुए सबसे बड़े झगड़ों में से एक माना जाता है। विवाद के बाद शकूर राना ने कहा था, “जिस तरह की बेइज्जती उसने मेरी की है इस तरह की बेइज्जती करने पर पाकिस्तान में कई लोग मार दिए गए हैं। वह लकी है कि कि मैंने उसे पीटा नहीं।”

3. जावेद मियांदाद:

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यह बात साल 1985 की है जब पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच टेस्ट सीरीज खेली जा रही थी। पहले दो मैचों में से दोनों टीमें एक- एक जीत के साथ सीरीज में बराबरी पर थी। इस लिहाज से तीसरा टेस्ट मैच सीरीज जीत के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। पाकिस्तानी टीम जीत की ओर बढ़ रही थी और उसे अब मैच जीतने के लिए महज 2 विकेटों की जरूरत थी, लेकिन इसी बीच पाकिस्तानी कप्तान जावेद मियांदाद मैदानी अंपायर से उलझ पड़े।

दरअसल दोपहर के सेशन की अंतिम गेंद वसीम अकरम ने बाउंसर डाली तो अंपायर ने उन्हें चेतावनी दे दी। अंपायर के द्वारा चेतावनी दिए जाने से टीम के कप्तान जावेद मियांदाद झल्ला गए। मियांदाद इस निर्णय से नाखुश थे और इसी बात को लेकर उनकी अंपायर से तकरार हो गई। मियांदाद लगातार अपना प्वाइंट साबित करने में लगे हुए थे कि बाउंसर खेल का हिस्सा होती हैं।

वह इस बात से खिन्न दिख रहे थे और उन्होंने अकरम से कहा कि ओवर की अंतिम गेंद भी बाउंसर ही फेंको। जावेद अपने समय के ऐसे खिलाड़ियों में से रहे जो अक्सर विवादों के साए में रहे। जावेद का विवाद तो कई बार खुद की टीम के खिलाड़ियों के साथ भी हुआ। वहीं डेनिस लिली को बल्ला लेकर मारने के लिए दौड़ने वाला विवाद तो जावेद के सबसे बड़े विवादों में से एक माना जाता है।

4. रिकी पोंटिंग:

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यह बात साल 2010 एशेज सीरीज की है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेलबर्न में चौथा क्रिकेट टेस्ट मैच खेला जा रहा था। ऑस्ट्रेलिया सीरीज में लगातार तीसरे टेस्ट में हार की कगार पर नजर आ रहा था और बतौर कप्तान रिकी पोंटिंग के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं। इसी बीच ऑस्ट्रेलियाई फील्डरों ने केविन पीटरसन के खिलाफ विकटों के पीछे कॉट बिहाइन्ड की अपील की। लेकिन अंपायर ने इस अपील को खारिज कर दिया।

चूंकि, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को अपनी अपील पर बेहद भरोसा था इसलिए उन्होंने रेफरेल लेने का निर्णय लिया। लेकिन रेफरेल में भी उनके हाथ निराशा हाथ आई। इस बात से खिसियाए पोंटिंग स्कवेयर लेग अंपायर अलीम दार के साथ जुबानी जंग में जा भिड़े। वे यहीं नहीं रुके बल्कि फील्डिंग में वापस जाने के पहले केविन पीटरसन से भी बात की। पोंटिंग इसके पहले शायद ही मैदान पर इतना गुस्सा नजर आए थे। पोटिंग ऑस्ट्रेलिया के सफलतम कप्तानों में से एक हैं उन्होंने अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को दो विश्व कप(2003, 2007) में विजेता बनवाया।

5. विराट कोहली:

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भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली को क्रिकेट मैदान पर उनके गुस्से के लिए जाना जाता है। जब भी विपक्षी खिलाड़ी उनपर जुबानी हमला करते हैं उसका जवाब उनके पास हमेशा तैयार रहता है। लेकिन आईपीएल 2015 के दौरान कोहली श्रीलंकाई अंपायर कुमार धर्मसेना के साथ एक बहस में अड़ गए थे। दरअसल विराट कोहली सनराइर्स हैदराबाद के खिलाफ खेले गए मैच में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरू टीम की अगुआई कर रहे थे।

यह मैच वर्षा के कारण 11- 11 ओवरों का कर दिया गया था। यह घटना सनराइजर्स हैदराबाद के अंतिम ओवर के दौरान घटी कोहली ने अंपायर का ध्यान इस ओर खींचना चाहा कि मैदान पर बारिश शुरू हो गई है, लेकिन अंपायर ने मैच जारी रखा। इस बात से खफा कोहली सीधे धर्मसेना के पास गए और अपनी नाखुशी साफतौर पर जाहिर कर दी। इस दौरान कोहली बेहद गुस्से में नजर आ रहे थे।

इस बीच दूसरे फील्ड अंपायर अनिल चौधरी ने कोहली को शांत करवाया। कोहली के इस व्यवहार से कुमार धर्मसेना भी काफी नाखुश हो गए थे। विराट कोहली इसके पहले भी मैदान पर दर्शकों और दूसरे खिलाड़ियों से भिड़ते नजर आ चुके हैं। लेकिन इसके साथ यह सचाई भी है कि जबसे वह लोकप्रिय हुए हैं तबसे दर्शक और विपक्षी खिलाड़ी उनका सम्मान करने लगे हैं और यही कारण है कि विराट आजकल लड़ाई- झगड़ से कोसों दूर नजर आते हैं।