पांच मौके जब 1 रन से मैच जीती टीम इंडिया
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टी20 विश्व कप 2016 में भारत ने एक कड़े मुकाबले में बांग्लादेश को एक रन से हराकर विश्व क्रिकेट में सनसनी मचा दी थी। कई लोग तो भारत के जीतने के बाद भी यकीन नहीं कर पा रहे थे कि टीम इंडिया ने क्या वास्तव में लगभग हाथ से जा चुके इस मैच को जीत लिया है? लेकिन आखिरकार टीम इंडिया ने जीत हासिल करते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश कर ही लिया था। लेकिन क्या यह पहला मौका था जब भारत ने एक रन के मामूली अंतर से मैच जीता। कतई नहीं, बल्कि कालांतर में ऐसे कई मौके हुए जब टीम इंडिया ने मैच 1 रन जीते हैं। आज हम आपको उन पांच रोमांचक मैचों के बारे में बताने जा रहे हैं जब टीम इंडिया 1 रन से विजयी हुई।

1. भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका, साल 2012: यह बात साल 2012 टी20 विश्व कप की है जो श्रीलंका में खेला गया। ग्रुप 2 के एक अहम मुकाबले में भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीमें आमने- सामने थी। भारत को अगर सेमीफाइनल में पहुंचना था तो इस मैच को जीतना उनके लिए बेहद जरूरी था। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम इंडिया ने 68 रनों तक पहुंचते- पहुंचते अपने 4 विकेट गंवा दिए।

ऐसे में बल्लेबाजी करने आए सुरेश रैना ने रोहित शर्मा के साथ 44 रनों की साझेदारी निभाई और अंत में धोनी(23*) के साथ एक अच्छी साझेदारी निभाते हुए टीम इंडिया को 20 ओवरों में 152 रनों के स्कोर तक पहुंचाया। रैना ने इस मैच में 45 रनों की पारी खेली थी। जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने भी अपने शुरुआती 3 विकेट 46 रनों पर गंवा दिए।

लेकिन इसी बीच फाफ डू प्लेसी(65) क्रीज पर जम गए और दूसरे बल्लेबाजों के साथ वह छोटी- छोटी साझेदारियां निभाते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ने लगे। अंतिम ओवर में एल. बालाजी ने दक्षिण अफ्रीका के दो विकेट लेते हुए भारत को यह मैच एक रन से जिता दिया। हालांकि इसके बावजूद भारत सेमीफाइनल में प्रवेश नहीं कर पाया, क्योंकि उसके लिए उसे दक्षिण अफ्रीका को 30 या उससे ज्यादा रनों से हराने की जरूरत थी।

2. भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका, साल 2011: यह बात साल 2011 भारत- दक्षिण अफ्रीका वनडे सीरीज की है। दूसरा मैच जोहान्सबर्ग में खेला गया। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही और टीम इंडिया ने 67 रनों तक पहुंचते ही अपने 3 विकेट गंवा दिए। बीच के ओवरों में युवराज सिंह(53) और एम एस धोनी(38) ने जरूर पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन उनके आउट होते ही फिर से विकटों के गिरने का दौर शुरू हो गया और अंततः टीम इंडिया 47.2 ओवरों में 190 रनों पर ऑलआउट हो गई।

जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका टीम को ग्रीम स्मिथ(77) ने अच्छी शुरुआत दी, लेकिन बीच के ओवरों में उनके विकेट लगातार अंतराल में गिरने लगे और एक समय ऐसा आया कि उन्होंने 42.2 ओवरों में 188 रनों पर अपने 9 विकेट गंवा दिए। अब उन्हें जीतने के लिए 3 रन चाहिए थे वहीं उनके पास सिर्फ 1 विकेट शेष था। लेकिन इसी ओवर की अंतिम गेंद पर मुनफ पटेल ने वायने पार्नेल को क्लीन बोल्ड करते हुए टीम इंडिया को मैच एक रन से जिता दिया।

3. भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका, साल 2010: साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका ने भारत का दौरा किया। पहले वनडे मैच में दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर भारतीय टीम को बल्लेबाजी करने के लिए आमंत्रित किया। पहले बल्लेबाजी करने भारतीय टीम ने सुरेश रैना के 58, वीरेंद्र सहवाग के 46 और दिनेश कार्तिक के 44 रनों की बदौलत 50 ओवरों में 298 रनों का स्कोर खड़ा किया।

जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका टीम ने जैकस कैलिस के 89 रनों की बदौलत भारतीय टीम को एक बेहतरीन टक्कर दी। लेकिन पारी के 25वें ओवर के बाद भारतीय टीम ने कमान अपने हाथों में ले ली और निश्चित अंतराल में विकेट गिराए। अब आलम ये था कि पारी के 49.2 ओवर में दक्षिण अफ्रीका ने 290 रनों पर अपने 9 विकेट गंवा दिए। अब उन्हें मैच जीतने के लिए बाकी चार गेंदों में 8 रनों की दरकार थी।

गेंदबाजी कर रहे थे प्रवीन कुमार। अंतिम गेंद पर दक्षिण अफ्रीका को जीतने के लिए तीन रन चाहिए थे, लेकिन धोनी ने उन्हें एक रन लेने दिया और दूसरा रन दौड़ रहे पार्नेल को उन्होंने रन आउट कर दिया। इस तरह टीम इंडिया मैच 1 रन से जीत गई।

4. भारत बनाम श्रीलंका, साल 1993:

5 Instances When India won Match by one run
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साल 1993 में भारत और श्रीलंका के बीच वनडे सीरीज का पहला वनडे मैच खेला जा रहा था। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने मोहम्मद अजहरुद्दीन के 53 और मनोज प्रभाकर व नवजोत सिंह सिद्धू के 39- 39 रनों की बदौलत 50 ओवरों में 212 रन बनाए। जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका टीम ने चंदिका हथरुसिंघा के 64 और अरविंदा डी सिल्वा के 62 रनों की बदौलत एक समय 2 विकेट पर 161 रन बना लिए थे और वे जीत से चंद कदम दूर नजर आ रहे थे।

लेकिन इस बीच श्रीलंका टीम के विकटों का पतझड़ शुरू हो गया और 200 तक जाते- जाते श्रीलंका ने अपने 7 विकेट गंवा दिए थे। अंततः पारी के 50वें ओवर की दूसरी गेंद पर मनोज प्रभाकर ने विक्रमशिंघे को क्लीन बोल्ड करते हुए श्रीलंका की पारी को 211 रनों पर थाम दिया और टीम इंडिया ने मैच 1 रन से जीत लिया।

5. भारत बनाम न्यूजीलैंड, साल 1990:

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यह बात तब की है जब कपिल देव भारतीय टीम के कप्तान हुआ करते थे। भारत और न्यूजीलैंड की टीमों के मध्य त्रिकोणीय श्रृंखला का चौथा मैच खेला गया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने कपिल देव के तेजतर्रार 46 और अन्य तीन बल्लेबाजों के 36- 36 रनों की बदौलत 50 ओवरों में 221 रनों का स्कोर खड़ा किया। गौर करने वाली बात ये रही कि टीम इंडिया इस दौरान 48.2 ओवरों में 221 रनों पर ऑलआउट हो गई थी।

जवाब में 222 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड टीम ने एक समय मार्क ग्रेटबैच के 53 रनों और रिचर्ड हेडली की 46 रनों की पारी की बदौलत 175-5 स्कोर बना लिया था और अब वे जीत से महज कुछ कदम और दूर थे। लेकिन इसी बीच विकटों की पतझड़ लगना शुरू हो गया और अंततः पूरी टीम 220 रनों के स्कोर पर ऑलआउट हो गई। अंततः ये मैच भारतीय टीम ने एक रन से जीत लिया। इस दौरान भारतीय टीम ने तीन बल्लेबाजों को रन आउट करने में भी सफलता प्राप्त की थी।