भले ही पिछले सालों से टी20 प्रारूप ने क्रिकेट में अपनी अलग छाप छोड़ रखी है, लेकिन वनडे क्रिकेट का एक अलग मजा है जिसे टी20 क्रिकेट चाहकर भी छू नहीं सकता। वनडे में हर टीम के पास 50 ओवर होते हैं और हर बल्लेबाज और गेंदबाज को इस दौरान अपने जौहर को दिखाने का मौका मिलता है। कालांतर में ऐसे कई वनडे मैच हुए जिन्होंने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। आज हम ऐसे ही चुने हुए पांच वनडे मैचों के किस्से साझा करने जा रहे हैं जो ऑलटाइम सबसे रोमांचक वनडे मैच हैं।

1. दक्षिण अफ्रीका बनाम ऑस्ट्रेलिया: साल 2006 में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणअफ्रीका के बीच जोहान्सबर्ग में वनडे सीरीज का पांचवा वनडे मैच खेला गया। इस मैच के पहले दोनों टीमें सीरीज में 2-2 की बराबरी पर चल रही थी। यह मैच फाइनल मैच था। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए रिकी पोंटिंग के 105 गेंदों में 164 रनों की बदौलत 50 ओवरों में 434 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका को हर्षल गिब्स 175(110) और कप्तान ग्रीम स्मिथ 90(55) ने शानदार शुरुआत दी।

लेकिन पारी के 31वें ओवर में गिब्स चलते बने और 327 रनों के स्कोर पर अब दक्षिण अफ्रीका के 5 विकेट गिर चुके थे। इसके बाद धड़ाधड़ विकटों के गिरने का सिलसिला चलता रहा। लेकिन इस बीच खास बात ये रही कि मार्क बाउचर क्रीज पर अंत तक डटे रहे। अंतिम 6 ओवरों में दक्षिण अफ्रीका को 61 रन बनाने की दरकार थी। ऐसे में पुछल्ले बल्लेबाज वान डर वाथ ने अपने हाथ खोले और आनन फानन में 18 गेंदों में 35 रन ठोकते हुए स्कोर को 46.3 ओवरों में 399 तक पहुंचाया।

लेकिन इस बीच फिर से विकटों का पतझड़ शुरू हो गया। पारी के अंतिम ओवर में दक्षिण अफ्रीका को 6 गेंदों में 7 रनों की दरकार थी और गेंदबाजी पर थे ब्रेट ली। ब्रेट के ओवर की दूसरी गेंद पर एंड्रयु हॉल ने चौका जड़ दिया। इस तरह दक्षिण अफ्रीका को 4 गेंदों में 2 रनों की दरकार थी। लेकिन इसी बीच ब्रेट ली ने हॉल को आउट कर दिया और इस तरह दक्षिण अफ्रीका का नौंवा विकेट गिर गया। स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया। मैच किस ओर जाएगा किसी को कुछ भी पता नहीं था। लेकिन इसी बीच ओवर की पांचवीं गेंद पर बाउचर ने चौका जड़कर दक्षिण अफ्रीका को 1 विकेट से जीत दिला दी। बाउचर इस मैच में अंत तक 49 रन बनाकर नाबाद रहे। यह मैच वनडे क्रिकेट के सबसे रोमांचक मैचों में से एक है।

2. ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्टइंडीज, 1996: साल 1996 वर्ल्ड सीरीज में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर मैच खेला गया। पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के आगे नतमस्तक नजर आई। सिर्फ कार्ल हूपर ही अंत तक 96 गेंदों में 93 रन बनाकर नाबाद रहे। उनके अलावा कोई अन्य बल्लेबाज नहीं चल सका।

43 ओवरों के इस मैच में वेस्टइंडीज ने 9 विकेट के नुकसान पर 172 रनों का स्कोर खड़ा किया। जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया टीम ने अपने 74 रनों पर 7 विकेट गंवा दिए। ऐसे में लग रहा था कि ऑस्ट्रेलिया अब 100 रनों के भीतर ही सिमट जाएगी। लेकिन माइकल बेवन जो उस समय बल्लेबाजी कर रहे थे उन्होंने कमाल कर दिया। बेवन ने आठवें विकेट के लिए पॉल रिफेल(34) जो एक विशुद्ध गेंदबाज थे के साथ 83 रनों की साझेदारी निभाई और टीम को जीत की ओर ले जाने लगे। [ये भी पढ़ें: ]

लेकिन इसी बीच मैच में फिर से पांसा पलटा और 167 तक आते- आते ऑस्ट्रेलिया ने अपने 9 विकेट गंवा दिए थे। लेकिन इसी बीच माइकल बेवन ने स्ट्राइक पर आते ही मैच को अंतिम गेंद में ऑस्ट्रेलिया को जितवा दिया। बेवन ने इस मैच में अंत तक नाबाद रहते हुए 88 गेंदो में 78 रन बनाए थे। बेवन के इस फिनिशर रोल को आज भी याद किया जाता है। इस मैच में कर्टनी वॉल्श ने भले ही कोई विकेट नहीं लिया था लेकिन उनका गेंदबाजी का इकॉनमी रेट 2.44 का था। जो बताता है कि उन्होंने कितनी सधी हुई गेंदबाजी की थी।

3. भारत बनाम पाकिस्तान:

भारत और पाकिस्तान के बीच ऑस्ट्रल एशिया कप 1986 में मैच खेला गया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीकांत के 75, सुनिल गावस्कर के 92 और दिलिप वेंगसरकर के 50 रनों की बदौलत 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 245 रन बनाए। गौर करने वाली यह रही कि भारत के पुछल्ले और मध्यक्रम के बल्लेबाज इस मैच में बुरी तरह से फेल हुए और इस वजह से जहां एक समय भारतीय टीम 300 का ख्वाब देख रही थी उसे 245 रनों से ही संतुष्ट होना पड़ा।

जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम ने 110 रनों पर अपने चार विकेट गंवा दिए। ऐसे में ये स्कोर काफी दूर दिखाई दे रहा था। लेकिन जावेद मियांदाद जमे रहे। एक तरफ विकटों का पतझड़ लगा रहा लेकिन फिर भी जावेद जमे रहे। आलम ये था कि पाकिस्तान टीम अपने 9 विकेट गंवा चुकी थी और अंतिम ओवर की अंतिम गेंद पर पाकिस्तान को जीतने के लिए 4 रनों की जरूरत थी।

गेंदबाजी कर रहे थे चेतन शर्मा। लेकिन इस बीच मियांदाद ने गजब का साहस दिखाया और अंतिम गेंद पर छक्का जड़कर पाकिस्तान को 1 विकेट से जीत दिला दी। इस जीत के बाद जावेद पूरे पाकिस्तान में छा गए। गौर करने वाली बात ये भी रही कि अंतिम ओवर में ही मोहम्मद अजहरुद्दीन मियांदाद का एक रन आउट चूक गए थे। फर्ज कीजिए कि अगर जावेद मियांदाद उस गेंद पर रन आउट हो जाते तो ये नौबत तो कतई नहीं आती।

4. ऑस्ट्रेलिया बनाम दक्षिण अफ्रीका:

यह बात साल 1999 विश्व कप की है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच बर्मिंघम में दूसरा सेमीफाइनल मैच खेला जा रहा था। दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर ऑस्ट्रेलिया को पहले बल्लेबाजी का आमंत्रण दिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने माइकल बेवन के 65 और स्टीव वॉ के 56 रनों की बदौलत 213 रनों का स्कोर खड़ा किया। गौर करने वाली बात ये रही कि इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के पांच बल्लेबाज शून्य पर आउट हुए थे। यही कारण रहा कि ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 49.2 ओवरों में 213 रन ही बना सकी थी।

शॉन पोलक ने इस मैच में सर्वाधिक 36 रन देकर 5 विकेट लिए थे। वहीं एलन डोनाल्ड ने 4 विकेट लिए थे। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका टीम की शुरुआत खराब रही और उन्होंने 61 रनों पर अपने 4 विकेट गंवा दिए। इसी बीच जैकस कैलिस(53) ने मोर्चा संभाला और पांचवें विकेट के लिए जोंटी रोड्स(43) के साथ 84 रन जोड़े। लेकिन जैकस कैलिस के आउट होने के थोड़ी देर बाद फिर से विकटों के गिरने का सिलसिला शुरू हो गया लेकिन इसी बीच लांस क्लूजनर जम गए।

दक्षिण अफ्रीकी टीम 48 ओवर में 7 विकेट पर 196 रन बना चुकी थी और मार्क बाउचर और लांस क्लूजनर क्रीज पर मोर्चा संभाले हुए थे। इसी दौरान ओवर लेकर आए ग्लेन मैक्ग्रा। उन्होंने बाउचर को बोल्ड कर दिया और अगले बल्लेबाज स्टीव एलवर्दी रन आउट हो गए। अब दक्षिण अफ्रीका को जीतने के लिए 8 गेंदों मे 17 रन चाहिए थे और कंगारू टीम हावी हो गई। लेकिन क्लूजनर ने बाजी फिर दक्षिण अफ्रीका टीम के पक्ष में करते हुए 5वीं गेंद पर छक्का जड़ दिया।

मैच का अंतिम ओवर लेकर आए डेमियन फ्लेमिंग और क्लूजनर ने पहली दो गेंदों पर लगातार दो चौके जड़ दिए। इसके साथ ही मैच का पूरा समीकरण बदल गया। अब दक्षिण अफ्रीका को 4 गेंद में चाहिए था 1 रन और कंगारू टीम को 1 विकेट। तीसरी गेंद को क्लूजनर ने मिड ऑन की तरफ मारा लेकिन डेरेन लैहमेन ने इसे रोककर नॉन स्ट्राइक की ओर थ्रो किया। एलन डोनाल्ड बाल-बाल बचे।

इसके बाद कप्तान स्टीव वॉ ने सभी खिलाड़ियों को 30 गज के दायरे में तैनात कर दिया। फ्लेमिंग ने अगली बॉल यॉर्कर फेंकी जिसे क्लूजनर ने मिड ऑफ की तरफ घुमाया और बिना देरी किए दौड़ पड़े लेकिन नॉन स्ट्राइक पर खड़े डोनाल्ड की नजरें तो गेंद पर लगी हुई थीं। मार्क वॉ ने डाइव करते हुए बॉल फ्लेंमिग की ओर फेंकी। जिसे फ्लेमिंग ने गिलक्रिस्ट की ओर सरका दी।

तब तक क्लूजनर नॉन स्ट्राइक पर पहुंच चुके थे लेकिन डोनाल्ड वहीं खड़े रहे और फिर ध्यान आने पर बैट को फेंककर दौड़ पड़े लेकिन तब तक स्टंप बिखर चुके थे और दक्षिण अफ्रीका का सपना भी। क्लूजनर दूसरे छोर पर निराश घुटनों के बल बैठे थे। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच करवा दिया और दक्षिण अफ्रीका फाइनल में नहीं पहुंच पाया।

5. भारत बनाम श्रीलंका:

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फोटो साभार: thenews.com.pk

भारत और श्रीलंका के बीच साल 2009 में राजकोट के मैदान पर वनडे सीरीज का पहला मैच खेला गया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने वीरेंद्र सहवाग के 146(102), सचिन तेंदुलकर के 69(63) और एम एस धोनी के 53 गेंदों में 72 रनों की मदद से 50 ओवरों में 414 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। आमतौर पर यह देखा जाता है कि इन हाईस्कोरिंग मैचों में विपक्षी टीमें अक्सर चेज के दौरान शुरुआत में ही अपने हथियार डाल देती हैं। लेकिन इस मैच में ये बिल्कुल भी नहीं हुआ।

श्रीलंका शुरू से ही मैच में नजर आई और उनके दोनों सलामी बल्लेबाजों उपुल थरंगा(67) और तिलकरत्ने दिलशान(160) ने पहले विकेट के लिए 24 ओवरों में 188 रन जोड़े। इसके बाद बारी आई कप्तान कुमार संगकारा की। संगकारा ने दूसरे विकेट के लिए दिलशान के साथ मिलकर 75 गेंदों में 128 रनों की साझेदारी की और 43 गेंदों में 90 रन बनाकर आउट हुए।

एक ऐसा समय भी आया जब श्रीलंका 345 के स्कोर पर अपने 5 विकेट गंवा चुकी थी। ऐसे समय में एंजलो मैथ्यूज ने मोर्चा संभाला और 33 गेंदों में 38 रन बनाते हुए टीम को स्कोर के करीब ले जाने लगे। लेकिन मैथ्यूज की लाख कोशिशों के बावजूद श्रीलंका 411 रन ही बना सकी और इस रोमांचम मुकाबले को भारत ने 3 रनों से जीत लिया।