एमएस धोनी © Getty Images
एमएस धोनी © Getty Images

भारतीय टीम के सीमित ओवरों के कप्तान एमएस धोनी ने 4 जनवरी को इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के चयन के ठीक पहले वनडे और टी20 की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया और इस तरह दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों को एक बड़ा झटका लगा। ठीक उसी तरह जैसा साल 2014 में उनके रिटायरमेंट के बाद लगा था। आज से पहले शायद ही किसी ने सोचा था कि धोनी कुछ इस अंदाज में भारतीय टीम की कप्तानी से इस्तीफा देंगे। लेकिन धोनी जो सरप्राइज देने के लिए जाने जाते हैं उन्होंने फिर से क्रिकेटप्रेमियों को सरप्राइज दे दिया। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि धोनी को यकायक इस्तीफा देना पड़ा। आइए जानते हैं।

1. विराट कोहली का टीम में बढ़ता हुआ कद: पिछले डेढ़ सालों में विराट कोहली का कद टीम इंडिया में बहुत बढ़ा है। खासकर टेस्ट कप्तान बनने के बाद। कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया लगभग डेढ़ साल से अविजित है और 18 टेस्ट मैचो में टीम इंडिया को हार का मुंह नहीं देखना पड़ा है। पिछले कुछ समय से ये बात लगातार सुनने को मिल रही थी कि कोहली वनडे और टी20I के कप्तान भी बनाए जा सकते हैं। इसलिए भी क्योंकि कोहली को अब धोनी से बेहतर आंका जाने लगा था। जाहिर है कि पिछले एक दशक में टीम इंडिया में युवा कप्तान को लेकर खूब चर्चाएं हुई हैं। और धोनी भी राहुल द्रविड़ को बेदखल करके साल 2007 में युवा कप्तान ही बने थे। जाहिर है कि धोनी ने समझा हो कि उनकी इसी में भलाई है कि वह स्वेच्छापूर्वक इस पद से इस्तीफा दे दें तो उनके करियर के लिए ज्यादा बेहतर रहेगा।

2. बल्लेबाजी में लगाना चाहते हैं ध्यान: न्यूजीलैंड के खिलाफ पिछली सीरीज के अंतिम तीन मैचो में धोनी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए आए थे। कारण साफ था कि भारतीय टीम का मध्यक्रम आजकल चरमराया हुआ है और कोहली के अतिरिक्त अन्य बल्लेबाज ‘तू चल मैं आता हूं’ कि तर्ज पर बल्लेबाजी करते हैं। ऐसे में धोनी ने सोचा होगा कि अगर उन्हें अपनी टीम के लिए बल्ले से अभिन्न योगदान देना है तो उन्हें कप्तानी के भार से खुद को छुटकारा दे देना चाहिए। गौर करने वाली बात है कि सचिन तेंदुलकर ने जब कप्तानी छोड़ी थी तो उन्होंने भी कहा था कि वह अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देना चाहते हैं। गौर करने वाली बात है कि साल 2016 धोनी के लिए कुछ खास नहीं रहा था और उन्होंने पूरे साल में 13 वनडे मैचों की 10 पारियों में 27.80 की औसत से 278 रन बनाए थे। जिसमें सिर्फ एक अर्धशतक ही शामिल था। जाहिर है कि धोनी अपने प्रदर्शन से निराश थे और उन्होंने अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देने के लिए स्तीफा दिया। [ये भी पढ़ें: एमएस धोनी ने वनडे और टी20I की कप्तानी से दिया इस्तीफा]

3. कप्तानी में अब धोनी पहले जैसे रंग में नहीं: साल 2016 एमएस धोनी की कप्तानी के हिसाब से कोई खास नहीं रहा। इस साल धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने कुल 13 वनडे मैच खेले जिनमें उसे 7 में जीत और 6 में हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इन सात जीतों में से तीन जीतें जिम्बाब्वे जैसी छोटी टीम के खिलाफ आई। भारत को इस साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4-1 से हार का सामना करना पड़ा था। वहीं टी20 में उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 21 मैच खेले जिनमें 15 मैचों में जीत मिली। जीत के औसत के आधार पर तो टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल मैच से टीम इंडिया को बाहर का रास्ता देखना पड़ा। जाहिर है कि धोनी को लगा हो कि उनकी कप्तानी में ही कुछ खोट है और उन्होंने नए साल में कप्तानी से इस्तीफा देने का मन बना लिया हो।

4. धोनी बना रहे हैं रिटायरमेंट की योजना: एमएस धोनी 35 साल के हो गए हैं और इस साल जुलाई में 36 साल के हो जाएंगे। इस उम्र तक आते- आते क्रिकेटर अक्सर रिटायरमेंट के बारे में सोचने लगते हैं। जाहिर है कि धोनी के दिमाग में भी यही बात चल रही होगी। धोनी भी शानदार तरीके से रिटायरमेंट लेना चाहते होंगे। लेकिन उसके लिए उन्हें फिर से अच्छे प्रदर्शन की जरूरत होगी। जाहिर है कि इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया ताकि वह खुलकर बल्लेबाजी करते हुए लोगों को दिखा दें कि उनमें आज भी पहले जैसा दम है और जब वह खुलकर स्ट्रोक जड़ने पर आते हैं तो उनका कोई सानी नहीं है।

5. धोनी परिवार को देना चाहते हैं समय: धोनी का अब भरापूरा परिवार है। अब उनकी बेटी जीवा भी बड़ी हो चली है। ऐसे में धोनी पर पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ने लगी हैं। जिसके कारण वह कप्तानी के प्रेशर को सह नहीं पा रहे हैं। जाहिर है कि तनाव कम करने के लिए ही धोनी ने कप्तानी से इस्तीफा देने की बात कही। भारत की ओर से अब तक कुल 283 वनडे खेल चुके एमएस धोनी ने 199 मैचों में कप्तानी की। जिसमें टीम इंडिया ने 110 में जीत दर्ज की और 74 में हार झेली। इसके अलावा चार मैच टाई रहे। वहीं 11 मैच अनिर्णित रहे। धोनी का वनडे में सक्सेज प्रतिशत 59.57 है। जो भारतीयों के बीच सर्वश्रेष्ठ है। वहीं वह सबसे ज्यादा वनडे मैचों में कप्तानी करने वाले खिलाड़ी हैं। वह साल 2007 से 2016 तक टीम इंडिया के कप्तान रहे। इस दौरान उन्होंने साल 2011 का विश्व कप टीम इंडिया को जितवाया और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया को विजयी बनाया। धोनी भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तान हैं। जाहिर है कि टीम इंडिया अब विराट कोहली को अपने उत्तराधिकारी के रूप में देख रही है जिन्होंने डेढ़ साल से टेस्ट क्रिकेट में अपनी विजय पताका फहरा रखी है।