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भारतीय टीम © AFP

भारत ने पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड को चारों खाने चित करते हुए नाको चने चबवा दिए। भारतीय टीम ने खेल के हर विभाग में इंग्लैंड को पछाड़ते हुए सीरीज अपने नाम कर ली। इंग्लैंड को सीरीज में मात देना इसलिए भी खास था क्योंकि इससे पहले इंग्लैंड ने भारत को साल 2011, 2012-13 और 2014 में हराया था। लेकिन भारतीय टीम ने इंग्लैंड से इस बार पिछली तीनों सीरीजों में हार का बदला ले लिया और विराट कोहली की कप्तानी में लगातार पांच सीरीज जीतने का गौरव भी हासिल कर लिया। लगातार पांच सीरीज जीतना वाकई काबिलेतारीफ है। लेकिन इसके पीछे क्या वजह है जो भारत इतना शानदार प्रदर्शन कर रहा है?, आखिर पिछली पांच सीरीज में भारत को हार का सामना क्यों नहीं करना पड़ा है?, आखिर क्या है पिछली पांच सीरीज में भारतीय टीम के विजयी रहने का तिलिस्म?, आइए तलाशते हैं इन्हीं सवालों के जवाबों को।

5. टीम का एक इकाई के रूप में खेलना: किसी भी टीम स्पोर्ट्स के लिए ये बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण होता है कि एक इकाई के रूप में टीम कैसा प्रदर्शन कर रही है। जब से विराट कोहली ने टेस्ट टीम की कमान संभाली है तबसे ही भारतीय टीम में नई जान फूंक दी है और टीम के खेल में पहले से ज्यादा निखार आ गया है, टीम में जीत की ललक पैदा हुई है और टीम पहले से ज्यादा आक्रामक होकर क्रिकेट खेल रही है और ये सब सिर्फ इसी कारण मुमकिन हो सका है क्योंकि टीम एक इकाई के रूप में बेहतरीन खेल दिखा रही है। भारतीय टीम की बात करें तो हर खिलाड़ी अपनी भूमिका को बखूबी जानता है और अपनी जिम्मेदारी को ठीक ढंग से निभा रहा है। टीम की बल्लेबाजी तो बेहद मजबूत है ही साथ ही गेंदबाजी में भी भारतीय टीम बेहद ही सशक्त नजर आई है। वहीं फील्डिंग में भी टीम का कोई शानी नहीं है।  भारत बनाम इंग्लैंड पांचवें टेस्ट के आखिरी दिन के लाइव ब्लॉग को पढ़ने के लिए क्लिक करें

विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा, मुरली विजय ने गजब का खेल दिखाया है और अपने विकेट की अहमियत को पहचाना है साथ ही सबने दूसरे बल्लेबाजों का मार्गदर्शन भी किया है। जब भी टीम का विकेट जल्दी गिरता है तो उसके बाद वाला बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन कर टीम को मजबूत स्कोर तक ले जाता है और टीम के ऊपर दबाव नहीं आने देता। वहीं गेंदबाजी में भी मोहम्मद शमी, रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जडेजा ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए विपक्षी टीम के लिए हमेशा खतरा बने रहे। जब कभी किसी गेंदबाज को विकेट नहीं मिलता तो दूसरा गेंदबाज अपने कंधों पर जिम्मेदारी लेकर भारत को विकेट लेकर देता हा। साफ है किसी एक खिलाड़ी पर टीम टिकी नहीं है और टीम का हर खिलाड़ी किसी ना किसी तरीके अपनी उपयोगिता साबित करता है जो हाल के समय में भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।

4. निचले क्रम का रन बनाना: टीम में निचले क्रम की क्या अहमियत होती है ये विराट कोहली और कोच अनिल कुंबले के बयानों से साफ पता चल जाता है। दोनों का ही ये मानना है कि बल्लेबाजी में भी निचले क्रम की बहुत बड़ी भूमिका होती है और निचला क्रम टीम के लिए 100 रन भी जोड़ देता है तो टीम के लिए ये 100 रन काफी अहम होते हैं। कप्तान और कोच के विश्वास को निचले क्रम ने ज़ाया नहीं जाने दिया और जमकर रन बनाए। पिछली पांचों सीरीज में ये देखने को मिला है कि भारतीय टीम के निचले क्रम ने गेंद से तो कमाल दिखाया ही है साथ ही अपने बल्ले से भी कहर ढाया है। रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जडेजा, मोहम्मद शमी, रिद्धिमान साहा, जयंत यादव ने अलग-अलग मौकों पर टीम के लिए बल्ले से अपना योगदान दिया है।

खासकर आर अश्विन, जडेजा, रिद्धिमान साहा और फिर जयंत यादव ने तो किसी मंझे हुए बल्लेबाज की तर्ज पर ही टीम के लिए ब्ललेबाजी की है। इस दौरान अश्विन और जयंत यादव तो शतक लगाने में भी कामयाब रहे हैं। साफ है निचले क्रम ने बल्ले के साथ अपनी जिम्मेदारी को समझा है और बेहतरीन पारियां खेलकर टीम को कई मौकों पर संकट से उबारा है और ये भी भारत के पिछली पांच सीरीज में अजेय रहने का एक बड़ा कारण है। ये भी पढ़ें: रविचंद्रन अश्विन-रवींद्र जडेजा ने तोड़ा 107 साल पुराना रिकॉर्ड

3. नई प्रतिभाओं का चलना: एक टीम के लिए ये बेहतरीन पल होता है जब उसकी टीम के युवा खिलाड़ी अपनी भूमिका को अच्छे तरीके से निभाएं। भारतीय टीम में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। भारतीय के युवा खिलाड़ियों ने गजब का प्रदर्शन किया है और अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे हैं। फिर चाहे वो के एल राहुल हों या फिर करुण नायर, या फिर जयंत यादव हों, या रिद्धिमान साहा। चारों ही युवा खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर साबित किया है कि वो सब लंबी रेस के घोड़े हैं और आने वाले समय में भारत के लिए और अच्छा करने का दम रखते हैं।

सबसे पहले के एल राहुल की बात करते हैं राहुल ने अपने टेस्ट करियर में अब तक 12 मैच खेले हैं, इस दौरान उन्होंने 41 की औसत के साथ 795 रन बनाए हैं। राहुल ने अब तक 4 शतक और एक अर्धशतक लगाया है। वहीं श्रीलंका के खिलाफ राहुल ने तीन मैचों में एक शतक की मदद से 126 रन बनाए थे। तो वेस्टइंजीड के खिलाफ राहुल ने 3 मैचों में ही 78 की शानदार औसत के साथ 236 रन बनाए थे। राहुल ने वेस्टइंडीज दौरे पर एक शतक और एक अर्धशतक लगाया था। इसके बाद न्यूजीलैंडे के खिलाफ एक मैच में उन्होंने 70 रन बनाए थे। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में राहुल ने 3 मैचों में 58 की औसत के साथ 233 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने एक शतक लगाया और उनका सर्वोच्च स्कोर 199 रन रहा है। साफ है राहुल काफी प्रतिभाशाली बल्लेबाज हैं लेकिन अब तक के करियर में वह काफी बार चोटिल हुए हैं जो उनके और टीम के लिए चिंता का विषय है उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में वह अपनी फिटनेस पर काम करेंगे।

वहीं इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट मैच में तिहरा शतक जड़कर कई रिकॉर्ड बनाने वाले करुण नायर की बात करें तो उन्होंने अब तक 3 मैचों में 160 की औसत के साथ 320 रन बनाए हैं, इस दौरान उनका सर्वोच्च स्कोर 303 पर नाबाद रहा है। तीसरे मैच से पहले नायर का प्रदर्शन काफी फीका था लेकिन उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के आखिरी मैच में तिहरा शतक जड़कर ये दिखा दिया कि वह कितने प्रतिभा के धनी हैं और आने वाले समय में टीम के लिए वह बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं। वहीं जयंत यादव की बात करें तो जयंत यादव ने अब तक सिर्फ तीन ही मैच खेले हैं और मौजूदा सीरीज में ही उन्होंने अपने टेस्ट करियर का पदार्पण किया था। लेकिन इतने छोटे से करियर में उन्होंने साबित कर दिया कि वह गेंद और बल्ले दोनों से ही टीम के लिए काफी उपयोगी हैं इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए तीन मैचों में जयंत ने 73 की औसत के साथ 221 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने एक शतक और एक अर्धशतक जड़ा है। जयंत भारत की तरफ से 9वें नंबर पर खेलते हुए शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। ये भी पढ़ें: तिहरे शतक के साथ ही करुण नायर ने बनाए ये पांच बड़े रिकॉर्ड

इसके साथ ही वह गेंद से भी काफी प्रभावशाली हैं, जयंत ने तीन मैचों में अब तक 9 विकेट हासिल किए हैं। साफ है बल्ले और गेंद दोनों से धमाल मचाने वाले जयंत ने भी काफी अच्छा खेल दिखाया है। वहीं रिद्धिमान साहा की बात करें तो साहा ने अब तक अपने करियर में 20 टेस्ट मैच खेले हैं और इस दौरान उन्होंने 28 की औसत के साथ 733 रन बनाए हैं। साहा के नाम एक शतक और चार अर्धशतक हैं। वहीं श्रीलंका के खिलाफ साहा ने 2 मैचों में 43 की औसत के साथ 131 रन बनाए थे। साहा ने श्रीलंका में 2 अर्धशतक लगाए थे। वहीं दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच मैचों की आठ पारियों में 17 की औसत के साथ 119 रन बनाए थे। इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने चार पारियों में 51 की औसत के साथ 205 रन बनाए थे और इस दौरान उन्होंने एक शतक भी लगीयी था।

वहीं कीवी टीम के खिलाफ साहा ने तीन पारियों में 112 की औसत के साथ 112 रन बनाए थे और 2 अर्धशतक लगाए थे। इंग्लैंड के खिलाफ दो मैचों के बाद साहा चोटिल हो गए थे। लकिन साहा भी भारतीय टीम के लिए काफी उपयोगी साबित हुए हैं। साफ है नई प्रतिभाओं ने अपने प्रदर्शन से साबित किया है कि वो टीम के लिए काफी उपयोगी हैं और आने वाले समय में टीम के लिए और अच्छा करेंगे।

2. अश्विन जडेजा का का प्रदर्शन: इन दोनों खिलाड़ियों का भारतीय टीम की जीत में अहम योगदान रहा है। दोनों ने खेल के हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर भारत को जीत दिलाई है। दोनों ने गेंदबाजी से तो कमाल दिखाया ही है साथ ही उन्होंने बल्लेबाजी में भी लाजवाब खेल दिखाते हुए टीम के रनों में भी योगदान दिया है। अश्विन और जडेजा ने अपनी घूमती गेंदों के सामने किसी भी बल्लेबाज को टिकने नहीं दिया और पांचों सीरीज में अपने प्रदर्शन में और ज्यादा निखार लाए। आर अश्विन की बात करें तो अश्विन ने अब तक के करियर में 43 मैचों में 247 विकेट झटके हैं। वहीं जडेजा ने 24 मैचों में 101 विकेट झटके हैं।

अगर भारत लगातार पांच सीरीज जीता है तो इसका श्रेय अश्विन को भी जाता है। अश्विन ने पहले श्रीलंका के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 21 विकेट लिए तो इसके बाद भारत की मेजबानी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली गई 4 मैचों की सीरीज में उन्होंने 31 विकेट झटके। इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई चार मैचों की सीरीज में अश्विन ने कुल 17 विकेट लिए। वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 27 विकेट झटक डाले। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ अब तक वह 28 विकेट झटक चुके हैं। वहीं अश्विन पिछली चार सीरीज (इसमें इंग्लैंड के खलिाफ सीरीज को शामिल नहीं किया गया है) में लगातार चार बार ‘मैन ऑफ द सीरीज’ का खिताब जीत चुके हैं।

वहीं जडेजा के पिछली पांच सीरीज की बात करें तो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली गई सीरीज में जडेजा ने 23 विकेट झटके थे, तो वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने 17 विकेट लिए थे। इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने 27 विकेट, तो इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अब तक 32 विकेट ले लिए थे। साफ है दोनों बल्लेबाजों ने अपनी फिरकी से विरोधी टीमों को खासा परेशान किया है और टीमम को पिछली पांच सीरीज में जीत दिलाई है। साथ ही दोनों खिलाड़ियों ने बल्ले से भी कई मौकों पर टीम की डूबती नाव तो सहारा दिया है। साफ है भारती के विजयी रहने पर इन दो खिलाड़ियों का बहुत बड़ा योगदान है।

1. विराट कोहली की कप्तानी: विराट कोहली की कप्तानी की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। कोहली ने कप्तानी मिलते ही टीम को सबसे पहले एकजुट किया और नए खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए उन्हें अच्छा करने की प्रेरणा दी और इन सब के बाद वह टीम के सामने उदाहरण पेश करते हैं। कप्तानी मिलने के बाद कोहली की बल्लेबाजी में और निखार आ गया है और वह लगातार अच्छा कर रहे हैं। कोहली ने पिछली पांचों सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वहीं वह तीन-तीन दोहरे शतक भी लगा चुके हैं। इंग्लैंड के खिलाफ भी उन्होंने अपने करियार का सर्वोच्च स्कोर 235 रन बनाए थे। कोहली इंग्लैंड के खिलाफ 655 रन ठोक चुके हैं।  ये भी पढ़ें: टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम ने बनाया अपना नया सर्वोच्च स्कोर

वहीं कप्तानी की बात करें तो कोहली की कप्तानी में भारत ने 22* मैचों में से अब तक 13 में जीत, 2 में हार तो 6 मैच ड्रॉ खेले हैं। कोहली ने इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज गंवाई है तो बांग्लादेश के खिलाफ एक मैच की सीरीज को बराबरी पर खेला है। वहीं श्रीलंका को उसी की सरजमीं पर 2-1 से करारी शिकस्त दी। इसके बाद वेस्टइंडीज को उन्हीं की मेजबानी में 2-0 से धूल चटाई। इसके बाद कोहली की कप्तानी में भारत ने अपनी मेजबानी में दक्षिण अफ्रीका को 3-0 से, न्यूजीलैंड को 3-0 से और इंग्लैंड को भी सीरीज में मात दे दी है। साफ है साल के शुरुआत में कोहली भले ही उतने प्रभावशाली ना रहे हों लेकिन साल के अंत तक वह बतौर कप्तान भी काफी परिपक्व नजर आने लगे हैं।

साफ है अगर भारत विजयीरथ पर सवार है तो इसके पीछे ये कारण हैं और अगर टीम इसी तरह खेलती रही तो आने वाले समय में भी वो अजेय ही रहेगी। लेकिन भारत को अभी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलनी है और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज भारत के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगी।