Akhilesh Tripathi
पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2013 मेंआर्यन टीवी (पटना) से हुई, फिर ईनाडु डिजीटल (ईटीवी हैदराबाद) में लगभग ...Read More
Written by Akhilesh Tripathi
Last Updated on - January 4, 2026 12:56 PM IST

विजय हजारे ट्रॉफी 2025-2026 सीजन के पहले मैच में 22 शतक लगे, टूर्नामेंट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब एक दिन में 22 शतक लगे. वहीं शनिवार को यानि एक दिन पहले इस टूर्नामेंट के पांचवें दिन के मैच में 18 बल्लेबाजों ने शतक लगाया. इस सीजन अब तक कुल 92 शतक लग चुके हैं. बिहार की टीम ने विजय हजारे ट्रॉफी में 574 रन बनाकर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला, तो वहीं कर्नाटक की टीम ने झारखंड के खिलाफ 413 रनों का पीछा किया, जो विजय हजारे ट्रॉफी का सबसे सफल रन चेज है.
लिस्ट ए या वनडे क्रिकेट में एक समय 300 रनों का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण माना जाता था,वहीं अब 400 से अधिक के स्कोर सामान्य हो गए हैं. बीसीसीआई के घरेलू क्रिकेट में बन रहे यह रन बैटिंग-फ्रेंडली पिचों का नतीजा है या फिर यह खिलाड़ियों की प्रतिभा है. क्या बीसीसीआई के घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगा रहे यह खिलाड़ी इंटरनेशनल लेवल पर अपनी फॉर्म बरकरार रख पाएंगे, यह कुछ सवाल है जो उठने लगे हैं.
विजय हजारे ट्रॉफी में कई मैचों में पिचें सपाट और बल्लेबाजी के लिए अनुकूल पाई गई हैं, जहां गेंदबाजों के लिए कुछ भी नहीं हैं. इन पिचों पर असामान्य रूप से बड़े स्कोर दिख रहे हैं. प्लेट ग्रुप की टीमों के बीच कमजोर गेंदबाजी आक्रमणों के खिलाफ बड़े स्कोर आसान हो जाते हैं. वहीं एलिट ग्रुप में कुछ मैचों को छोड़कर गेंदबाजों के लिए कुछ नहीं है. इन पिचों पर बल्लेबाज आसानी से रन बनाते नजर आते हैं. कर्नाटक के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल तो पिछले पांच मैच में चार शतक जड़ चुके हैं. उनके अलावा विदर्भ के बल्लेबाज अमन मोखाडे और हिमाचल प्रदेश के पुखराज मान ने तीन-तीन शतक लगाए हैं.
मॉर्डन डे क्रिकेट में आज बल्लेबाज अधिक आक्रामक हो गए हैं. शनिवार को खेले गए मैच में हार्दिक पांड्या ने विदर्भ के खिलाफ 66 से 100 तक पहुंचने में मात्र छह गेंदें लीं. भारत में आईपीएल जैसे टी20 फॉर्मेट ने बल्लेबाजों को 360 डिग्री शॉट्स सिखाए,जो घरेलू टूर्नामेंट में नजर आता है. इसके अलावा अब घरेलू स्तर पर खिलाड़ी फिटनेस, तकनीक पर भी अधिक ध्यान देते हैं, जो कि शुभ संकेत है.
भारत के मुकाबले इंटरनेशनल लेवल पर परिस्थितियां अलग होती है. वहां बैटर्स को अलग स्विंग और सीम मूवमेंट का सामना करना पड़ता है. इंग्लैंड में स्विंग, वहीं ऑस्ट्रेलिया में बाउंस बल्लेबाजों को काफी परेशान करती है, ऐसे में घरेलू क्रिकेट के हीरो क्या वहां अपनी फॉर्म बरकरार रख पाएंगे.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाज विश्व स्तरीय होते हैं और हर मैच चुनौतीपूर्ण होता है. हालांकि कई ऐसे उदाहरण भी हैं, जो भारतीय पिचों पर सफल होने के बाद इंटरनेशनल लेवल पर भी छा गए, जिसमें शुभमन गिल, रुतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी हैं.
गिल ने विजय हजारे में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में एंट्री ली और गायकवाड़ ने आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में रन बनाने के बाद ऑस्ट्रेलिया में शतक जड़े. हालांकि घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने वाले कई ऐसे खिलाड़ी भी हैं,जो इंटरनेशनल प्रेशर को झेल नहीं पाए. करुण नायर इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं, जिन्होंने पिछले सीजन घरेलू क्रिकेट में खूब रन बनाए, मगर इंग्लैंड दौरे पर रन बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आए. इसके अलावा आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने वाले साई सुदर्शन के साथ भी ऐसा ही दिखा. अभिमन्यु ईश्वरन और प्रियांक पंचाल जैसे खिलाड़ी भी इसी लिस्ट में हैं.
भारत के कई पूर्व क्रिकेटर का मानना है कि ऐसी पिचें गेंदबाजों के लिए कब्रगाह है. पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने मानना है कि घरेलू क्रिकेट केवल बल्लेबाज पैदा कर रहा है जबकि गेंदबाजों को नजरअंदाज किया जा रहा है.विजय हजारे ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट को भारतीय क्रिकेट की नर्सरी माना जाता है, जहां खिलाड़ियों के टैलेंट के साथ- साथ विपरीत परिस्थितियों में भी उन्हें खुद को मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए तैयार किया जाना चाहिए. इसके अलावा बीसीसीआई को गेंदबाजों के विकास और संतुलित पिचों पर ध्यान देना चाहिए, वरना घरेलू क्रिकेट सिर्फ और सिर्फ बैटर्स शो बनकर रह जाएगा.
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