क्रिकेट का नया सुपरस्टार ए बी डीविलियर्स
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क्रिकेट की एक सदी का अंत हो चुका है। सचिन तेंदुलकर, रिकी पोंटिंग, जाक कैलिस जैसे महारथी क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं। तो सवाल उठना लाजमी है कि क्रिकेट का नया सुपरस्टार कौन है? वर्तमान क्रिकेट में कौन सा ऐसा खिलाड़ी है जो क्रिकेट का नया सुपरस्टार बन रहा है? मौजूदा समय में हाशिम अमला, विराट कोहली, जो रूट, स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर, केन विलियमसन जैसे खिलाड़ी नाम कमा रहे हैं। लेकिन ए बी डीविलियर्स एक अलग जोन के बल्लेबाज नजर आते हैं। इसका कारण यह है कि वर्तमान समय में जिस तरह की क्रिकेट डीविलियर्स खेल रहे हैं, क्रिकेट के नए सुपरस्टार के लिए उनके अलावा किसी और का नाम शायद ही किसी के दिमाग में आए। सचिन के समय में पौंटिंग और लारा जैसे बल्लेबाज थे जिनके साथ उनकी तुलना की जाती थी। लेकिन डीविलियर्स अपने समय के किसी भी खिलाड़ी से मीलों आगे हैं।

AB De Villiers superstar of a new generation
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सन् 2004 में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरूआत करने वाले डीविलियर्स क्रिकेट के सम्पूर्ण बल्लेबाज के रूप में खुद को स्थापित चुके हैं। रिकॉर्ड बनाना और तोड़ना तो उनके लिए जैसे बच्चों का खेल बन गया है, उन्होने वनडे क्रिकेट में सबसे तेज 50,100 और 150 रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। डीविलियर्स वनडे क्रिकेट में 50 से ज्यादा की औसत और 100 से ज्यादा की स्ट्राइक रेट रखने वाले इकलौते बल्लेबाज हैं। डीविलियर्स किस तेजी के साथ रन बनाते है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 25 ओवर के बाद बल्लेबाजी के लिए उतरने के बाद डीविलियर्स ने 5 शतक जमाएं है इस सूची में अगला नाम विराट कोहली का है, कोहली ने 2 बार यह कारनामा किया है।

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डीविलियर्स की वनडे सफलता के कारण उनके टेस्ट रिकॉर्ड पर बहुत कम लोग ही नजर डालते है। जबकि टेस्ट क्रिकेट में डीविलियर्स और भी लाजवाब रहे हैं। अपने 100वां टेस्ट खेलने तक डीविलियर्स 21 शतकों समेत 7770 रन बना चुके हैं और उनका करियर औसत 52.14 है। लेकिन इतना बेहतरीन आंकड़ा भी ‘मिस्टर 360’ की क्रिकेट का सही मूल्यांकन नही करता। इसका कारण है कि डीविलियर्स के खेल में 2008 के बाद गजब का सुधार देखने को मिला। डीविलियर्स के टेस्ट करियर को दो भागो में देखा जा सकता है, पहला 2004 से 2008 और दूसरा 2008 के बाद। 2004 से 2008 की शुरूआत तक डीविलियर्स का टेस्ट और वनडे औसत 40 के नीचे था। लेकिन 2008 की शुरूआत के बाद डीविलियर्स ने टेस्ट क्रिकेट में 61.67 की औसत से रन बनाएं है जो कि सचिन, संगाकारा, अमला जैसे बल्लेबाजों से कही बेहतर है।

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2008 में ऐसा क्या हुआ जो डीविलियर्स की गेम में इतना बड़ा बदलाव आया। मिकी आर्थर ने अपनी किताब ‘टॉकिंग द मिकी’ में लिखा है कि 2008 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में डीविलियर्स साथी खिलाड़ी प्रिंस के साथ विकेट पर जम चुके थे लेकिन डीविलियर्स एक लापरवाही भरा शॉट खेलकर आउट हो गए जिससे साउथ अफ्रीका को फॉलोआन खेलना पड़ा। मैच के बाद कप्तान ग्रीम स्मिथ और मिकी आर्थर ने डीविलियर्स से बात की। स्मिथ ने कहा तुम अपनी प्रतिभा और टीम में अपनी पोजीशन के साथ न्याय नहीं कर रहे हो, जबकि मिकी आर्थर ने डीविलियर्स को एक बल्लेबाज के रूप में उनकी जिम्मेदारियों के बारे में बताया।

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अगले टेस्ट में जब डीविलियर्स बल्लेबाजी करने उतरे तो टीम 143 रन पर 4 विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी। इस मैच में जब डीविलियर्स पवेलियन आए तो वह 174 रन बना चुके थे। इसके बाद डीविलियर्स ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और टेस्ट और वनडे में 60 से ज्यादा की औसत से रन बनाएं। डीविलियर्स भी इस मैच को अपने करियर का टर्निंग प्वाइंट मानते हैं। 2008 के बाद ना सिर्फ डीविलियर्स की औसत में सुधार दिखा बल्कि उनके शतक लगाने के आंकड़ें में भी सुधार आया। 2004 से 2007 तक डीविलियर्स ने 33 टेस्ट की 60 पारियों में सिर्फ 3 शतक लगाएं थे। यानी हर शतक के लिए 20 पारी लेकिन 2008 के बाद उनका यह आंकड़ा सुधर कर 5.8 पारी पर आ गया।

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बहुत से समीक्षकों ने डीविलियर्स के बल्लेबाजी करने के अंदाज के कारण टेस्ट में उनकी उपयोगिता पर सवाल उठाएं। लेकिन डीविलियर्स ने यहां भी अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया। डीविलियर्स ने एडिलेड में मैच बचाने के लिए खेली गई 220 गेंदों में 33 रन की पारी और भारत के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में 297 गेंदों में 43 रन की पारी से ये साबित किया वो मैच की परिस्थिति के अनुसार खुद की बल्लेबाजी को बदल सकते हैं। टीम को जरूरत हो तो वह 338 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी कर सकते है तो मैच बचाने के लिए 14-15 की स्ट्राइक रेट से भी बल्लेबाजी कर सकते है। [इसे भी पढ़ें-]

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सेंचुरियन टेस्ट 2013 में जब मिशेल जानसन कहर बरपा रहे थे कोई भी बल्लेबाज उनकी गेंदों के सामने टीक नहीं पा रहा था। तब डीविलियर्स ने 91 रनों की पारी खेलकर साबित किया था कि वो किसी भी गेंदबाज के खिलाफ बिना डरे खेल सकते है। जानसन ने भी क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद डीविलियर्स को सबसे कठिन बल्लेबाज माना और इस टेस्ट में उनकी 91 रनों की पारी को टेस्ट क्रिकेट की बेहतरीन पारियों में से एक बताया। अगर बात 2014 और 2015 की करे तो कोई भी बल्लेबाज डीविलियर्स के सामने कही नहीं टिकता। डीविलियर्स ने इस दौरान 31 गेंदों में शतक बनाया तो 38वें ओवर में बल्लेबाजी करने के लिए उतरने के बाद 149 रन बना दिये।

डीविलियर्स निर्विवाद रूप से क्रिकेट के नए युग के सुपरस्टार हैं। डीविलियर्स अपने खेल से क्रिकेट को 40 साल आगे ले गए हैं। जिस तरह के इनोवेशन वो अपने शाट्स में करते दिख रहे है वो क्रिकेट का भविष्य है, क्योंकि मैक्सवेल जैसे बहुत से युवा बल्लेबाज उनके नक्शेकदम पर चल रहे है। कुछ समय बाद क्रिकेट कोच युवा बल्लेबाजों को वनडे और टेस्ट स्टाइल की क्रिकेट की जगह ए.बी.डीविलियर्स स्टाइल की यानी ऑल फॉरमेट स्टाइल क्रिकेट सिखाते दिखेंगे।