पाकिस्तान के खिलाफ सचिन ने बेहतरीन गेंदबाजी की थी © Getty Images
पाकिस्तान के खिलाफ सचिन ने बेहतरीन गेंदबाजी की थी © Getty Images

साल था 2005, महीना अप्रैल का और तारीख थी दो। पाकिस्तान की टीम भारत के दौरे पर थी। 3 मैचों की टेस्ट सीरीज एक-एक की बराबरी पर खत्म हुई थी और बारी थी छह मैचों की वनडे सीरीज की। सीरीज का पहला मैच कोच्चि के नेहरू स्टेडियम में खेला गया। भारत और पाकिस्तान के बीच वैसे भी मैदान पर काफी तनातनी देखने को मिलती है। जब दोनों देशों के बीच मैच होता है तो वह सिर्फ मैच ही नहीं रह जाता बल्कि जुनूनियत की सारी हदों को तोड़ देता है। सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है। लोग दफ्तर से छुट्टी ले लेते हैं और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मैच से लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं।

बिल्कुल ऐसा ही हुआ था 2 अप्रैल को भी। भारत-पाकिस्तान के बीच कोच्चि में पहला वनडे था। भारत के कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। सितारों से सजी भारतीय टीम बल्लेबाजी के लिए उतरी। सलामी बल्लेबाज के तौर पर सचिन और सहवाग की जोड़ी मैदान पर आई। पहला ओवर मोहम्मद समी ने सहवाग को मेडन फेंका और कोई रन बनाने का मौका नहीं दिया। दूसरे ओवर में सचिन ने नावेद-उल-हसन की तीसरी गेंद को बाउंड्री के बाहर भेज दिया और चौके से खाता खोला। लेकिन नावेद-उल-हसन ने अगली गेंद पर जबर्दस्त वापसी करते हुए सचिन को यूसुफ युहाना ( अब मोहम्मद यूसुफ) के हाथों कैच आउट करा दिया। सचिन काफी गुस्से में थे और साथ ही खुद से नाखुश भी। ये भी पढ़ें: पांच बेहतरीन बल्लेबाज जिन्होंने गेंदबाजी में भी दिखाया कमाल

अभी भारत सचिन के विकेट का अफसोस मना ही रहा था कि अगली ही गेंद पर भारतीय कप्तान सौरव गांगुली भी पवेलिन लौट गए। भारत के 2 बड़े विकेट मात्र चार रनों पर गिर चुके थे। पाकिस्तान की टीम जश्न मना रही थी और भारतीय दर्शक अफसोस। इसके बाद बल्लेबाजी करने क्रीज पर आए मिस्टर भरोसेमंद ने टीम के भरोसे को तोड़ा नहीं और सहवाग के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाने लगे। सहवाग तेज-तर्रार पारी खेल रहे थे मानो सचिन-सौरव के आउट होने का बदला निकाल रहे हों। दोनों ही बल्लेबाजों ने बेहतरीन खेल का मुजाहिरा पेश करते हुए भारत की स्थिति मजबूत कर दी और दोनों ने अपने-अपने शतक ठोक डाले। सहवाग ने सिर्फ 95 गेंदों में 9 चौकों और तीन छक्कों की मदद से 108 रन ठोक डाले। वहीं राहुल द्रविड़ ने भी 139 गेंदों में शानदार 104 रन बनाए। लेकिन इन दोनों के आउट होने के बाद कोई और बल्लेबाज कुछ खास नहीं कर सका और टीम ने 50 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 281 रन का स्कोर खड़ा कर दिया। पाकिस्तान के सामने जीत के लिए 282 रनों की चुनौती थी।

पाक की तरफ से ओपनिंग करने आए सलमान बट और कामरान अकमल। बट ने बालाजी के पहले ही ओवर में दो चौके जड़ दिए कुल 10 रन बटोरे। इसके बाद मैच के चौथे ओवर में बट ने जहीर के ओवर में फिर दो चौके जमा दिए। सलमान बट औक अकमल की जोड़ी खतरनाक होती जा रही थी। दोनों ही तेज गति से रन बना रहे थे। ऐसे में बालाजी ने मैच के सातवें ओवर में कामरान अकमल को आउट कर भारत को पहली सफलता दिला दी, पाक का पहला विकेट 45 रनों पर गिरा था। दूसरे छोर से गांगुली ने गेंदबाजी में तब्दीली की और गेंद आशीष नेहरा के हाथों में थमा दी। नेहरी ने पहली पांच गेंदों पर कोई रन नहीं दिया और अंतिम गेंद पर सलमान बट को गांगुली के हाथों कैच आउट करा भारत को जल्द ही दूसरी सफलता दिला दी। पाकिस्तान का स्कोर 49/2 हो चुका था। इसके अगले ही ओवर में बालाजी ने फिर कमाल दिखाया और शोयब मलिक को भी पवेलियन भेज दिया। और पाक का स्कोर 49/3 हो गया। इसके बाद मैदान पर आए मोहम्मद यूसुफ को भी जहीर ने आउट कर भारत को जीत की उम्मीद दिला दी। लेकिन इसके बाद कप्तान इंजमाम उल हक और मोहम्मह हफीज क्रीज पर जम गए और पारी को संभालने लगे।  ये भी पढ़ें: हार्दिक पंड्या की टेस्ट टीम में क्यों नहीं बनती जगह?

इसी बीच सौरव गांगुली ने गेंद सचिन के हाथों में सौंपी। सचिन बल्लेबाजी में कुछ न कर पाने के कारण काफी गुस्से में थे और मानो वह इसी मौके की तलाश में थे। सचिन ने शुरुआती तीन ओवरों में कुछ नहीं किया। लेकिन चौथे ओवर अंतिम गेंद पर उन्होंने इंजमाम उल हक का बड़ा विकेट हासिल कर लिया। और भारत को जबर्दस्त सफलता दिला दी। इसके बाद सचिन ने अपने छठे ओवर में ओब्दुल रज्जाक को आउट कर मैच में भारत की पकड़ मजबूत कर दी।

हफीज के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे थे अफरीदी। अफरीदी काफी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। लेकिन सचिन के आठवें ओवर में अफरीदी भी गच्चा खा गए और कैच आउट होकर पवेलियन लौट गए, सचिन की खुशी का ठिकाना नहीं था। सचिन यहीं नहीं रुके उन्होंने अपने अगले ही ओवर में मोहम्मद शमी का विकेट निकालकर भारत की जीत तय कर दी। सचिन ने अब तक 4 विकेट झटक लिए थे और उनका एक ही ओवर बाकी था। लेकिन कुछ और ही सोचकर गेंद थामने वाले सचिन ने अपने आखिरी ओवर में भी सबसे खतरनाक दिख रहे मोहम्मद हफीज को आउट कर पाक टीम की आखिरी उम्मीद को भी अपने आखिरी ओवर में ले उडे़। सचिन ने अपने 10 ओवरों में 50 रन देकर पांच खिलाड़ियों को आउट किया था और बल्ले से अच्छा ना कर पाने बदला उन्होंने गेंद से ले लिया था। भारत ने अंत में सचिन के पांच विकेटों की बदौलत मैच को 87 रनों से जीत लिया था और सीरीज में 1-0 की अजेय बढ़त बना ली थी।  ये भी पढ़ें: टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के इन पांच रिकॉर्डों को तोड़ सकते हैं ऐलेस्टर कुक