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ऑस्ट्रलियाई बल्लेबाज बेलिंडा क्लार्क ने 1991 से लेकर 2005 तक क्रिकेट खेला © Getty Images

अगर आप यह मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट का पहला दोहरा शतक बनाने वाले सचिन तेंदुलकर पहले क्रिकेटर हैं तो आप गलत हैं, क्योंकि इस कारनामें को एक दूसरे क्रिकेटर ने उनसे 13 साल पहले साल 1997 में मुकम्मल किया था। इस क्रिकेटर का नाम बेलिंडा क्लार्क। जो एक महिला क्रिकेटर हैं। क्लार्क ने डेनमार्क के खिलाफ खेलते हुए 155 गेंदों में 229 रनों की पारी खेली थी। इस तरह वह विश्व क्रिकेट में पहला दोहरा शतक लगाने वाली पहली बल्लेबाज बनीं। सचिन तेंदुलकर पुरुष क्रिकेट में पहला दोहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने जिसे उन्होंने साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध मुकम्मल किया था। ऑस्ट्रेलिया महिला टीम की कप्तान रहीं बेलिंडा क्लार्क 1997 में अपनी टीम ऑस्ट्रेलिया के साथ मुंबई में खेले जा रहे आईसीसी ‘विमन वर्ल्डकप’ में शामिल हुई थीं। ऑस्ट्रेलिया टीम की कप्तान क्लार्क ने डेनमार्क के खिलाफ 155 गेंदों में 229 बनाए। उनकी इस तूफानी पारी की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने 412 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया था।

गैर तर्जुबे वाले डेनमार्क के गेंदबाजी आक्रमण को जिस तरह से क्लार्क ने नेस्तनाबूद किया था वह शायद उन्हें जिंदगी भर याद रहेगा। बाद में हुए साक्षात्कार में क्लार्क ने बताया कि वह इस मैच में पूरे 50 ओवर बल्लेबाजी करना चाहती थीं ताकि वह भारतीय परिस्थितियों के आधार पर अपने आपको ढाल सकें। उन्होंने क्रिकेटकंट्री को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उनके दिमाग कोई बड़ा स्कोर खड़ा करने की योजना नहीं थी बल्कि वह अपने ध्यान को परखना चाहती थी ताकि वह गेंद को बढ़िया तरीके से हिट कर सकें।

अंपायर मदन सिंह जो उस मैच की आधिकारिक रूप से जिम्मेदारी लिए हुए थे उन्होंने उनकी इस पारी को एक बेहतरीन पारी बताया था। उन्होंने बताया कि वह अपने स्ट्रोक बहुत आत्म विश्वास के साथ खेल रही थी। उन्होंने आगे बताते हुए कहा था, ‘मैच के बाद जब मैं विपक्षी टीम के कुछ खिलाड़ियों से बातचीत कर रहा था तो कुछ खिलाड़ी इतने ज्यादा रन देने के कारण शर्मिंदगी महसूस कर रहे थे। मैंने उनसे कहा कि इसमें शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं है, क्योंकि बेलिंडा ने बहुत अच्छी बल्लेबाजी की।

हालांकि डेनमार्क की बल्लेबाज भी ऑस्ट्रेलिया के खतरनाक गेंदबाजी आक्रमण का सामना नहीं कर सके और मात्र 49 रनों पर ढेर हो गए जो खुद क्लार्क के व्यक्तिगत स्कोर से 1/5 गुना कम था। उस समय 27 साल की क्लार्क ने अपनी इस यादगार पारी में 22 चौके लगाए थे और इस दौरान उन्होंने दो बल्लेबाजों के साथ शतकीय साझेदारी भी निभाई जिसमें कैइटली(60) और रॉल्टन(64) शामिल हैं।

ऑस्ट्रेलिया की युवा कप्तान क्लार्क ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी टीम की ओर से बेहतरीन प्रदर्शन किया और टीम को फाइनल तक पहुंचाया। फाइनल में ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला न्यूजीलैंड से हुआ। ईडेन गार्डन में क्लार्क ने 52 रनों की बेहतरीन पारी खेली और ऑस्ट्रेलिया को टूर्नामेंट में विजयी बनाया। क्लार्क ने ऑस्ट्रेलिया की ओर से साल 1991 में पर्दापण किया था और 1994 में वह टीम की कप्तान बनी। अपनी कप्तानी में उन्होंने दो विश्व कप ऑस्ट्रेलिया के नाम किए।

क्लार्क ने साल 2005 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। भले ही पुरुष क्रिकेटरों ग्रेग चैपल, एलन बॉर्डर, और स्टीव वॉ के नीचे बेलिंडा क्लार्क का नाम दब गया हो, लेकिन इसमें कोई संशय नहीं है कि बेलिंडा क्लार्क एक बेहतरीन क्रिकेटर थीं। यह बहुत ही कम लोग जानते हैं कि उनके बेहतरीन प्रदर्शन के कारण उन्हें साल 1998 में विज़डन ऑस्ट्रेलिया क्रिकेटर के अवॉर्ड से नवाजा गया था। इसके अलावा वह विमन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की सीईओ भी रहीं।

मुंबई में क्लार्क के द्वारा खेली गई बेहतरीन पारी उनके चमकदार करियर की एक छाप थी जो हमेशा-हमेशा के लिए क्रिकेट पटल पर छप गया। लेकिन यह दुख की बात है कि उनके द्वारा बनाया गया बेहतरीन रिकॉर्ड पुरुष क्रिकेटरों की चमक के आगे फीका पड़ गया। शायद यह पुरुष वर्चस्व है जो महिला क्रिकेटर को तवज्जो नहीं देता।

इस सबके बावजूद क्लार्क को सचिन, सहवाग के क्लब में शामिल होकर खुश हैं। वह कहती हैं, ‘जब सचिन और सहवाग ने 200 के स्कोर बनाए तब मैं बहुत खुश थी। यह इस ओर इशारा करता है कि खेल तेजी से बदल रहा है।’