महेंद्र सिंह धोनी ने वनडे और टी20 की कप्तानी से हटने का फैसला किया है।
महेंद्र सिंह धोनी ने वनडे और टी20 की कप्तानी से हटने का फैसला किया है।

महेंद्र सिंह धोनी ने 4 जनवरी 2017 की रात अचानक भारतीय वनडे टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया था। धोनी के इस फैसले से भारतीय क्रिकेट फैंस को बड़ा झटका लगा है। हालांकि यह पहला मौका नहीं जब धोनी ने सभी को इस तरह चौंका दिया हो। वह इस काम में माहिर हैं और पहले भी कई बार वह ऐसा कर चुके हैं, धोनी ने टेस्ट से संन्यास लेने का फैसला भी इसी तरह अचानक लिया था। उनके टेस्ट छोड़ने से कहीं ज्यादा धक्का लोगों को धोनी के इस तरह कप्तानी छोड़ने से लगा है। ये भी पढ़ें:इंग्लैंड के खिलाफ वनडे में एक भी शतक नहीं लगा पाए हैं महेंद्र सिंह धोनी

धोनी ने भारतीय क्रिकेट में साल 2004 में पर्दापण किया था। चिट्टागॉन्ग में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया था। 23 दिसंबर को खेले गए इस मैच में धोनी सातवें स्थान पर बल्लेबाजी करने आए थे और शून्य पर रन आउट हो गए थे। यह बात धोनी के हर फैन को याद होगी ही। धोनी ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। झारखंड के छोटे से शहर रांची से जो लड़का भारतीय टीम में खेलने का सपना लेकर निकला था वह एक दिन भारत का कप्तान बनेगा यह शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। धोनी ने नौ साल तक भारतीय टीम के कप्तान का पद संभाला है और अब उन्होंने इससे हटने का फैसला लिया है तो शायद इसके पीछे कोई वजह जरूर होगी। आज हम यहां बात करेंगे बतौर कप्तान धोनी के करियर के पांच खास पलों की जब उन्होंने दर्शकों को अचंभित तो किया लेकिन खुशी से। ये भी पढ़ें: महेंद्र सिंह धोनी ने आज के दिन लिया था टेस्ट क्रिकेट से संन्यास

2007 टी20 विश्वकप: 2007 वनडे विश्वकप हारने के बाद आईसीसी ने टी20 विश्वकप की घोषणा की। भारतीय टीम एक नए प्रारूप में एक युवा टीम के साथ उतरने वाली थी और इस टीम का नेतृत्व कर रहे थे महेंद्र सिंह धोनी। धोनी के अलावा उस समय टीम में कई सीनियर खिलाड़ी थे लेकिन धोनी को कप्तानी इसलिए दी गई क्योंकि किसी को भी इस नए प्रारूप से कुछ ज्यादा उम्मीद नहीं थी। भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट में प्रवेश किया और पहली बार धोनी की नेतृत्व क्षमता का परिचय पूरे विश्व को मिला। भारत को 13 सितंबर को स्कॉटलैंड के साथ पहले मैच से टूर्नामेंट में अपने सफर की शुरुआत करनी थी लेकिन यह मैच बारिश के कारण रद्द हो गया। भारत ने इस टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेला चिर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के साथ। 14 सितंबर को डरबन में खेले गए इस मैच को लेकर दर्शकों में जितना उत्साह था उतना ही रोमांचक यह मैच भी रहा। धोनी ने इस मैच में 33 रन बनाए और यह मैच टाई रहा। जिसके बाद हार जीते के फैस के लिए एक बॉल आउट ओवर खेला गया जिसमें दोनों टीमों को एक ओवर डालकर विकेट गिराना था जो टीम ज्यादा बार विकेट गिराने में कामयाब हो जाती वह विजेता होती।

भारत ने 3-0 से बॉल आउट जीता। इसके बाद भारत ने केवल न्यूजीलैंड से एक मैच हारा और फिर लगातार जीतकर भारत सेमीफाइलन में पहुंचा जहां उसकी भिड़ंत ऑस्ट्रेलिया से हुई। भारत ने युवराज सिंह की मदद से यह मैच जीतकर फाइनल में जगह बनाई। वहीं पाकिस्तान टीम ने भी सेमीफाइनल जीतकर फाइनल मैच में जगह पक्की कर ली। 24 सितंबर को जोहान्सबर्ग में हुआ यह मुकाबला हर क्रिकेट प्रेमी की याद में आज भी ताजा है। यही वह मौका था जब पहली बार कप्तान धोनी की एक झलक दुनिया ने देखी थी। आखिरी ओवर में जब पाकिस्तान को जीत के लिए 12 रन बनाने थे तब धोनी ने हरभजन सिंह या इरफान पठान को ओवर दे सकते थे शायद क्रिकेट जानकारों का भी यही सोचना था लेकिन धोनी ने कुछ ऐसा किया जो किसी ने नहीं सोचा होगा। उन्होंने जोगिंदर शर्मा को गेंद थमाई और पहली ही गेंद पर कप्तान मिसबाह ने छक्का जड़ दिया। सभी को लगा कि धोनी इस गलत फैसले की सजा भुगतेगें। अब चार गेदों पर छह रन बनाने थे जो ज्यादा मुश्किल नहीं था लेकिन अगली गेंद से पहले धोनी जोगिंदर के पास गए और उनसे बात की। जिसके बाद अगली ही गेंद पर मिसबाह कैच आउट हुए श्रीसंत के द्वारा और भारत ने पहला टी20 विश्वकप जीता। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह एक खूबसूरत पल था और यहीं से सभी को धोनी में भारतीय टीम का भविष्य दिखाई दिया।  ये भी पढ़ें:टेस्ट से संन्यास लेने के बाद भी भारत बनाम इंग्लैंड सीरीज पर नज़र बनाए हुए हैं महेंद्र सिंह धोनी

2008 कॉमनवेल्थ ट्राई सीरीज: भारतीय टीम का कप्तान बनने के बाद धोनी के केवल घरेलू मैदान पर ही नहीं बल्कि विदेशी धरती पर ही भारत को कई खिताब जिताए हैं उनमें से ही एक है साल 2008 की कॉमनवेल्थ बैंक ट्राई सीरीज। ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और भारत के बीच यह सीरीज खेली गई थी। ऑस्ट्रेलिया में आयोजित इस टूर्नामेंट में धोनी ने बढ़िया बल्लेबाजी की थी। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ ब्रिसबेन में नाबाद 88 रनों की पारी खेली थी। साथ ही ए़डिलेड में भी अर्धशतक जड़ा था। भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दोनों फाइनल मैच जीतकर खिताब पर कब्जा किया। पहले फाइनल में भारत ने रनों का पीछा करते हुए छह विकेट से जीत हासिल की थी। वहीं दूसरा फाइनल भारत ने 9 रन से जीता था। पहले फाइनल में सचिन तेंदुलकर ने शानदार शतक जड़ा था और धोनी ने केवल 15 रन बनाए थे लेकिन अंतिम ओवर में फिनिशर की भूमिका अदा करते हुए उन्होंने एक बार फिर भारत के लिए विनिंग शॉट लगाया। धोनी की यही खास बात है जो उन्हें सबसे अलग करती है वह कभी अपने रनों के बारें में नहीं सोचते हैं उनके लिए सिर्फ जीत मायने रखती है। ये भी पढ़ें:आज के दिन महेंद्र सिंह धोनी ने खेला था अपना पहला टेस्ट मैच

2010 एशिया कप फाइनल: पहला आईसीसी टी20 विश्वकप जीतने के बाद भारतीय टीम के हौसले बुलंद थे। वहीं अगले साल भारत को एशिया कप में भाग लेना था और इस बार भी कप्तानी का जिम्मा महेंद्र सिंह धोनी को सौंपा गया। भारत ने यहां भी बढ़िया प्रदर्शन किया और फाइनल में जगहल बनाई। फाइनल मुकाबले में भारत का सामना होने वाला था पड़ोसी देश श्रीलंका से। कराची में खेले गए इस मैच में भारत को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। श्रीलंका के 273 रनों के जवाब में भारत केलव 173 रन बना सका। हालांकि वीरेंद्र सहवाग ने 60 और धोनी ने 49 रन बनाए लेकिन और कोई बल्लेबाज 20 का आंकड़ा पार नहीं कर सका और भारत 100 रन से एशिया कप हार गया। हार बड़ी थी और उसका एहसास भी लेकिन श्रीलंका टीम को पता नहीं था इस जीत की उसे जल्द ही बहुत बड़ी कीमत चुकानी थी। साल 2010 में एक बार फिर एशिया कप शुरु हुआ। भारत ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाफ जीत हासिल की लेकिन एक बार फिर श्रीलंका ने ग्रुप मैच में भारत को मात दी। संयोग से एक बार फिर भारत और श्रीलंका ही फाइनल मुकाबले में आमने सामने थे लेकिन इस बार भारत को हार मंजूर नहीं थी। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 268 रन बनाए वहीं धोनी ने 38 रनों की पारी खेली। जवाब में श्रीलंका टीम केवल 187 रनों पर ऑल आउट हो गई। भारत ने अपनी पहली दोनों हार का बदला ले लिया और एशिया कप पर कब्जा किया। ये भी पढ़ें:जब महेंद्र सिंह धोनी ने सचिन तेंदुलकर के साथ मिलकर उड़ाई शाहिद अफरीदी की गिल्लियां

2011 विश्वकप: भारतीय टीम के 2007 विश्वकप हारने की यादें अब भी धोनी के जहन में थी। हालांकि भारत ने टी20 विश्वकप जीत लिया था लेकिन 1983 के विश्वकप के बाद भारत दोबार इस खिताब को हासिल नहीं कर पाया था। साल 2011 का वनडे विश्वकप भारत में आयोजित होना था जो सचिन तेंदुलकर का आखिरी विश्वकप होने वाला था। भारतीय टीम को इस बार 28 साल का यह इंतजार खत्म करना था और इस काम को पूरा किया कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने। भारत ने इस टूर्नामेंट में केवल एक ही मैच हारा था। सफर खूबसूरत था अब बस मंजिल का इंतजार था। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल मैच जीता और फाइनल के लिए क्वालिफाई किया। इस मैच के नायक थे मास्टर ब्लॉस्टर जिन्हें अब केवल फाइनल का इंतजार था। आखिरकार 2 अप्रैल 2011 को वह पल आया जिसका इंतजार पूरा हिंदुस्तान कर रहा था। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका के खिलाफ अंतिम मुकाबले के लिए भारतीय टीम उतरी। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 274 रनों का स्कोर खड़ा कर दिया। भारत तो जीत के लिए 275 रनों की जरूरत थी। भारत के सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के शून्य पर आउट होते ही दर्शकों को बड़ा झटका लगा लेकिन इसके बाद गौतम गंभीर ने 97 रन बनाकर भारतीय पारी को संभाला लेकिन वह शतक से चूक गए। विराट कोहली के आउट होने के बाद युवराज सिंह की जगह जब कप्तान धोनी मैदान पर आए तो सभी असमंजस में पड़ गए। धोनी को पता था कि इस समय टीम को उनकी जरूरत है और एक कप्तानी पारी खेलते हुए वह भारत को जीत के करीब ले गए। आखिरीर ओवर की गेंद पर उनका वह विनिंग सिक्स भला कोई कैसे भूल सकता है। धोनी ने 28 साल बाद भारक का विश्वकप जीतने का सपना पूरा किया।  ये भी पढ़ें:जब अफरीदी की गालियों के जवाब में महेंद्र सिंह धोनी ने जड़ा शतक

2013 चैम्पियंस ट्रॉफी: महेंद्र सिंह धोनी अकेले ऐसे कप्तान है जिन्होंने आईसीसी के तीनों टूर्नामेंट जीते हैं। वनडे और टी20 विश्वकप जीतने के बाद धोनी बारी थी चैम्पियंस ट्रॉफी की। धोनी ने साल 2013 में आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम का नेतृत्व किया। दो ग्रुप मैच और श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल जीत कर भारत इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में पहुंचा। यह मैच मेरे लिए खास था क्योंकि जिस दिन फाइनल खेला जाना था यानि कि 23 जून मेरा जन्मदिन था और इससे बेहतर तोहफा शायद ही कुछ और हो सकता है एक क्रिकेट प्रेमी के लिए। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 129 रन बनाए। वहीं जवाब में इंग्लैंड की टीम 124 रन पर आउट हो गई और भारत ने चैम्पियंस ट्ऱॉफी अपने नाम की। मैन ऑफ द मैच रवींद्र जडेजा रहे जिन्होंने 33 रन बनाने के साथ दो विकेट भी लिए। ये भी पढ़ें:टेस्ट में विराट कोहली और एमएस धोनी की कप्तानी में क्या है फर्क

2016 एशिया कप: बतौर सीमित ओवर कप्तान धोनी का आखिरी खिताब है। इस साल खेले गए एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ आठ विकेट से जीत हासिल कर एक बार फिर एशिया कप अपने नाम किया। मीरपुर में खेले गए इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए मेजबान टीम ने 120 रन बनाए। भारत को जीत के लिए 121 रन चाहिए थे और शिखर धवन ने ने 60 रनों का धमाकेदार पारी खेलते हुए भारत को लक्ष्य के पास पहुंचाया और उनके आउट होने के बाद पारी को संभाला विराट कोहली और धोनी ने। भारत ने यह मैच सात गेंद बाकी रहते जीत लिया। साल 2016 की शुरुआत भारतीय टीम की शानदार जीत से हुई थी लेकिन साल 2017 की शुरुआत क्रिकेट फैंस के लिए अच्छी नहीं रही है।