क्रिकेट की दुनिया में मिसाल बने ये पल
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भारत में क्रिकेट को धर्म का दर्जा दिया जाता है, भारत ही क्यों पूरे विश्व के दर्शकों में इस खेल के लिए दीवानगी साफ देखी जा सकती है। खिलाड़ियों के लिए देश के लिए क्रिकेट खेलना किसी गौरव से कम नहीं होता और इसकी मिसाल बहुत से खिलाड़ियों ने प्रस्तुत की है। इन खिलाड़ियों ने देश के लिए खेलते हुए कुछ ऐसा कर दिखाया जिससे हर देखने वाले ने उस खिलाड़ी के लिए ताली बजाई और उसके कदम को सराहा। तो आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने देश के लिए खेलते हुए मिसाल प्रस्तुत किया।

5. टूटे हाथ के साथ खेले ग्रीम स्मिथ:

2009 में साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए सिडनी टेस्ट में दर्शकों को खेल की दीवानगी एक मिसाल देखने को मिली, जब साउथ अफ्रीकी टीम के कप्तान ग्रीम स्मिथ टीम की हार बचाने के लिए टूटे हुई कलाई के साथ बल्लेबाजी करने आए। सलामी बल्लेबाजी करते हुए ग्रीम स्मिथ अपना दायां हाथ चोटिल करा बैठे थे, जिसकी वजह से उनको मैदान से बाहर जाना पड़ा। बाद में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम जीत की ओर बढ़ रही थी तो ग्रीम स्मिथ टूटे हाथ के साथ टीम की हार रोकने के लिए 11वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे। हर गेंद को डिफेंड करने के साथ ही उनके मुंह से चीख निकलती लेकिन वो विकेट से नहीं हटे। अंत में मिचेल जॉनसन ने उनको क्लीन बोल्ड कर उनको इस दर्द से छुटकारा दिलाया। [इसे भी पढ़ें– ]

4. पिता की मौत के बाद मैच बचाने उतरे विराट कोहली:

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मौजूदा दौर में भारतीय टीम के सुपरस्टार बन चुके विराट कोहली ने क्रिकेट की शुरूआत में ही क्रिकेट की मिसाल देने वाला कदम उठाया था। 18 साल के विराट कोहली पिता के देहांत के अगले दिन दिल्ली के लिए खेलने उतरे। विराट कोहली का कहना था कि उनके पिता हमेशा उनको देश के लिए खेलते देखना चाहते थे। इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया। कर्नाटक के खिलाफ विराट कोहली ने इस मैच में 90 रनों की पारी खेल कर पवेलियन लौटे।

3. पिता की मौत के बाद खेलने उतरे सचिन तेंदुलकर:

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विराट कोहली से पहले सचिन तेंदुलकर भी क्रिकेट के मैदान में ऐसी ही मिसाल पेश कर चुके थे। 1999 विश्व कप में दौरान सचिन तेंदुलकर को पिता की मौत की वजह से भारत वापस आना पड़ा, लेकिन देश के लिए खेलने की ललक ने सचिन तेंदुलकर को वापस इंग्लैंड बुलाया। पिता की मौत के गम के साथ सचिन तेंदुलकर केन्या के खिलाफ खेलने उतरे और शानदार शतक जमाकर टीम को जीत दिलाई।

2. अनिल कुंबले ने टूटे जबड़े के साथ की गेंदबाजी :

भारत के लेजेंडरी स्पिनर अनिल कुंबले को वेस्टइंडीज के खिलाफ टूटे हुए जबड़े के साथ गेंदबाजी करते हुए जिसने भी देखा अनिल कुंबले के पैशन को सैल्यूट किये बिना नहीं रह सका। बल्लेबाजी के दौरान अपना जबड़ा चोटिल करा चुके अनिल कुंबले टूटे हुए जबड़े के साथ गेंदबाजी करने उतरे और ब्रायन लारा का कीमती विकेट भी झटका।

1. कैंसर के साथ विश्व कप खेले युवराज सिंह:

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युवराज सिंह क्रिकेट जगत के लिए एक जीता जागता मिसाल हैं। खेल से प्यार की वजह से उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी को छुपा कर 2011 विश्व कप में हिस्सा लिया। मैदान पर खून की उल्टियां करते हुए भी उन्होंने बल्लेबाजी करना जारी रखा और भारत को विश्व विजेता बनाकर ही दम लिया। विश्व कप के बाद ये क्रिकेट के लिए युवराज सिंह का पैशन ही था जो उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी को मात देकर दोबारा मैदान पर कदम रखा।