जहीर खान को साल 2008 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द इयर के खिलाब से नवाजा गया था
जहीर खान को साल 2008 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द इयर के खिलाब से नवाजा गया था

7 अक्टूबर 1978 को भारत के तेज गेंदबाज जहीर खान का जन्म हुआ था। जहीर खान के रूप में भारत का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाली टीमों को जवाब था कि हमारे देश में भी तेज गेंदबाज होते हैं। भारत के टेस्ट इतिहास के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज जहीर खान 21वीं सदी में देश की गेंदबाजी टीम में सबसे अग्रणी थे। विश्व कप 2003 की जीत में जहीर खान ने लाजवाब गेंदबाजी की थी। जहीर खान के 39वें जन्मदिन पर हम आपके लिए लेकर आए हैं इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज की जिंदगी से जुड़ी 25 बातें। तो आइए नजर डालते हैं जहीर की जिंदगी की उन 25 बातों पर।

1. शुरुआती जिंदगी: जहीर खान का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में शिरडी से 40 किमी. दूर श्रीरामपुर में हुआ था। जहीर खान के पिता फोटोग्राफर और मां टीचर थीं। जगहीर खान ने अपनी शुरुआती पढ़ाई हिंद सेवा मंडल न्यू मराठी प्राइमरी स्कूल और उसके बाद केजे सोमैया सेकेंड्री स्कूल से की थी। स्कूल खत्म होने के बाद जहीर ने मेकैनिकल इंजीनियरिंग डिग्री कोर्स में दाखिला लिया। लेकिन अपने कोच की सलाह पर उन्होंने इंजीनियरिंग की जगह क्रिकेट में ज्यादा ध्यान लगाया। बावजूद इसके कि जहीर खान पढ़ाई में भी काफी होशियार थे।

2. क्रिकेट की तरफ रुझान: जहीर खान के पास गजब की प्रतिभा थी। जहीर की प्रतिभा को देखते हुए 17 साल की उम्र में जहीर के पिता उन्हें मुंबई ले आए। हमेशा अनुशासन में रहने वाले जहीर खान ने नेशनल क्रिकेट क्लब के शुरुआती 2 सत्रों के हर मुकाबलों में भाग लिया। शिवाजी पार्क जिमखाना के खिलाफ फाइनल में लिए गए 7 विकेटों ने जहीर खान को सुर्खियों में ला दिया। जिसके बाद जहीर खान को मुंबई और वेस्ट जोन की अंडर-19 टीम में चुन लिया गया। इसके बाद जहीर खान को एमआरएफ पेस फाउंडेशन में कोचिंग मिली जहां कोच डेनिल लिली ने कहा ये लड़का एक दिन भारत के लिए गेंदबाजी करेगा।

3. प्रथम श्रेणी में पदार्पण: जहीर खान ने प्रथम श्रेणी का आगाज 1999-2000 में मुंबई की टीम में जगह न मिल पाने के कारण बड़ौदा की तरफ से किया था। सीजन में जहीर खान तीसरे सबसे सफल गेंदबाज और बाएं हाथ के सबसे सफल गेंदबाज के रूप में उभरे थे, उनसे आगे आशीष जैदी और सदागोप्पन महेश ही थे। प्रथम श्रेणी के 8 मुकाबलों में 29.25 की शानदार औसत से जहीर खान ने 35 विकेट झटके थे। जिसमे उनका सर्वोच्च 43 रन देकर 5 विकेट था।

4. बड़ौदा का रणजी ट्रॉफी जीतना: बड़ौदा की तरफ से खेलते हुए जहीर खान तेजी से बढ़ रहे थे। 2000-01 के रणजी ट्रॉफी फाइनल में जहीर खान ने रेलवे के 8 खिलाड़ियों को आउट किया, जिसमें दूसरी पारी में उन्होंने पांच विकेट भी हासिल किए, जिसकी मदद से बड़ौदा ने रेलवे के ऊपर 21 रनों से जीत दर्ज की। फाइनल मुकाबले में जहीर खान मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजे गए। हालांकि उनके अंतरराष्टीय क्रिकेट की शुरुआत अब तक नहीं हुई थी। 2006 ते बाद जहीर खान मुंबई की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेलने लगे।

5. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण: घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार खेल की बदौलत वो जल्द ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने में सफल रहे। जहीर खान को नैरोबी में खेली गई आईसीसी नॉक आउट ट्रॉफी में खेलने का मौका मिला और उन्होंने उसे जबर्दस्त तरीके से भुनाया। जहीर खान ने केन्या के खिलाफ खेले गए मुकाबले में तीन विकेट लिए और अपने दूसरे मुकाबले में जो कि विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वॉर्टरफाइनल था उसमें जहीर खान ने एडम गिलक्रिस्ट और कप्तान स्टीव वॉ को आउट कर भारत को ऐतिहासित जीत दिला दी। उस दिम जहीर खान का 22वां जन्मदिन भी था। जहीर खान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण शानदार तरीके से किया था। जहीर खान ने टेस्ट में पदार्पण उसी साल बांग्लादेश के खिलाफ किया था जिसमें उन्होंने 3 विकेट लेने में कामयाबी पाई थी।

6.आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2003: जवागल श्रीनाथ और आशीष नेहरा के साथ मिलकर जहीर खान ने शानदार गेंदबाजी का मुजाहिरा पेश करते हुए भारत को फाइनल तक पहुंचा दिया। हालांकि, फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जहीर खान ने मैच के पहले ओवर में ही 15 रन लुटा डाले। मैच में वहां से भारत को एक बार भी संभलने का मौका नहीं मिला और भारत ऑस्ट्रेलिया से बड़े अंतर से मैच हार गया। टूर्नामेंट में जहीर खान ने 20.77 की शानदार औसत से 11 मैचों में 18 विकेट झटके जिसकी बदौलत वह टूर्नामेंट में चौथे सबसे सफल गेंदबाज थे।

7. भारतीय तेज गेंदबाजी की धार: श्रीनाथ के संन्यास लेने के बाद जहीर खान भारतीय तेज गेंदबाजी की धार बन गए और जब भी मैच होता था तो वो तेज गेंदबाजी की कमान संभालते थे। 2005 में श्रीसंथ, मुनफ पटेल और आरपी सिंह के आने के बाद जहीर चोट के कारण टीम से अंदर-बाहर होने लगे। जिसके बाद बीसीसीआई ने जहीर खान के कॉन्ट्रैक्ट को कम करते हुए उन्हें बी ग्रेड से सी ग्रेड में कर दिया।

8. काउंटी में प्रदर्शन: जहीर खान के करियर में ऐतिहासिक क्षण तब आया जब उन्होंने काउंटी क्रिकेट में साल 2006 में वॉसटरशायर ने उन्हें तो विदेशी खिलाड़ियों में से एक लिए चुना। जिसके बाद जहीर खान ने काउंटी क्रिकेट में उन पांच महीनों गजब का प्रदर्शन किया और अपनी छाप छोड़ दी। जहां वो वॉस्टरशायर की तरफ से 100 सालों में पहले ऐसे खिलाड़ी बने जिसने अपने पदार्पण मैच में 10 विकेट लिए हों जिसमें एसेक्स के खिलाफ पहली पारी में उन्होंने 138 रन देकर नौ विकेट हासिल किए। अगर विकेटकीपर स्टीवन डेविस ने जहीर की गेंद पर आखिरी खिलाड़ी डेरन गॉफ का कैच न छोड़ा होता तो जहीर खान काउंटी क्रिकेट के इतिहास में पारी में 10 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बन जाते। जहीर खान ने सत्र का समापन 78 विकेटों के साथ किया था।

9. भारतीय टीम में वापसी: काउंटी में शानदार प्रदर्शन के चलते जहीर ने दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए भारतीय टीम में वापसी की। दक्षिण अफ्रीका दौरे पर अच्छी गेंदबाजी और करियर की बेस्ट गेंजबाजी 5/42 ने जहीर खान का विश्व कप 2007 के लिए टिकट बुक करवा दिया।

10. ट्रेंट ब्रिज: जुलाई 2007 में जब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर थी तब जहीर खान ने 3 टेस्ट मैचों की सीरीज में 18 विकेट लिए थे। जिसके दम पर भारत सीरीज में इंग्लैंड को 1-0 से हरा दिया। 1986 के बाद भारत की इंग्लैंड पर ये पहली सीरीज जीत थी। सीरीज में जहीर खान को जेम्स एंडरसन के साथ संयुक्त रूप से मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। ट्रेंट ब्रिज में जहीर के 9 विकेटों की मदद से भारत ने मैच और सीरीज जीतने में कामयाबी पाई थी।

11. साल 2008 से लेकर 2012 का दौर:

2008 से लेकर 2012 तक चोट के कारण जहीर खान भारतीय टीम में अस्थाई रहे खासकर एकदिवसीय मुकाबलों में। इस दौरान टेस्ट में वो एक ही बार 10 विकेट ले सके वो भी साल 2010 में बांग्लादेश के खिलाफ।

12. आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011: 2003 की तरह दूसरी बार किस्मत ने जहीर खान का साथ दिया और जब श्रीसंथ गेंदबाजी की धार बन चुके थे ऐसे में जहीर खान ने विश्व विजयी टीम में बेहतरीन गेंदबाजी की। 2003 के बुरे फाइनल से आगे निकलते हुए जहीर ने टूर्नामेंट में 18.76 की शानदार औसत से 21 विकेट झटके। 2011 वर्ल्ड कप में वो शाहिद अफरीदी के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। तीन विश्व कप में जहीर ने श्रीनाथ की बराबरी करते हुए भारत के सबसे ज्यादा विकेट (44) लेने वाले गेंदबाज हैं। लेकिन जहीर खान ने यह उपलब्धि (23) श्रीनाथ (34) से कम मैच खेलकर हासिल की है।

13. आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2011 के बाद: जहीर खान ने 2012 अगस्त के बाद भारत के लिए कोई मैच नहीं खेला। जहीर खान को 2011 में इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में चुना गया लेकिन चोट के कारण जहीर खान को पहले टेस्ट के बाद सीरीज से हटना पड़ा। दिसंबर 2013 में जहीर खान 300 विकेट लेने वाले दूसरे भारतीय तेज गेंदबाज बने। जहीर खान ने दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज जैक्स कैलिस को अपना 300वां शिकार बनाया।

14. आंकड़े: जहीर खान अब तक 610 अंतरराष्ट्रीय विकेट ले चुके हैं। जहीर ने टेस्ट में 311 विकेट, एकदिवसीय मुकाबलों में 282 और टी-20 में 17 विकेट लिए हैं। जहीर खान के नाम प्रथम श्रेणी मैचों में 652 विकेट हैं। लिस्ट ए करियर में उनके नाम 357 और घरेलू टी-20 मुकाबलों में 119 विकेट हासिल किए हैं।

15. आईपीएल: जहीर खान अब तक तीन आईपीएल फ्रंचाइजी के लिए खेल चुके हैं। जहीर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, मुंबई इंडियंस और डेल्ही डेयरडेविल्स की तरफ से आईपीएल में खेल चुके हैं और वो डेल्ही डेयरडेविल्स के मेन्टॉर भी हैं।

16. बल्ले से जहीर का जौहर: अपने करियर में जहीर खान एक मंझे हुए बल्लेबाज भी रहे हैं। अपने 12वें एकदिवसीय मुकाबले में जहीर खान ने हेनरी ओलांगा की चार गेंदों में चार छक्के लगाए थे। 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट में 11वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए जहीर खान ने 75 रन बनाए थे। जो कि वो स्कोर उस समय का 11वें नंबर के बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर था जिसे बाद में वेस्टइंजीड के टीनो बेस्ट ने तोड़ दिया था। उसी पारी में जहीर ने 10वें विकेट के लिए सचिन तेंदुलकर के साथ 133 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की, जो कि अभी तोड़ा जाना बाकी है।

17. दादा पर आश्रित: जहीर पहली बार सौरव गांगुली के समय चमके थे। सैरव गांगुली युवा खिलाड़ियों को मौका देने के लिए जाने जाते थे। सौरव गांगुली ने वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, मोहम्मद कैफ जैसे खिलाड़ियों को मौका दिया था। सौरव ने ही जहीर के करियर को निखारा था।

18. ग्रीम स्मिथ को परेशान करनेवाले: जहीर खान ने ग्रीम स्मिथ को अपने करियर में सबसे ज्यादा परेशान किया है। जहीर ने ग्रीम स्मिथ को 14 बार पवेलियन का रास्ता दिखाया है।

19. हवाई यात्रा का डर: जब जहीर छोटे थे तो वह हवाई यात्रा करने से बहुत डरते थे। जहाज में पहली बार वह तब बैठे जब उन्हें मुंबई की टीम से खेलने मध्य प्रदेश जाना था। तब जहीर ने अपने कोच विद्याधर प्रभाकर से कहा था ‘सर आप मेरे साथ आओगे, मुझे प्लेन से डर लगता है।

20. जैक: जहीर खान को उनकी टीम के साथी खिलाड़ी जैक के नाम से पुकारते थे। जब वह काउंटी में वॉस्टरशायर की टीम से खेल रहे थे उस दैरान उन्हें ये निक नेम ‘जिप्पी जैकी’ मिला था।

21. प्रेरणा स्रोत: जहीर खान सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और वो सचिन को ही अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं। क्रिकेट के अलावा टेनिस के दिग्गज रॉजर फेडरर भी जहीर के प्रेरणा स्रोत हैं।

22. फ्रांस में फिटनेस टेस्ट: भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा टीम से बाहर किए जाने के बाद युवराज सिंह के साथ जहीर खान 2003 में फ्रांस गए। फ्रांस में दोनों ने 6 हफ्तों के फिटनेस कैंप में भाग लिया। ये दोनों का निजी फिटनेस कैंप था और इसके लिए बीसीसीआई की तरफ से कुछ मुहैया नहीं कराया गया था। जहीर खान और युवराज सिंह कोच चिम एक्जेटर से फिटनेस मंत्र लेने वाले पहले क्रिकेट खिलाड़ी थे, इससे पहले एक्जेटर रग्बी और फुटबॉल के खिलाड़ियों को फिटनेस मंत्र दे चुके थे।

23. सीखने का गुण: जहीर खान ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्हें चुनौतीपूर्ण हालात में खेलना काफी पसंद है। जहीर खान सीथ ही विदेशी परिस्थितियों में बहुद जल्द ढल जाते हैं। जहीर खान का एसजी, कूकाबुरा और ड्यूक की गेंदों पर बहुत अच्छा नियंत्रण था और वह हर गेंद से काफी प्रभावी रहे हैं।

24. व्यापारी जहीर: जहीर खान ने पुणे में एक गोटेल खरीदा है जिसका नाम “ZK’s” है। जहीर के होटल की देखरेख उनके छोटे भाई अनीस के हवाले है। जहीर खान ने हाल ही में प्रोस्पोर्ट फिटनेस एंड सर्विसेस खोला है।

25. विजडन क्रिकेटर ऑफ द इयर: जहीर खान को साल 2008 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द इयर के खिलाब से नवाजा गया था। जहार खान को इयान बेल, रेयान साइडबॉटम शिवनारायण चंद्रपाल और ऑटिस गिब्सन के साथ विजडन क्रिकेटर ऑफ द इयर का खिताब दिया जा चुका है।