लोढा कमेटी की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अनदेखा कर रही है बीसीसीआई © IANS(File Photo)
लोढा कमेटी की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अनदेखा कर रही है बीसीसीआई © IANS(File Photo)

जस्टिस लोढा कमेटी द्वारा पेश की गई सिफारिशों को मानने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बीसीसीआई(भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने अपनी मनमानी जारी रखी है या यूं कहें कि बीसीसीआई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर रही है। क्रिकेट की बेहतरी के लिए जस्टिस लोढा कमेटी ने जो सिफारिशें रखी थी, उसकी अनदेखी करते हुए बीसीसीआई ने 21 सितंबर को एम एस के प्रसाद के नेतृत्व वाली 5 सदस्यीय नई चयन समिति का गठन किया।

क्या है लोढा कमेटी और क्या है इसकी मांग:
उचतम न्यायालय ने 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग(आईपीएल) के दौरान स्पाट फिक्सिंग और सट्टेबाजी प्रकरण की जांच करने के लिए लोढा कमेटी का गठन किया था। लोढा कमेटी ने भारतीय क्रिकेट और उसके प्रशासन को बेहतर बनाने के कुछ सिफारिशें बीसीसीआई के सामने रखी थी। जिसका विरोध बीसीसीआई ने किया था। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में बीसीसीआई को यह आदेश मानने के आदेश दिया। लोढा कमेटी ने क्रिकेट की बेहतरी के लिए क्या मांग की थी आइए जानते हैं।

1. कमेटी की पहली सिफारिश में कोई भी व्यक्ति 70 साल की उम्र के बाद बीसीसीआई या राज्य संघ पदाधिकारी नहीं बन सकता।
2. लोढ़ा समिति का सबसे अहम सुझाव है कि एक राज्य संघ का एक मत होगा और अन्य को एसोसिएट सदस्य के रूप में रेलीगेट किया जाएगा।
3. आईपीएल और बीसीसीआई के लिए अलग-अलग गवर्निंग काउंसिल हों। इसके अलावा समिति ने आईपीएल गवर्निंग काउंसिल को सीमित अधिकार दिए जाने का भी सुझाव दिया है।
4. समिति ने बीसीसीआई पदाधिकारियों के चयन के लिए मानकों का भी सुझाव दिया है। उनका कहना है कि उन्हें मंत्री या सरकारी अधिकारी नहीं होना 5. चाहिए, और वे नौ साल अथवा तीन कार्यकाल तक बीसीसीआई के किसी भी पद पर न रहे हों।
6. लोढ़ा कमेटी का यह भी सुझाव है कि बीसीसीआई के किसी भी पदाधिकारी को लगातार दो से ज़्यादा कार्यकाल नहीं दिए जाने चाहिए।
7. लोढ़ा समिति की रिपोर्ट में खिलाड़ियों के एसोसिएशन के गठन तथा स्थापना का भी प्रस्ताव है।
8. समिति का सुझाव है कि बीसीसीआई को सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में लाया जाना चाहिए।
9. समिति के मुताबिक, बीसीसीआई के क्रिकेट से जुड़े मामलों का निपटारा पूर्व खिलाड़ियों को ही करना चाहिए, जबकि गैर-क्रिकेटीय मसलों पर फैसले छह सहायक प्रबंधकों तथा दो समितियों की मदद से सीईओ करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला:

सुप्रीम कोर्ट ने लोढा कमेटी के ज्यादातर मांगों को मानते हुए बीसीसीआई को उनका पालन करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इन बदलावों को पूरी तरह लागू करने के लिए बीसीसीआई को 6 महीने का वक्त दिया।

1. कोर्ट ने कहा बीसीसीआई लोढ़ा पैनल की सिफारिशें 6 महीने में लागू करे।
2. अब बोर्ड में नहीं मंत्री और अधिकारी शामिल हो पाएंगे, राजनेताओं पर कोई पाबंदी नहीं।
3. बीसीसीआई में अब एक व्यक्ति-एक पद का नियम लागू होगा।
4. बीसीसीआई में अधिकारियों की उम्र सीमा 70 साल होगी।
5. गुजरात-महाराष्ट्र में वोटिंग होगी रोटेशनल, गुजरात और महाराष्ट्र में 3-3 हैं क्रिकेट संघ, बाकी सभी राज्यों में एक-एक क्रिकेट संघ हैं।
6. खिलाड़ियों का अपना संघ होगा।
7. ओवर के बीच में विज्ञापन पर बीसीसीआई ब्रॉडकास्टर से बात कर हल निकालेगा।
8. बीसीसीआई में RTI का दायरा हो और क्या सट्टेबाजी वैध हो, यह संसद तय करे।

पूर्व कप्तानों ने उठाए लोढा कमेटी की सिफारिशों पर सवाल:
कुछ पूर्व भारतीय खिलाड़ियों ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर सवाल उठाए थे। भारत को पहला विश्व कप दिलाने वाले कप्तान कपिल देव और सुनिल गावस्कर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने इन सिफारिशों पर सवालिया निशान लगाते हुए इसे बहुत ही सख्त बताया। इन दोनों ने कहा कि कुछ सिफारिशें काफी कड़ी हैं, जिसमें एक राज्य एक वोट और प्रशासकों के लिए तीन साल का ब्रेक शामिल है। रवि शास्त्री ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी थी, जिन्होंने विवादास्पद मुद्दों को सुलझाने के लिए लोढ़ा समिति और बीसीसीआई के बीच बातचीत की वकालत की थी। इन दोनों दिग्गजों का मानना है कि काम करने और नियंत्रण के लिए बीसीसीआई का ढांचा अलग तरह का है और इसलिए समिति की सारी सिफारिशें उसके लिए शायद फायदेमंद नहीं।

जारी है बीसीसीआई की मनमानी:
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बीसीसीआई अपनी मनमानी कर रहा है। हाल ही में बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए नई चयन समिति का गठन किया। इस 5 सदस्यीय टीम में एक सदस्य ने कभी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय सेलेक्शन कमेटी बनाने को कहा था जिसके सभी सदस्यों को टेस्ट क्रिकेट खेलने का अनुभव हो।

सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया कड़ा रूख:
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को ना मानने के लिए बीसीसीआई को लताड़ लगाई है। लोढा समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी जिसमें बीसीसीआई द्वारा नए नियमों को मानने के लिए लगाई जा रही अड़चनों का जिक्र था। इसके अलावा लोढा कमेटी ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को भी हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रूख अपनाते हुए बीसीसीआई को लताड़ लगाया। मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा, “बीसीसीआई को लगता है कि वो खुद कानून है। हमें पता है कि आदेश पालन कैसे करवाया जाता है। बीसीसीआई को लगता है कि वो भगवान है। आप (बीसीसीआई) या तो बात मानें या हम मनवा लेंगे। बीसीसीआई का बरताव काफी खराब है।”

जस्टिस ठाकुर ने आगे कहा, “ऐसा लगता है कि बीसीसीआई अदालत के आदेश की अवहेलना तक जा सकता है। हम बोर्ड से ऐसी अवज्ञा की उम्मीद कर रहे थे। हम बीसीसीआई के ऐसे तरीकों की सराहना नहीं करते। हमें अपना पिछला आदेश मनवाने के लिए आदेश देने में कोई हिचक नहीं होगी।”


सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति द्वारा प्रस्तुत इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देने के लिए बीसीसीआई को 6 अक्टूबर तक का समय दिया है। अब देखना यह है कि बीसीसीआई लोढा कमेटी के इस रिपोर्ट के सन्दर्भ में क्या कदम उठाती है।