भारत बनाम वेस्टइंडीज © AFP
भारत बनाम वेस्टइंडीज © AFP

अगर दुनिया में कुछ ऐसे लोग हैं जो ये सोच रहें हैं की भारत और वेस्ट इंडीज के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज में सब कुछ सही ही हुआ है, तो वे लोग सरासर गलत हैं। जहां तक वेस्ट इंडीज और क्रिकेट का नाता है, मैदान पर होने वाली बातें तो थोड़ी सी ही होती हैं, जिनसे इस टीम के प्रशंसकों को ख़ुशी मिले। कुछ ही महीनों पहले डैरेन सैमी की टीम ने वर्ल्ड T20 में एक शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन जैसे ही श्रृंखला ख़त्म हुई, इतना साफ़ हो गया की खिलाड़ियों और वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड के बीच सालों से चला आ रहा मनमुटाव अब एक गंभीर रूप ले चुका है।

देखिये, कोई भी ये नहीं सोच के चल रहा था कि क्रिस गेल, सैमी, ड्वेन ब्रावो, किरोन पोलार्ड या सुनील नरेन टीम में वापसी करेंगे, वो भी टेस्ट टीम में जो एक बेहद मजबूत भारतीय टीम के खिलाफ 4 टेस्ट मैच खेलने के लिए चुनी गई थी। और तो और कोई ये भी नहीं सोच रहा था की भारतीय टीम के सामने मुश्किलें खड़ी करने के लिए शिवनारायन चंद्रपॉल आसमान से आ टपकेंगे। जहां तक बात है डैरेन सैमी की, तो विश्व कप जीतने के बाद उन्होंने इतना ज़हर उगल दिया था की वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड शायद ही कभी उन्हें क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में खेलने का मौका दे।

पर ऐसा किसी ने भी नहीं सोचा था की वेस्ट इंडीज एक निहायत ही कमज़ोर टीम भारत के खिलाफ उतारेगी। वेस्ट इंडीज को तो मौसम को धन्यवाद देना चाहिए कि उसने बीच में टांग अड़ाकर भारत को सीरीज की तीसरी जीत दर्ज करने से रोक दिया। चौथे टेस्ट में भारत को किसी भी हाल में जीत दर्ज करने की ज़रूरत थी, जो की अब नहीं हो पाएगी क्योंकि मौसम और खराब प्रबंधन ने इतना सुनिश्चित कर दिया कि भारत को जो चाहिए वो न मिले।

खैर, हम अभी खासतौर से वेस्ट इंडीज की टीम पर टिप्पणी नहीं कर रहे। हम बात कर रहें हैं भारत और वेस्ट इंडीज के बीच खेले जा रहे चौथे टेस्ट की, जिसमें अभी तक पिछले 4 दिनों में सिर्फ 22 ओवर का खेल हो पाया है। ऐसा नहीं है कि त्रिनिदाद में पिछले 4 दिनों में लगातार बारिश हो रही है। मज़े की बात तो यह है की खेल के दूसरे और तीसरे दिन धूप खिली रही, परन्तु वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड और स्थानीय क्रिकेट एसोसिएशन की गैरज़िम्मेदारी ने एक दिलचस्प मुकाबले से हम सबको वंचित कर दिया।

आप मानोगे नहीं, पर यह सच है. वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड और वहां के खिलाड़ियों के बीच जंग की एक वजह यह भी है की बोर्ड उनके खिलाड़ियों को अच्छे पैसे नहीं देता। इसी वजह से आज कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो दुनिया भर में घूम घूम कर T20 क्रिकेट खेल रहे हैं, और वाह वाही भी लूट रहे हैं।

बात पैसे की ही है. और हो भी क्यों नहीं? सैमी और उनकी टीम के पास T20 विश्व कप में खेलने के लिए वेस्ट इंडीज टीम के कपड़े तक नहीं थे। जैसे तैसे आखिरी घड़ी में सब जाकर ठीक हुआ और वेस्ट इंडीज प्रतियोगिता में भाग ले पाया। टीम मैनेजर भी एकदम नए थे, उन्होंने खूब भागा-दौड़ी की। खैर, ये तो बस आपको एक झलक दिखलाई की वेस्ट इंडीज क्रिकेट बोर्ड की वजह से खिलाड़ियों को किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

मुद्दे की बात यह है की एक ऐसा टेस्ट खेलने का स्थान जो सालों से एक से बढ़कर एक मुकाबलों की मेजबानी कर चुका है, वहां पर बुनियादी चीज़े ही नहीं है। त्रिनिदाद में न तो सुपर सोपर है और ना ही पूरे मैदान पर फैलाने वाले कवर्स। अब अगर इतने सालों बाद भी बुनियादी वस्तुएं जगह पर नहीं हो, और समय पर उपयोग में नहीं आ सकें, तो ऐसे मैदानों पर खेलने की ज़रूरत ही क्या है?

क्रिकेट का इतिहास कोई 10-20 सालों पुराना नहीं है कि हम यह मान कर छोड़ दें की चलो कोई नहीं, कल हम अपनी गलती सुधार लेंगे। कोई नहीं, कल हम आज हुई गलती दोहराएंगे नहीं।

बल्कि बात तो यह है की सालों साल बीत गए हैं, पर बुनियादी ज़रुरतो के मामले में क्रिकेट आज भी राजनेताओं और खोखले प्रबंधकों के जाल में उलझा पड़ा है। पैसा तो लगभग सभी बना रहे हैं, पर खेल में, और खेल को आगे बढ़ाने के लिए आग में पैसा झोंकने वाले गिनती के ही हैं।

त्रिनिदाद में क्वींस पार्क ओवल नाम का जो मैदान है ना, वहां पर 1930 से टेस्ट क्रिकेट खेला जा रहा है। अगर आप भूल गए हों तो मैं याद दिलाता हूं, ये वही मैदान है जहां पर भारतीय टीम ने एक भीमकाय स्कोर खड़ा किया था, वो भी कोई ऐसी वैसी टीम नहीं, क्लाइव लॉयड कप्तान थे उसके। सन् 1976-77 में त्रिनिदाद के इस मैदान पर खेलते हुए भारत की टीम ने 406 रन बनाए थे सिर्फ 4 विकेट गवां के। भारत ने वह मैच 6 विकेट से जीता था।

पर इस बार कोई मशहूर जीत नहीं होगी। खिलाड़ी अपने अपने होटलों से निकलेंगे, शायद थोड़ा बहुत खेल भी लें। फिर क्या, हाथ मिला के सब वापस अपनी अपनी दुनिया में।