Devbrat Bajpai
देवब्रत वाजपेयी क्रिकेटकंट्री हिंदी के साथ senior correspondent के पद पर कार्यरत हैं
Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - January 13, 2016 10:40 PM IST


आधुनिक क्रिकेट में टी20 के प्रचलन के साथ कई बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाने के लिए कई नए शॉट इजाद किए हैं। जिनमें एक शॉट रिवर्स स्वीप भी है जिसे कई लोग अलटी-पलटी के नाम से भी जानते हैं। आधुनिक क्रिकेट में आपने केविन पीटरसन और डेविड वॉर्नर को स्विच हिट लगाते हुए देखा होगा जिसमें वे एकाएक राइट हेंडर से लेफ्टहेंडर बल्लेबाज बनते हुए गेंद को सीधे सीमा रेखा के पार पहुंचा देते हैं। ये दोनों बल्लेबाज स्विच हिट लगाते हुए ऐसे दिखाई देते हैं जैसे ये दोनों हाथों से बल्लेबाजी करने में माहिर हैं, लेकिन इन्हें पूर्णतः दूसरे हाथ से बल्लेबाजी करते हुए नहीं देखा गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विश्व क्रिकेट में कई खिलाड़ी हुए जन्होंने दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए क्रिकेट खेली। हाल ही में अहमदाबाद के क्रिकेटर प्रदीप चंपावत के संबंध में खबर आई थी कि वह दोनों हाथों से गेंदबाजी करने में माहिर हैं। प्रदीप अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर नहीं हैं, लेकिन अतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह कारनामा कई क्रिकेटरों ने दुहराया है। ये भी पढ़ें: अजब गेंदबाज की गजब प्रतिभा
ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक रहे माइक हसी ने अपने खेल की शुरुआत एक राइटहेंड बल्लेबाज के रूप में की थी, लेकिन जब वह 9 साल हुए तब एलन बॉर्डर से प्रभावित होकर बाएं हाथ के बल्लेबाज बन गए। क्रिकेट में बल्लेबाजों को मजबूती से बल्लेबाजी करने के लिए उन्हें निर्देश दिए जाते हैं कि वह अपने मजबूत हाथ से बैट के हैंडल के निचले भाग को पकड़ें। लेकिन इन नियमों को धता बताते हुए कई क्रिकेटरों ने दोनों हाथों से गजब की क्रिकेट खेली और दोनों हाथों का इस्तेमाल गेंदबाजी व बल्लेबाजी करने में किया। क्रिकेट के नियमों के मुताबिक गेंदबाज को दोनों हाथों से गेंदबाजी करने की पूर्ण स्वतंत्रता है, लेकिन दूसरे हाथ से गेंदबाजी करने के पूर्व उसे इसकी जानकारी अंपायर को देनी होती है। ये भी पढ़ें: जब क्रिकेट में हुआ एल्युमिनियम के बैट का इस्तेमाल, मच गया बवाल
1. इस तरह की गेंदबाजी का पहला वाकया साल 1958 में घटा था जब सर गैरी सोबार्स को हनीफ मोहम्मद नाम के स्पिन गेंदबाज ने दोनों हाथों से गेंदबाजी की थी। हालांकि इतने प्रयास के बावजूद हनीफ मोहम्मद सर सोबार्स को आउट करने में कामयाब नहीं हो पाए थे। सर सोबार्स ने उस मैच में नाबाद 365 रन बनाए जो उनका क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर रहा।
2. इसका दूसरा वाकया साल 1981-82 को देखने को मिला जब रणजी सीजन में बॉम्बे की ओर से खेलने उतरे सुनील गावस्कर ने अपने स्वभाव के विपरीत बाएं हाथ से बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। गावस्कर ने इस मैच में नाबाद 18 रन बनाए। गावस्कर ने मैच के बाद बताया कि जिस वक्त वह बल्लेबाजी के लिए उतरे थे उस समय मुंबई के बल्लेबाज कर्नाटक के स्पिनर रघुराम भट्ट की गेंदों में बुरी तरह से उलझ रहे थे और दाहिने हाथ के बल्लेबाजों के लिए उनकी गेंदें कुछ ज्यादा ही टर्न कर रही थीं। इसीलिए उन्होंने दाहिने हाथ से बल्लेबाजी करने की बजाय बाएं हाथ हाथ से बल्लेबाजी करना उचित समझा। ये भी पढ़ें: जानें क्रिकेट के बैट, बॉल, विकेट की लंबाई-चौड़ाई
3. साल 1996 के विश्व कप में ऐसा ही वाकया श्रीलंका और केन्या के मैच के दौरान देखने को मिला जब केन्या ने श्रीलंका के पहाड़ जैसे स्कोर का पीछा करते हुए 49.5 ओवरों में 254 रन बना लिए थे। चूंकि मैच की औपचारिकताएं शेष थीं इसीलिए श्रीलंका के हसन तिलकरत्ने ने इस अंतिम ओवर में दाएं व बाएं दोनों हाथों से गेंदबाजी की। इस तरह की गेंदबाजी के कारनामें निचली स्तर की क्रिकेट में ज्यादा देखने को मिलते हैं, लेकिन यह भी सत्य है कि इस तरह के गेंदबाज ज्यादा सफल नहीं हो पाते। एक बार अंडर-15 वर्ल्ड चैलेंज जो इंग्लैंड में हुआ था उसमें एक पाकिस्तानी गेंदबाज मोहम्मद नईम ने दोनों हाथों से गेंदबाजी की थी। नईम ने कुल 7 ओवरों की गेंदबाजी की और 34 रन दिए लेकिन उन्हें इस दौरान कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई। वही अपनी टीम की ओर से मैच में दूसरे महंगे गेंदबाज साबित हुए। इसके बाद नईम फिर कभी क्रिकेट में नजर नहीं आए।
विश्व क्रिकेट में जिस तरह से आधुनिकीकरण हो रहा है। इसमें कोई ताज्जुब की बात नहीं होगी अगर हमें भविष्य में दोनों हाथों से गेंदबाजी व बल्लेबाजी करने वाले क्रिकेटर देखने को मिले। अगर ऐसा होता है तो क्रिकेटर मजा दुगुना हो जाएगा।
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