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ये क्रिकेटर जिन्होंने बदल दिया अपना मजहब

मजहब सिर्फ एक दर्जा नहीं है बल्कि यह हमारे चरित्र व विचारों का दर्पण भी है।

user-circle cricketcountry.com Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - February 17, 2016 11:08 AM IST

युसुफ योहाना ©Getty Images
युसुफ योहाना ©Getty Images

क्रिकेटर अपना शतक बनाने के बाद आसमान की ओर अपना सिर उठाते हैं और ईश्वर को मन ही मन प्रणाम करते हैं। साथ ही बड़े-बड़े त्योहारों जैसे दीपावली, दशहरा, ईद, और क्रिसमस के मौके पर भी क्रिकेटर सोशल मीडिया पर जाकर अपने प्रशंसकों को पूरे जोश के साथ त्योहारों की बधाईयां देते हैं। यह उनका ईश्वर पर विश्वास है जो अक्सर देखने को मिलता है। दुनिया में आने के बाद इंसान वैसे तो अपने पूर्वजों के द्वारा उपार्जित की गई कई चीजों और रिवाजों को अपनाता है उनमें एक मजहब भी है। मजहब सिर्फ एक दर्जा नहीं है बल्कि यह हमारे चरित्र व विचारों का दर्पण भी है। इसीलिए कई बार ऐसा भी होता है कि जिस धर्म के साथ हम पैदा हुए हैं वह हमारे विचारों से मेल नहीं खाता हो। इसीलिए कई लोग दूसरे धर्म को अपनाकर अपने श्रृद्धा भाव को प्रकट करते हैं। क्रिकेट की दुनिया में ऐसे कई क्रिकेटर हुए जिन्होंने दूसरे धर्म को अपनाया और ईश्वर की राह पर चल पड़े। ऐसे ही चुनिंदा क्रिकेटर पर नजर डालते हैं। ये भी पढ़ें: जाने क्रिकेटरों की महंगी कारों के बारे में, किस क्रिकेटर के पास है कौन सी कार

1. युसुफ योहाना: पाकिस्तान के बेहतरीन क्रिकेटर युसुफ योहाना पाकिस्तान टीम में शामिल किए गए एकमात्र क्रिस्चियन क्रिकेट खिलाड़ी रहे। पाकिस्तान टीम में लगभग एक दशक खेलने के बाद एका-एक योहाना ने साल 2005-2006 में क्रिस्चियन धर्म को छोड़कर इस्लाम अपनाने का फैसला किया और वह मोहम्मद युसुफ बन गए। इस्लाम अपनाने के पहले योहना अपने गले में क्रॉस पहनते थे। लेकिन इस्लाम अपनाने के बाद उन्होंने पूरी सिद्दत से इस धर्म को अपनाया और बड़ी दाढ़ी बढ़ाने के साथ इस धर्म की सेवा में तहे दिल से लग गए। योहना की पत्नी तानिया भी बाद में इस्लाम में परिवर्तित हो गईं और उनका नाम फातिमा पड़ गया।

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2. वायने पार्नेल: दक्षिण अफ्रीका टीम के खिलाड़ी वायने पार्नेल ने 30, जुलाई 2011 को इस्लाम धर्म को अपना लिया। मात्र 22 साल की उम्र में धर्म परिवर्तिन करने वाले पार्नेल विश्व के कम उम्र में धर्म परिवर्तित करने वाले क्रिकेटरों की जमात में शामिल हो गए। पार्नेल ने धर्म परिवर्तन के तुरंत बाद अपना नाम वायने वलीद पार्नेल रख लिया।

© Getty Images
© Getty Images

खबरों में यह बात सुनने को मिली कि शायद पार्नेल के मुस्लिम दोस्तों ने उन्हें इस्लाम धर्म स्वीकारने के लिए उकसाया है। इस संबंध दक्षिण अफ्रीका टीम के मैनेजर मोहम्मद मोसाजी ने कहा कि उन्हें किसी ने प्रभावित नहीं किया बल्कि यह उनका निजी फैसला है। ये भी पढ़ें: जानें भारतीय क्रिकेटर्स की फेवरिट हनीमून डेस्टिनेशन

3. सूरज रणदीव : श्रीलंका टीम के दाहिने हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज सूरज रणदीव ने श्रीलंका टीम की ओर से 12 टेस्ट और 30 वनडे मैच खेले और कुल 86 अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने में सफलता अर्जित की। इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि सूरज रणदीव का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था और उनका बचपन का नाम नाशुक मोहम्मद सूरज था।

सूरज रणदीव © Getty Images
सूरज रणदीव © Getty Images

सूरज ने बाद में बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया और साल 2010 में अपना नाम बदल लिया और तबसे वह सूरज रणदीव के नाम से विश्व क्रिकेट में जाने गए।

4. तिलकरत्ने दिलशान : श्रीलंकाई टीम के बेहतरीन क्रिकेटर दिलशान क्रिकेट मैदान पर अपने बेहतरीन शॉट्स के लिए जाने जाते हैं, जिनमें दिलस्कूप उनका पसंदीदा स्ट्रोक है। दिलशान का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था।

 

तिलकरत्ने दिलशान © Getty Images
तिलकरत्ने दिलशान © Getty Images

16 साल की उम्र में दिलशान ने बौद्ध धर्म अपनाने का निर्णय लिया और तिलकरत्ने दिलशान बन गए। धर्म परिवर्तन के पहले उनका नाम तुवान मुहम्मद दिलशान था।

5. डेविड शेपार्ड : इंग्लैंड के क्रिकेटर शेपार्ड एक मात्र क्रिकेटर बने जिन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलने के दौरान ही मंत्री चुन लिया गया। इंग्लिश और सुसेक्स की टीम की ओर से खेलने वाले शेपार्ड ने ‘इवेंनजेलिकल क्रिस्चियनटी’ को साल 1952 में अपना लिया था। इस समय वह प्रसिद्ध कैंम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्य्यन कर रहे थे। दाहिने हाथ के बल्लेबाज शेपार्ड ने अपने पूरे क्रिकेट करियर में इंग्लैंड की ओर से कुल 22 टेस्ट मैच खेले जिनमें उन्होंने 1172 रन बनाए। शेपार्ड ने 1963 तक क्रिकेट खेला।

क्रिकेट छोड़ने के बाद उनका झुकाव धर्म की ओर बढ़ गया। साल 1969 में उन्हें पहली बार विशप का धर्माध्यक्ष चुना गया। बाद में साल 1975 में उन्हें लिवरपूल का धर्माध्यक्ष चुना गया। इस दौरान उन्होंने अपने धर्म के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। साल 1998 में उन्हें लीवरपूल के सबसे बड़े सम्मान टाइटल बेरन शेपार्ड से सम्मानित किया गया। ये भी पढ़ें: जानिए भारतीय क्रिकेटरों के बिजनेस वेंचर

6. कृपाल सिंह : भारतीय टीम की ओर से 14 टेस्ट मैच खेलने वाले कृपाल सिंह को एक क्रिस्चियन लड़की से प्यार हो गया था जिससे उन्होंने बाद में शादी कर ली। शादी करने के बाद उन्होंने सिख धर्म को छोड़कर क्रिस्चियन धर्म अपना लिया। उन्होंने इस दौरान सिख पगड़ी पहनना बंद कर दी और दाढ़ी कटवा ली। उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेलने के दौरान ही किया था। उन्होंने टीम इंडिया के लिए साल 1955 से साल 1964 तक क्रिकेट खेला। कथित रूप से बाद में कृपाल सिंह का क्रिस्चियन नाम अर्नोल्ड जॉर्ज हो गया। धर्म परिवर्तन को बावजूद वह दोनों धर्मों को मानते रहे।