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जब क्रिकेट में हुआ एल्युमिनियम के बैट का इस्तेमाल, मच गया बवाल

लिली ने एल्युमिनियम बैट से साल 1979 में इंग्लैंड के विरुद्ध मैच में की थी

user-circle cricketcountry.com Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - January 13, 2016 10:43 PM IST

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डेनिस लिली  मैदान में बल्लेबाजी के दौरान एल्युमिनियनम धातु से बने बैट को लेकर उतरे थे © Getty Images
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डेनिस लिली मैदान में बल्लेबाजी के दौरान एल्युमिनियनम धातु से बने बैट को लेकर उतरे थे © Getty Images

आजकल क्रिकेट में बल्लेबाज खेलने के लिए लकड़ी के बैट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डेनिस लिली मैदान में बल्लेबाजी के दौरान एल्युमिनियनम धातु से बने बैट को लेकर उतरे थे और उनके इस कदम ने क्रिकेट फील्ड में बवाल मचा दिया था। चूंकि डेनिस लिली कोई विशेषज्ञ बल्लेबाज नहीं थे बल्कि एक विशुद्ध गेंदबाज थे जो 9वें नंबर पर बल्लेबाजी करने आते थे, बावजूद इसके उनके बैट को लेकर बवाल खड़ा हुआ। लेकिन डेनिस लिली ने एल्यूमिनियम के बैट का इस्तेमाल क्यों किया? उसके पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है। तो आइए रूबरू होते हैं एल्युमिनियम बैट के इस किस्से से।

आपको बता दें कि डेनिस लिली अपने क्रिकेट करियर के दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम के सबसे ज्यादा विवादों से घिरने वाले खिलाड़ियों में से एक रहे। ऐसे ही एक विवाद को उन्होंने 1979 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एक टेस्ट मैच के दौरान हवा दी। ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड के साथ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेल रहा था। मैच के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया बेहद मुश्किल में नजर आ रहा था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने महज 232 के स्कोर पर अपने 8 विकेट गंवा दिए थे। दिन के अंत में डेनिस विली बल्लेबाजी के लिए उतरे, और पहले दिन का खेल खत्म होने तक वे 11 रन पर नाबाद थे। दूसरे दिन का खेल जब शुरू हुआ और विली जब मैदान पर बल्लेबाजी करने उतरे तो उनके हाथ में साधारण लकड़ी(विलो) से बना बैट नहीं था, बल्कि वह बैट एल्युमिनियम धातु से बना था।

क्यों किया विलि ने एल्युमिनियम बैट का इस्तेमाल?: एल्युमिनियम का यह बैट लिली के दोस्त ग्रेम मोनेगन की कंपनी ने बनाया था। यह बैट परंपरागत क्रिकेट बैट के रिप्लेसमेंट के लिए बनाया गया था जो स्कूलों और विकासशील देशों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। मोनेगन ने एल्युमिनियम के इस बैट का निर्माण बेसबॉल के बैट को ध्यान में रखकर किया था जहां लकड़ी के बैट को एल्युमिनियम से रिप्लेस किया गया था। लिली अपने दोस्त मोनेगन की कंपनी में हिस्सेदार थे इसलिए उन्होंने एक मार्केटिंग स्टंट का पूरा करने के लिए उस बैट के साथ अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच में खेलने का निर्णय लिया।

चूंकि उस समय तक क्रिकेट में इस तरह के बैट को इस्तेमाल करने को लेकर कोई रोक-टोक नहीं थी, इसलिए विली के लिए इस बैट के साथ मैदान पर जाना और भी आसान हो गया। हालांकि यह पहली बार नहीं था जब विली ने एल्युमिनियम के बैट का इस्तेमाल किया था, बल्कि इस घटना के ठीक 12 दिन पहले उन्होंने इसी बैट का इस्तेमाल वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच में भी किया था। लेकिन उस टेस्ट मैच में उनके बैट के खिलाफ किसी ने विरोध व्यक्त नहीं किया था।

कैसे शुरू हुआ विरोध?: विली के बैट को लेकर विरोध दूसरे दिन की चौथी गेंद से शुरू हुआ,जब विलि ने इयान बॉथम की गेंद पर स्ट्रेट ड्राइव खेला, जिस पर विली ने तीन रन लिए। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रेग चैपल के मुताबिक गेंद को चार रन के लिए जाना चाहिए था। इसीलिए चैपल ने 12वें खिलाड़ी रोडनी हॉग को लिली को परंपरागत लकड़ी के बैट को देने के लिए कहा। जब ये सब चल ही रहा था कि इंग्लिश टीम के कप्तान माइक बियर्ली ने अंपायर से शिकायत की। बियर्ली ने कहा कि धातु का बैट लेदर की गेंद को खराब कर रहा है।
इसके बाद अंपायरों ने लिली को बैट बदलने को कहा। लेकिन लिली ने बैट बदलने से इंकार कर दिया और अपनी बात पर अड़ गए। इस संबंध में मैदान पर अंपायर, लिली और बियर्ली में करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान चैपल ने इस बात को भांप लिया कि अगर ये चलता रहा तो मैच लंबे समय तक रुक जाएगा। इसीलिए वे मैदान पर आए और लिली को विलो(लकड़ी का बैट) इस्तेमाल करने के लिए कहा। लिली जो बैट जो बदलने के सख्त खिलाफ थे उन्होंने गुस्से में आकर एल्युमिनियम के बैट को दूर फेंक दिया( यह बैट लिली जहां खड़े थे वहां से 40 यार्ड दूर गिरा) और अनिच्छा से लकड़ी के बैट से खेलने पर राजी हुए और तब जाकर मैच एक बार फिर से शुरू हुआ।

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हालांकि लिली के इस दुर्व्यवहार के लिए उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड और अंपायरों दोनों ने लिली को चेतावनी देकर छोड़ दिया। इस मैच के बाद उस एल्युमिनियम बैट की खूब बिकवाली हुई, जिसके लाभ का प्रतिशत मोनेगन ने लिली को भी दिया। लेकिन बैट के तेजी से बिकने का सिलसिला अगले कुछ ही महीनों तक चला क्योंकि क्रिकेट में एक नया नियम इजाद हुआ जिसके अंतर्गत क्रिकेट में सिर्फ लकड़ी से बने बैट का इस्तेमाल किया जा सकता था। जिस बैट का इस्तेमाल लिली ने 1979 के उस मैच में किया था वह आज भी उनके पास है। मैच के खत्म होने के बाद उस बैट पर दोनों टीम के खिलाड़ियों ने अपने हस्ताक्षर किए। इंग्लैंड के कप्तान बियर्ली को जब पता चला कि इस बैट का इस्तेमाल लिली ने सेल्स स्टंट के लिए किया था तो उन्होंने बैट पर सहर्ष हस्ताक्षर किए और लिखा ‘गुड लक विद द सेल्स'(बिक्री के लिए शुभकामनाएं)। इस मैच के बाद क्रिकेट के नियम 6 को प्रभाव में लाया गया। जिसके अंतर्गत लकड़ी के अलावा किस अन्य वस्तु से बने बैटों पर पाबंदी लगा दी गई। इस मैच को बाद में ऑस्ट्रेलिया ने 138 रनों से जीत लिया।