धोनी की रणनीति ने विराट को दिलाई टेस्ट में सफलता। © Getty Images
धोनी की रणनीति ने विराट को दिलाई टेस्ट में सफलता। © Getty Images

भारत न्यूजीलैंड कोलकाता टेस्ट के बाद भारत एक बार फिर टेस्ट रैंकिग में शीर्ष पर पहुंच चुका है। वेस्टइंजीज दौरे से ही भारत लगातार नंबर वन पर आने की कोशिश में लगा है पर बारिश ने भारतीय टीम के मंसूबों पर पानी फेर दिया था। आखिरकार न्यूजीलैंड के साथ सीरीज में लगातार दो मैच जीत कर विराट कोहली ने भारतीय टीम को टेस्ट में नंबर वन बना दिया। विराट से पहले धोनी भी भारत को टेस्ट गदा दिलवा चुके हैं। ऐसे तो धोनी ने भारत को हर फॉर्मेट में नंबर वन बनाया है पर टेस्ट फॉर्मेट को क्रिक्रेट में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। धोनी को क्रिक्रेट में मैदान पर अपनी अलग और खास रणनीतियों के लिए जाना जाता है। टेस्ट में भी धोनी कुछ खास रणनीतियों को अपनाते थे। कोहली भी कह चुकें हैं कि उन्होंने धोनी से ही मैदान पर फैसला लेना सीखा है। पर कोहली कई मामलों में धोनी से बिल्कुल अलग सोचतें हैं, जिसमें से एक है टेस्ट मैच में गेंदबाजों की संख्या।

धोनी हमेशा से ही चार गेंदबाजों के साथ खेलने की रणनीति में विश्वास करते हैं जबकि कोहली पांच गेंदबाजों के साथ टेस्ट खेलना पसंद करते हैं। लेकिन विराट ने न्यूजीलैंड सीरीज में धोनी की रणनीति के दम पर ही भारत को जीत दिलाई। कोहली ने कानपुर टेस्ट में अश्विन, जडेजा, शमी और उमेश यादव को टीम में शामिल किया था। लेकिन मैच में रोहित शर्मा और मुरली विजय भी गेंदबाजी करते नजर आए। कानपुर की स्पिन फ्रेंडली पिच पर ये तालमेल काम भी कर गया। वहीं कोलकाता की उछाल भरी पिच पर कोहली ने अश्विन, जडेजा के साथ भुवनेश्वर और शमी पर भरोसा दिखाया। हालांकि कोहली ने हमेशा ही छह बल्लेबाज और पांच गेंदबाजों के कॉम्बिनेशन के वरीयती दी है पर इस सीरीज में वे धोनी के पदचिन्हों पर चलते नजर आए।

कोहली ने क्यों पांच गेंदबाजों की रणनीति को छोड़ दिया इसके लिए हमें एक बात पर गौर करना जरूरी है कि पांच गेंदबाजों के साथ खेलते समय शीर्षक्रम के बल्लेबाजों पर रन बनाने का दबाव बढ़ जाता है। अगर आप के पास अच्छे ऑलराउंडर न हो तो ये फैसला आप पर भारी भी पड़ सकता है। लेकिन भारतीय टीम में इस समय अश्विन और जडेजा जैसे बेहतरीन ऑलराउंडर मौजूद है जिसके साथ कोहली पांच गेंदबाजों की रणनीति को आराम से लागू कर सकते थे। ऐसे में कोहली का अपनी इस थ्योरी को छोड़कर धोनी की रणनीति पर भरोसा करने का काऱण था घरेलू मैदान और स्पिन फ्रेंडली पिच। धोनी की चार गेंदबाजों की थ्योरी घरेलू मैदानों पर हमेशा सफल रहती है जब पिच गेंदबाजों को मदद करने वाली होती है। ऐसे में बल्लेबाजी क्रम को मजबूत रखने के लिए ये जरूरी हो जाता है कि आपका सातवां खिलाड़ी भी सफल बल्लेबाज हो। इससे विपक्षी टीम पर स्कोरबोर्ड का दबाव भी बनाया जा सकता है।

पर चार गेंदबाजों की थ्योरी बाहरी देशों की पिचों पर भारत का साथ देती नजर नहीं आती। भारत के वेस्टइंडीज दौरे पर कोहली की पांच गेंदबाजों की रणनीति मेजबानों पर दबाव बनाने में कामयाब रही। पहला टेस्ट में भारतीय टीम अश्विन, अमित शर्मा, उमेश यादव, ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी के साथ खेली और भारत वो टेस्ट एक पारी और 92 रनो से जीता था। अगले टेस्ट में भी कोहली ने इसी कॉम्बिनेशन पर भरोसा रखा। तीसरे मैच में यादव की जगह भुवनेश्नवर को टीम में लाया गया लेकिन पांच गेंदबाजों को लगातार टीम में जगह दी गई। इसी की बदौलत वेस्टइंडीज की मजबूत बल्लेबाजी क्रम के बावजूद भारत ने सीरीज में 2-0 से वेस्टइंडीज को सीरीज में मात दी थी।

धोनी ने टेस्ट से भले ही संन्यास ले लिया हो पर उनकी रणनीति के बदौलत टीम इंडिया एक बार फिर टेस्ट में नंबर एक बनी है। कप्तान कोहली को समझने की जरूरत है कि किसी एक रणनीति के साथ चलने की बजाए स्थिती के हिसाब से टीम कॉम्बिनेशन में बदलाव करने से उन्हें ज्यादा बेहतर नतीजे मिलेंगे।