उथप्पा ने इस मैच में 34 गेंदों में नाबाद 46 रन बनाए थे ©AFP
उथप्पा ने इस मैच में 34 गेंदों में नाबाद 46 रन बनाए थे ©AFP

साल 2007 में टीम इंडिया ने इंग्लैंड का दौरा किया जिसमें टीम इंडिया को इंग्लैंड के साथ 7 वनडे मैच खेलने थे। सीरीज के पहले पांच मैचों में इंग्लैंड ने 3 और टीम इंडिया ने दो मैच जीते। इस तरह टीम इंडिया को सीरीज में बने रहने के लिए छठवें मैच में हर हाल ही में जीत दर्ज करनी थी। सीरीज का छठवां मैच केनिंटन ओवल लंडन में खेला गया। मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड टीम की शुरुआत खराब रही और उन्होंने पारी के चौथे ओवर में ही 20 रनों पर दो विकेट गंवा दिए। ये दोनों ही विकेट भारतीय तेज गेंदबाजों अजीत अगरकर और जहीर खान ने लिए। ऐसे में केविन पीटरसन ने इयान बेल के साथ मिलकर इंग्लैंड की पारी संभाली।

अभी स्कोर 79 रन ही पहुंचा था कि पीयूष चावला ने बेल को 49 रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया। अभी इंग्लैंड टीम तीसरे झटके से उबरी भी नहीं थी कि पॉल कॉलिंगवुड रन आउट हो गए। कॉलिंगवुड ने कुल 1 रन का योगदान दिया और अब इंग्लैंड का स्कोर 83 रन पर 4 विकेट हो चुका था। ऐसी विपरीत परस्थिति में पीटरसन ने धीरज बनाए रखा और चौथे विकेट के लिए ओवेश शाह के अर्धशतकीय साझेदारी निभाई और साथ ही अपना अर्धशतक भी पूरा किया। लेकिन इसी बीच वह भी रन आउट हो गए और इंग्लैंड का स्कोर 137/4 हो गया। पीटरसन ने कुल 53 रन बनाए। ऐसे में शाह और ल्यूक राइट ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने अगले 14 ओवरों में 100 से ज्यादा रन छठवें विकेट के लिए जोड़े और टीम के स्कोर को मजबूती प्रदान की।

इसी दौरान ल्यूक राइट को उथप्पा ने 50 रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर रन आउट कर दिया। उनके बाद बल्लेबाजी करने आए दमित्री मसकर्नेहास। दमित्री ने शाह का अच्छा साथ निभाया और उन्हें अंतिम ओवर तक स्ट्राइक देते रहे। शाह ने इस दौरान अपना शतक पूरा किया और टीम को बड़े स्कोर की ओर ले जाने लगे। लेकिन उनके तमाम प्रयासों के बावजूद टीम 300 के पार जाती नजर नहीं आ रही थी। ऐसी परिस्थिति में भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने 50वें ओवर में युवराज सिंह को आक्रमण पर लगाया। युवराज के सामने इस ओवर में थे दमित्री। दमित्री ने युवराज के इस ओवर में कुल 5 छक्के ठोक दिए और टीम के स्कोर को 316/6 तक पहुंचा दिया। अब ये स्कोर काफी बड़ा था। इस लिहाज से अगर टीम इंडिया को यह मैच जीतना था तो अमूमन हर बल्लेबाज का योगदान जरूरी था।

जवाब में भारतीय टीम बल्लेबाजी करने उतरी। दोनों भारतीय बल्लेबाज सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर ने शुरुआत के ओवरों में तो नपी तुली बल्लेबाजी की। लेकिन जब उनकी आंखें जम गई तो दोनों ने बड़े स्ट्रोक जड़ने भी शुरू कर दिए। भारतीय टीम को अच्छी शुरुआत मिली और दोनों ने महज 22.2 ओवरों में ही 150 रन जोड़ दिए। इस दौरान सचिन तेंदुलकर ज्यादा आक्रामक दिखे और उन्होंने आनन फानन में अपना अर्धशतक पूरा किया। गांगुली भारतीय टीम के पहले विकेट के रूप में आउट हुए। उन्हें ब्रॉड ने 53 रनों के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट किया। सचिन अभी 81 गेंदों में 94 रन बनाकर खेल ही रहे थे कि पनेसर ने उन्हें भी आउट कर दिया। इस तरह टीम इंडिया के दो विकेट 156 रनों पर ही गिर गए।

टीम इंडिया फिर से संकटों में घिरती नजर आई। ऐसे में गौतम गंभीर ने युवराज सिंह के साथ तीसरे विकेट के लिए अर्धशतकीय साझेदारी निभाई और किसी तरह टीम के स्कोर को आगे बढ़ाया। लेकिन मसकर्नेहास ने अपने लगातार दो ओवरों में गंभीर(47) और युवराज सिंह (18) के चलता किया। इस तरह टीम इंडिया का स्कोर 216/4 हो गया। अब जिम्मेदारी थी कप्तान राहुल द्रविड़ पर कि वह एमएस धोनी के साथ मिलकर टीम के स्कोर को आगे बढ़ाते। लेकिन द्रविड़ ज्यादा साथ नहीं दे सके और वह भी 4 रन बनाकर आउट हो गए। अब टीम इंडिया का स्कोर हो चुका था 35.5 ओवरों में 234/5 और जीतने के लिए 85 गेंदों में 82 रनों की दरकार थी जबकि हाथ में 5 विकेट शेष थे। चूंकि, विकेट धड़ाधड़ गिर रहे थे तो ऐसे में बल्लेबाजों को अतिरिक्त जिम्मेदारी लेने की जरूरत थी।

ऐसी विपरीत परिस्थिति में एमएस धोनी और रॉबिन उथप्पा ने जिम्मेदारी निभाई और स्कोर को 294 तक ले गए। इसी बीच धोनी 37 गेंदों में 35 रन बनाकर ब्रॉड की गेंद पर बोल्ड हो गए। इस तरह टीम इंडिया के 294 रनों पर 6 विकेट गिर गए। अब टीम इंडिया को अंतिम 2 ओवरों में 23 रन बनाने थे और क्रीज पर सिर्फ एक नामी बल्लेबाज के रूप में उथप्पा ही बचे थे। इसलिए जिम्मेदारी भी उनपर थी। पारी का 49वां ओवर एंडरसन लेकर आए। उनकी पहली तीन गेंदों पर उथप्पा ने 6 रन बनाए। चौथी गेंद पर उथप्पा आगे बढ़े और उन्होंने एक बड़ा हिट लगाने की कोशिश लेकिन वह बीट हो गए और साथ ही विकेटकीपर भी बीट हो गए और इस तरह बाई के चार रन मिल गए। इस ओवर की अंतिम गेंद पर एक रन लेकर उथप्पा ने स्ट्राइक अपने पास रखी और इस तरह इस ओवर से कुल 13 रन आए। लेकिन अंतिम गेंद पर दूसरा रन लेने के प्रयास में अजीत अगरकर रन आउट जरूर हो गए।

अब टीम इंडिया को अंतिम ओवरो में 10 रन बनाने थे और उनके हाथ में 3 विकेट थे। 50वां ओवर स्टुअर्ट ब्रॉड लेकर आए। ब्रॉड की पहली गेंद पर उथप्पा ने दो रन लिए। दूसरी गेंद को उन्होंने सामने की ओर खेला जिस पर ब्रॉड ने अच्छी फील्डिंग की और अपनी क्रीज से जहीर खान जो रन लेने के लिए निकल चुके थे उन्हें रन आउट कर दिया। इस तरह टीम इंडिया को अब 4 गेंदों में 8 रन की जरूरत थी जबकि उनके हाथ में सिर्फ 2 विकेट ही शेष थे। अगली गेंद पर उथप्पा क्रीज के बाहर निकले और लेग साइड पर फ्लकि करते हुए चौका बटोर लिया। अगली गेंद पर उथप्पा ने मिड ऑफ का चौका जड़ दिया और इस तरह टीम इंडिया मैच 2 गेंद रहते हुए 2 विकेट से जीत गई। उथप्पा ने इस मैच में 33 गेंदों में 47* रन बनाए और भारतीय टीम की जीत के हीरो रहे। उथप्पा भले ही आज टीम इंडिया में न हों लेकिन उस दौर में उनकी बल्लेबाजी ने देश विदेश में खूब धमाल मचाया था।