explained what is impact player rule of bcci all you need to understand
bcci-impact-player

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड घरेलू टी20 टूर्नमेंट- सैयद मुश्ताक अली- में एक नए नियम को लेकर आ रहा है। इस नियम को इम्पैक्ट प्लेयर सब्सिट्यूशन कहा जाएगा। सौरभ गांगुली की अध्यक्षता वाले बोर्ड की चाहत है कि टी20 क्रिकेट को अधिक मसालेदार और रोचक बनाया जाए और इसी को ध्यान में रखते हुए इस नए नियम को उपयोग में लाया जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहता है तो इस नियम को इंडियन प्रीमियर लीग के आने वाले सत्रों में भी आजमाया जा सकता है।

क्या है इम्पैक्ट प्लेयर का नियम (What is Impact Player Rule)?

अगर यह नियम लागू होता है तो टीमों को मैच के दौरान अधिकतम एक बार अपने प्लेइंग इलेवन में बदलाव की इजाजत होगी। टीमें मैच में अपनी जीत की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए इस नियम का इस्तेमाल कर सकती हैं। यह वह खिलाड़ी होगा जिसके बारे में टीमों का मानना होगा कि यह मैच पर प्रभाव डाल सकता है। इसी वजह से बीसीसीआई ने इस स्थान्पन्न खिलाड़ी को ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नाम दिया है। बीसीसीआई ने राज्य संघों को इस बारे में सर्कुलर जारी कर दिया है। इस सर्कुलर में बीसीसीआई ने साफ कर दिया है कि वह खेल को अधिक आकर्षक और रोचक बनाना चाहता है। वह चाहता है कि मैच के दौरान ही टीमे अधिक रणनीतिक फैसले लें और मैच की परिस्थिति के अनुसार ही अपनी रणनीति में बदलाव भी कर सकें।

राज्य संघों को भेजे गए सुर्कुलर में बोर्ड ने कहा है, ‘टीमों को 11 प्लेइंग इलेवन के साथ ही चार सब्सिट्यूट भी चुनने की इजाजत होगी। टॉस के वक्त उन्हें इनके बारे में बताना होगा। इन चारों सब्सिट्यूट के नाम शीट पर लिखे होंगे और इनमें से सिर्फ एक ही को इम्पेक्ट प्लेयर के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।’

इसमें आगे कहा गया है, ‘जिस खिलाड़ी की जगह इम्पैक्ट प्लेयर को इस्तेमाल किया गया है वह मैच में आगे भाग नहीं ले पाएगा और न ही उसे सब्सिट्यूट फील्डर की जगह ही लौटने की इजाजत नहीं होगी। अगर कोई खिलाड़ी ओवर के बीच में ही फील्डिंग के दौरान चोटिल हो जाता है तो मौजूदा नियमों को ही प्रयोग में लाया जाएगा।’

इम्पैक्ट प्लेयर का बल्लेबाजी में इस्तेमाल (How to Use Impact Player Rule)

बल्लेबाजी करने वाली टीम कैसे कर पाएगी इम्पैक्ट प्लेयर का इस्तेमाल- मान लीजिए बल्लेबाजी करने वाली टीम के शुरुआती विकेट जल्दी-जल्दी गिर जाते हैं तो वह बल्लेबाजी को मजबूती देने के लिए इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में किसी बल्लेबाज को जोड़ सकती है। बल्लेबाजी करने वाली टीम या तो किसी विकेट के गिरने के बाद या फिर पारी के ब्रेक में ही इम्पैक्ट प्लेयर को शामिल कर सकती है। अगर बल्लेबाज को चोट लग जाती है और वह रिटायर्ड हर्ट हो जाता है तो इम्पैक्ट प्लेयर उस ओवर के बाद ही जोड़ा जा सकता है। टीम को चौथे अंपायर को इस बारे में बताना होगा।

गेंदबाजी के लिए इम्पैक्ट प्लेयर (Impact Player Rule for Bowling Team)

गेंदबाजी करने वाली टीम को अगर लगता है कि उसने जो चार सब्सिट्यूट खिलाड़ी जोड़े हैं वह गेंदबाजी की उसकी ताकत को बढ़ा सकते हैं तो वह एक अतिरिक्त गेंदबाज को इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में मौका दे सकता है। यह बात भी ध्यान देने वाली है कि इम्पैक्ट प्लेयर को अपने कोटा के पूरे 4 ओवर फेंकने की इजाजत होगी बेशक जिस खिलाड़ी को वह रिप्लेस कर रहा है उसने कितने भी ओवर क्यों न फेंक लिए हों। अगर किसी खिलाड़ी को नियमों के चलते सस्पेंड किया गया हो तो उसकी जगह कोई इम्पैक्ट प्लेयर नहीं ले सकता।

यहां यह बात भी ध्यान देने वाली है कि जब तक कोई खिलाड़ी चोटिल न हो कोई इम्पैक्ट प्लेयर मैदान पर नहीं आ सकता है।

यह भी समझें (Impact Player Rule Important Points)

  • इम्पैक्ट प्लेयर को 14वें ओवर के खत्म होने से पहले ही सामने लाना होगा। अगर मैच देरी से शुरू होता है या ऐसी संभावना होती है कि 10 ओवर का खेल भी नहीं हो पाएगा तो इम्पैक्ट प्लेयर का नियम लागू नहीं होगा।
  • हालांकि, मान लीजिए कि पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने ओवर कटने से पहले, 10 ओवर भी नहीं खेले हैं (या पारी खत्म हो गई है), तो दोनों टीमों को इम्पैक्ट प्लेयर इस्तेमाल करने की इजाजत होगी।
  • इस नियम में एक और बात है- अगर मैच शुरू हो जाता है और उसके बाद किसी कारण से यह 10 ओवर से कम का रह जाता है और सिर्फ एक टीम ने पहले ही इम्पैक्ट प्लेयर का इस्तेमाल कर दिया है तब दूसरी टीम भी इम्पैक्ट प्लेयर के नियम का इस्तेमाल कर पाएगी।
  • लेकिन अगर मैच और छोटा होता है और एक टीम ने इम्पैक्ट प्लेयर का इस्तेमाल नहीं किया है तो दूसरी टीम भी इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।

फिलहाल क्या है नियम

मौजूदा नियम के अनुसार टीमों को प्लेइंग इलेवन के साथ ही एक 12वें खिलाड़ी का नाम देना होता है। इस खिलाड़ी को फील्डिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह खेल में बल्लेबाजी, गेंदबाजी नहीं कर सकता।

क्या बिग बैश से आया है यह नियम?

ऑस्ट्रेलिया की टी20 लीग बिग बैश में ऐसा ही एक नियम है। इसे एक्स-फैक्टर कहा जाता है। इस नियम में हर टीम पहली पारी के 10वें ओवर से पहले 12वें या 13वें खिलाड़ी को प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बना सकती है। इस नियम के लिए जरूरी है कि उस खिलाड़ी ने बल्लेबाजी न की हो या फिर एक से अधिक ओवर न फेंका हो।

जब आईसीसी लाई थी सुपर सब का नियम

क्रिकेट को रोमांचक बनाने के लिए आईसीसी ने साल 2005 में सुपर सब का एक नियम उपयोग में लाना शुरू किया था। इसमें टीमों को 12 खिलाड़ी को रखने की इजाजत थी। टीमें मैच के दौरान प्लेइंग इलेवन में शामिल किसी खिलाडी़ की जगह उसका इस्तेमाल कर सकती थीं। लेकिन यह नियम ज्यादा चला नहीं। और आईसीसी ने जल्द ही इसे समाप्त कर दिया। इस नियम में वह खिलाड़ी सिर्फ एक ही काम कर सकता था। यानी अगर उसे बतौर बल्लेबाज शामिल किया गया है तो वह सिर्फ बैटिंग कर सकता था और अगर गेंदबाज के विकल्प के रूप में आया है तो सिर्फ बोलिंग ही कर सकता था। उसे फील्डिंग की भी इजाजत नहीं थी।