युवराज सिंह और एमएस धोनी © IANS
युवराज सिंह और एमएस धोनी © IANS

पिछले दिनों जब युवराज सिंह की सीमित ओवर क्रिकेट में वापसी हुई तो कई लोगों को आश्चर्य हुआ कि आखिर उन्हें टीम में जगह क्यों दी गई? वो भी तब जब कई नए- नवेले खिलाड़ी अपने अच्छे प्रदर्शन के दम पर डेब्यू करने के लिए कतार में खड़े हुए हैं। युवराज ने दूसरे वनडे में जहां 150 रनों की धुआंधार पारी खेली वहीं तीसरे वनडे में 45 रनों की पारी खेलकर अपने चयन को सही साबित कर दिया। जाहिर है कि युवराज का बल्ला अगर इस सीरीज में न बोला होता तो उनके चयन को गलत मान लिया जाता। लेकिन ऐसी कौन सी बात रही जिसने 35 साल के युवराज के टीम में चयन को आसान बना दिया। जब चयनकर्ताओं से ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया था कि युवी ने घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया है इसलिए उन्हें मौका दिया गया। लेकिन इसके इतर एक और बात रही जिसपर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

दरअसल पिछले कुछ सालों में वनडे क्रिकेट के पारूप और स्थिति को देखें तो वह पहले के मुकाबले बहुत बदल चुका है। फील्डिंग रिस्ट्रिक्शन और दो नई गेंदों के इस्तेमाल ने गेंदबाजों को पंगु बना दिया है। पिछले कुछ समय से टीमें अपने स्क्वाड में स्पेशलिस्ट गेंदबाजों को रखने की बजाय ऐसे खिलाड़ियों को टीम में रखने को ज्यादा तरजीह देती हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी अच्छे हाथ दिखा सकें। जाहिर है कि टीमें क्यों स्पेशलिस्ट गेंदबाज चुनेंगी जब फील्डिंग रिस्ट्रिकिशन के चलते उन्हें पूरे 50 ओवरों तक मार ही पड़ने वाली है। जिसका जीतता जागता उदाहरण हमने हाल में इंग्लैंड के खिलाफ संपन्न हुई वनडे सीरीज में देखा जिसमें लियाम प्लंकेट के अलावा इंग्लैंड टीम ने कोई अन्य स्पेशलिस्ट गेंदबाज नहीं खिलाया। गौर करने वाली बात है कि उनके सभी 11 के 11 खिलाड़ी तेज तर्रार बल्लेबाजी करने में माहिर हैं। वनडे क्रिकेट अब टी20 का लंबा स्वरूप बनता जा रहा है। [ये भी पढ़ें: आखिर क्यों हारी जीत के रथ पर सवार टीम इंडिया, जानें पांच कारण]

इन चीजों को इंग्लैंड ने भलीभांति साल 2015 विश्व कप के बाद से अपनाया है। उनमें एक कौशल है टीमों के द्वारा बीच के ओवरों में तेजी से रन बनाना। पिछले वर्ल्ड कप से टीम इंडिया नंबर 4 से नंबर 8 पोजीशन के बीच में कुछ खास बल्लेबाजी नहीं कर सकी और नतीजतन टीम इंडिया ने विश्व कप 2015 के बाद से जीतने से ज्यादा वनडे मैच हारे हैं। जाहिर है कि टीम इंडिया को 2 और तीन रन लेने की बजाय एक ऐसी पावरहिटर्स की फौज तैयार करने की जरूरत है जो मिडिल ओवरों में धमाकेदार बल्लेबाजी कर पाएं।

आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो नंबर चार से आठ बल्लेबाजी पोजीशन में इंग्लैंड टीम के बल्लेबाजों ने सबसे तेजी से चौके- छक्के जड़े हैं। वे प्रति 100 गेंदों में 53.3 रन चौके जड़कर बनाते हैं। वहीं 34.2 गेंदों के बाद छक्का जड़ते हैं। एक चौका जड़ने के बाद अगला चौका जड़ने के बीच वह कुल 11.2 गेंदें लेते हैं। वहीं दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया है। ऑस्ट्रेलिया हर 100 गेंदों में 43 रन चौके से बनाती है। हर छक्का 51.7 गेंदों में जड़ती है। वहीं हर 12.7 गेंदों के बाद चौका जड़ देती है। टॉप 10 वनडे खेलने वाले देशों की बात करें तो इस मामले में टीम इंडिया नौंवे नंबर पर हैं। यहां तक की गैर टेस्ट दर्जा प्राप्त आयरलैंड टीम भी टीम इंडिया से इस मामले में आगे है।

टीम इंडिया के नंबर चार से नंबर आठ तक के बल्लेबाज हर 100 गेंदों में 36.1 रन चौके से बनाते हैं। वहीं हर छक्का जड़ने के लिए वह 53.7 गेंदें लेते हैं। हर चौके के लिए वे 16.1 गेंदें लेते हैं। ये कारण पिछले कुछ समय से टीम इंडिया की हार का लगातार कारण बन रहा था। इस बात को चयनकर्ताओं ने अच्छी तरह से ध्यान में रखा और रैना और युवराज को टीम में मौका दिया ताकि बीच के ओवरों में छक्कों- चौकों की संख्या को बढ़ाया जा सके। चूंकि, ये हिटिंग टीम के लिए उस समय खतरनाक साबित हो जाती है जब एकाएक विकेट गिरने लगें। इसलिए टीम में मध्यक्रम में ऐसे बल्लेबाजों की जरूरत रहती है जो हिटिंग के साथ पारी को संभालना भी अच्छी तरह से जानते हों।

इस मामले में युवराज सिंह और सुरेश रैना हमेशा से बेहतरीन रहे हैं। साल 2005 के बाद से टीम इंडिया के रिकॉर्ड को देखें तो युवी मध्यक्रम में दूसरे सबसे तेजी से रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज हैं। युवराज ने इस दौरान प्रति 100 गेंदों में जहां 47.81 रन चौकों से बनाए हैं। वहीं हर छक्का जड़ने के लिए 53.5 गेंदें ली हैं। हर चौका जड़ने के लिए युवी ने 10.93 गेंदों का सामना किया है। वहीं आउट होने का रिकॉर्ड उनका इतनी ज्यादा हिटिंग करने वाले बल्लेबाजों के बीच बेहतरीन रहा है और 45.4 गेंदें खेलने के बाद ही औसतन आउट हुए हैं। वहीं बात करें रैना की तो वह इस मामले में भारत की ओर से तीसरे नंबर पर हैं। रैना ने पिछले 12 सालों में हर 100 गेंदों में 43.81 रन चौके से, 50 गेंदों के बाद छक्का जडते हैं वहीं 12.58 गेंदों के बाद चौका जड़ते हैं। इस दौरान वह 37.6 गेंदों के बाद आउट हुए हैं। चूंकि, रैना वर्तमान में टीम इंडिया की टी20 स्क्वाड के सदस्य हैं। और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के बाद सीधे टीम इंडिया चैंपियंस ट्रॉफी खेलेगी। ऐसे में नंबर 4 से आठ के बीच चौके- छक्कों की संख्या पर धोनी, जाधव समेत इन दोनों पर दारोमदार रहेगा। जाहिर है कि युवराजऔर सुरेश रैना की उपस्थिति टीम इंडिया के लिए चैंपियंस ट्रॉफी में टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती है।