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गौतम गंभीर का 'मिडास टच', खिलाड़ियों के लिए लड़ने, अड़ने और खड़े होने वाला कोच, लगातार दो साल जीती आईसीसी ट्रॉफी

गौतम गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठते रहे हों लेकिन उनके नाम लगातार दो आईसीसी ट्रॉफी जीती हैं. और साल 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद इस साल 2026 का टी20 वर्ल्ड कप जीता.

user-circle cricketcountry.com Written by Bharat Malhotra
Last Updated on - March 11, 2026 2:06 PM IST

अहमदाबाद: जोश और अपने फैसले पर पूरा यकीन रखने के बीच बहुत महीन लकीर होती है. और टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर अकसर इस पतली रस्सी पर संतुलन बनाकर चलते हैं. वह कभी जल्दबाजी नहीं करते और ना ही अपने फैसलों पर भरोसा खोते हैं. उनके पास काम करने का एक तरीका है. रविवार को भारतीय टीम का लगातार दूसरी आईसीसी टी20 विश्व कप ट्रॉफी जीतना इसका एक उदाहरण था.

इतिहास तय करेगा कि वह एक महान रणनीतिकार थे या नहीं, लेकिन लगातार दो साल में दो आईसीसी सफेद गेंद की ट्रॉफी को देखते हुए इसमें जरा भी शक नहीं है कि वह भारत की सबसे सफल पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच हैं.

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गंभीर को मिला है अहम लोगों का साथ

इतना ही नहीं, शायद वह भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित कोच भी हैं जिनके बारे में लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है . इस सदी की शुरुआत में ग्रेग चैपल के बाद कोई भी कोच इस तरह राय नहीं बांट सका है.

फिर भी चैपल उस समय खलनायक बन गए थे जिन्हें बिना किसी औपचारिकता के हटा दिया गया था. लेकिन गंभीर के मामले में टेस्ट क्रिकेट में खराब प्रदर्शन और सीनियर खिलाड़ियों को लेकर कड़े फैसले लेने के बावजूद उन्हें हमेशा भारतीय क्रिकेट बोर्ड बोर्डरूम में अहम लोगों का साथ मिला.

गंभीर ने खुलकर रखी है अपनी राय

उन्होंने सोशल मीडिया का गुस्सा झेला है, लेकिन उनका धैर्य हमेशा वैसा ही रहा है. गंभीर का जोश उनके व्यक्तित्व का ही एक हिस्सा है. एक अमीर परिवार से होने के बावजूद गंभीर के लिए कुछ भी आसान नहीं था. दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ की राजनीति में प्रदर्शन ही ही एकमात्र ऐसी चीज थी जिसने उन्हें काम का बनाए रखा.

वह हमेशा से अपनी राय रखने वाले रहे हैं. एक खिलाड़ी, कप्तान और अब कोच के तौर पर उनके फैसले सही या गलत हो सकते हैं, लेकिन उनके पीछे का पक्का इरादा साफ था. यह ईमानदारी और खुद पर भरोसे से आया था, जिसे सही और गलत की गहरी समझ ने और पक्का किया था.

अगर उन्हें लगता था कि वह सही हैं तो अड़े रहे

अगर उन्हें लगता था कि मैच फिक्सिंग में कथित तौर पर शामिल होने की वजह से अजय जडेजा के लिए दिल्ली रणजी ट्रॉफी नेट्स में कोई जगह नहीं है तो वह तब तक नेट्स में नहीं जाने पर अड़े रहे जब तक कि भारत के पूर्व ऑलराउंडर ने इस्तीफा नहीं दे दिया.

दिल्ली के कप्तान के तौर पर, वह उन खिलाड़ियों के लिए क्यूरेटर, प्रशासकों, चयनकर्ताओं से लड़ते थे जिन पर उन्हें भरोसा था. उन्होंने कभी परवाह नहीं की कि उनके सामने कौन है, चाहे वह बिशन बेदी हों या चेतन चौहान. अगर उन्हें लगता था कि केकेआर के कप्तान रहते हुए युवा सूर्यकुमार यादव उनके लिए तुरुप का इक्का थे तो उन्होंने उनका पूरा साथ दिया. और जब वह भारत के मुख्य कोच बने तो उन्हें लगा कि रोहित शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सूर्यकुमार सही आदमी हैं, ना कि हार्दिक पंड्या.

अगर उन्हें लगता कि टी20 विश्व कप के लिए ईशान किशन की जरूरत है, तो वह इसके लिए कहते थे. अगर उन्हें लगता कि हर्षित राणा में प्रतिभा है और वॉशिंगटन सुंदर एक ऐसा ऑल-राउंडर है जिसकी इंडिया को अगले 10 साल में जरूरत होगी, तो वह किसी की नहीं सुनते. कुछ कोच ऐसे होते हैं जो खिलाड़ियों को फेल होने के लिए तैयार करते हैं.

खिलाड़ियों का दिया पूरा-पूरा साथ

वह खराब प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए कुछ भी सहने को तैयार रहते हैं, जब तक वे अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में वापस नहीं आ जाते, तब तक उनका साथ देते हैं. इसका एक उदाहरण टी20 विश्व कप में अभिषेक शर्मा थे. वरुण चक्रवर्ती का टूर्नामेंट खराब रहा लेकिन उन्हें गंभीर का पूरा सहयोग मिला. जब रिंकू सिंह के पिता गुजर गए तो गंभीर ने कभी उनकी जगह किसी को शामिल करने के लिए नहीं कहा क्योंकि वह चाहते थे कि उनका खिलाड़ी उनकी टीम में वापस आ जाए.

एजेंसी- भाषा

T20 वर्ल्ड कप 2026 से जुड़े सभी ताजा अपडेट आप देख सकते हैं: https://www.cricketcountry.com/hi/icc-mens-t20-world-cup-2026/